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हेरिटेज की नए बाजारों में पहुंच की योजना

सोहिनी दास /  06 21, 2017

विस्‍तार की कवायद

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा स्थापित डेयरी उत्पाद कंपनी हेरिटेज फूड्स देशभर में अपने विस्तार की योजना बना रही है क्योंकि इसने अगले पांच साल में अपना राजस्व तिगुना करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों का हिस्सा 24 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करने, ब्रांड का मार्केटिंग खर्च बढ़ाने और रिलायंस रिटेल से खरीदे गए डेयरी ब्रांडों के जरिये नई बाजारों में अपनी पहुंच के दोहन की योजना बनाई है।

कंपनी ने हाल में नए लोगो और पैकेजिंग सुधार के साथ हेरिटेज ब्रांड को नया रूप दिया है। नायडू की पुत्रवधु और हेरिटेज फूड्स की निदेशक ब्रह्माणी नारा कहती हैं, 'हमारा लक्ष्य 2022 तक राष्ट्रीय पहचान वाला ब्रांड बनना है। हमने पहले ही मार्केटिंग गतिविधियां शुरू कर दी हैं और अपने लोगो को नया रूप दिया है।'

हेरिटेज देश में 80,000 करोड़ रुपये के संगठित डेयरी बाजार में से एक बड़ा हिस्सा हासिल करना चाहती है। कंपनी को भारत में डेयरी कारोबार में भरपूर अवसरों होने का पूरा विश्वास है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई कंपनियों के उतरने से संभवतया हेरिटेज को और प्रोत्साहन मिला है। लेकिन सवाल यह है कि हेरिटेज ने बाजार में अपना मुकाम बनाने के लिए इस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों से किस तरह प्रतिस्पर्धा करने की योजना बनाई है?

दूध का मूल्य संवर्धन

मुख्य दूध ब्रांड के विभिन्न वैरिएंट (लाइट, टोंड, डबल क्रीम आदि) से यह अपना मार्जिन बढ़ाना चाहती है। कंपनी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि ब्रांड की इस क्षेत्र के सभी खंडों में मौजूदगी हो। इसके साथ ही हेरिटेज योगर्ट जैसे उत्पादों के जरिये मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों में उतर रही है। हेरिटेज ने नए बाजारों में तगड़ी मार्केटिंग की योजना बनाई है। नारा का कहना है कि कंपनी पिछले कुछ वर्षों से अपने राजस्व का 0.5 फीसदी हिस्सा मार्केटिंग पर खर्च कर रही है, लेकिन 2017-18 में मार्केटिंग पर दोगुना यानी राजस्व का 1 फीसदी हिस्सा खर्च करने की योजना बनाई है। हालांकि अमूल मदर डेयरी जैसी घरेलू और नेस्ले एवं डैनन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबदबे वाले बाजार में अपना मुकाम बनाने के लिए हेरिटेज को अपना ब्रांड स्थापित करने को अनोखा तरीका खोजना होगा।

खुद को पेश करने में चुनौती

नारा का कहना है कि वे सभी उत्पादों में किफायत का मुख्य वादा रखना चाहती हैं। उनका मानना है कि इसी तरीके से नए बाजारों में पैठ बनाई जा सकती है। हेरिटेज ने 2017 में रिलायंस रिटेल का डेयरी कारोबार और 2016 में कर्नाटक की तेजा डेयरी का अधिग्र्रहण करके ब्रांड का दायरा बढ़ाया है। अब कंपनी का कहना है कि वह अपने मूल्य संवर्धित उत्पादों (फ्लेवर्ड योगर्ट) के विपणन के लिए अंतरराष्ट्रीय डेयरी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम बनाने के नजदीक है। अन्य जानकारियां देने से इनकार करते हुए नारा कहती हैं कि यह संयुक्त उद्यम विपणन एवं तकनीक साझा करने के लिए किया जाएगा। केवल डेयरी कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हेरिटेज ने पिछले साल नवंबर में अपना खुदरा एवं संबंधित कारोबार किशोर बियाणी की अगुआई वाले फ्यूचर रिटेल को शेयर समझौते के तहत बेच दिया था।

