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बकाया भुगतान : बिक सकती है केयर्न की 9.8 फीसदी हिस्सेदारी!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 06 21, 2017

कर विवाद

वसूली प्रक्रिया के तहत केयर्न इंडिया में 9.8 फीसदी हिस्सेदारी की हो सकती है बिक्री
आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए केयर्न इंडिया के 20 करोड़ शेयरों का मूल्य है करीब 5,200 करोड़ रुपये
पिछले साल विवाद समाधान योजना के तहत सरकार ने एकबारगी कर निपटान योजना पेश की थी लेकिन केयर्न ने नहीं उठाया इसका फायदा

बकाये का भुगतान न किए जाने के कारण आयकर विभाग द्वारा केयर्न इंडिया में केयर्न की जब्त की गई 9.8 फीसदी हिस्सेदारी को अब जल्द ही बिक्री के लिए रखा जा सकता है। पिछले सप्ताह शुरू की गई वसूली