हालांकि हेरिटेज की मौजूदगी देश के बहुत से राज्यों में है, लेकिन इसके ज्यादातर खरीदार दक्षिण में हैं। कंपनी का लक्ष्य 2022 तक 6,000 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाला राष्ट्रीय ब्रांड बनना है। हेरिटेज समूह सूचीबद्ध कंपनी है। इसकी दो मुख्य कारोबारी शाखाएं- डेयरी और अक्षय ऊर्जा हैं। हेरिटेज फूड्स का सालाना कारोबार 2016-17 में 2,642.89 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया, जिसमें डेयरी खंड का राजस्व 1,870 करोड़ रुपये रहा। हालांकि दक्षिण में लोग इस ब्रांड से परिचित हैं, लेकिन यह उत्तर और पश्चिम में भी प्रवेश करने की योजना बना रहा है, जहां लोग इसे नहीं जानते। नारा कहती हैं कि हेरिटेज खुद को 'फ्रेश' ब्रांड के रूप में स्थापित करना चाहती है।

नारा कहती हैं, 'दिल्ली में हमारे उपभोक्ताओं को जो दूध मिलेगा, वह दिल्ली से पांच घंटे की दूरी पर स्थित केंद्र से आएगा। हम अपने दूध की ताजगी को उभारने के लिए एक टैगलाइन 'बचपन सी ताजगी' का इस्तेमाल करते हैं।' कंपनी का मानना है कि भारतीय उपभोक्ता खाद्य और डेयरी उत्पादों के मामले में स्थानीय उत्पादों को ज्यादा पसंद करते हैं और इससे वह फायदा मिलने की उम्मीद कर रही है। कांटर मिलवार्ड ब्राउन की वर्ष 2016 में 50 सबसे मूल्यवान भारतीय ब्रांडों की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय उपभोक्ताओं का रुझान उन ब्रांडों की तरफ बढ़ रहा है, जिन्हें वे राष्ट्रीय ब्रांड मानते हैं।

क्षमता में बढ़ोतरी

हेरिटेज भारत में 15 प्रसंस्करण संयंत्र चलाती है और वह अपनी मौजूदगी वाले 15 राज्यों में स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद करती है। हाल में इसने रिलायंस रिटेल का डेयरी कारोबार खरीदा है, जिससे उत्तरी बाजारों में हेरिटेज की मौजूदगी में काफी विस्तार हुआ है। इस अधिग्रहण से हेरिटेज के पास दो ब्रांड डेयरी लाइफ और डेयरी प्योर आ गए हैं और उसे उत्तरी भारतीय बाजारों में रिलायंस के ब्रांडों की बिक्री हासिल हो गई है, जो रोजाना करीब 1.50 लाख लीटर होने का अनुमान है।

इस समय हेरिटेज फूड्स रोजाना करीब 14 लाख लीटर दूध का प्रबंधन करती है, जो 3.5 लाख किसानों से (13,000 खरीद एजेंटों) के जरिये खरीदा जाता है। इसके 7,000 वितरण एजेंट और 1,20,000 खुदरा विक्रेता हैं और यह रोजाना करीब 15 लाख परिवारों तक पहुंचता है। अपना कारोबार तिगुना करने के लिए विस्तार पर काम चल रहा है। नारा कहती हैं कि विस्तार, वर्तमान संयंत्रों के आधुनिकीकरण और पांच ग्रीनफील्ड प्रसंस्करण संयंत्र लगाने के लिए हर साल 90 से 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी नए संयंत्रों पर करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

इससे अगले पांच साल में हेरिटेज की दूध प्रबंधन की दैनिक क्षमता दोगुनी यानी 28 लाख लीटर होने का अनुमान है। कंपनी को उम्मीद है कि इसमें करीब एक-तिहाई योगदान उत्तरी बाजारों का होगा। विस्तार का वित्त पोषण कर्ज और आंतरिक कोष से किया जाएगा। नारा का दावा है कि हेरिटेज को निवेशित पूंजी पर 50 फीसदी प्रतिफल मिल रहा है, जो डेयरी उद्योग के मानकों के हिसाब से काफी अधिक है।

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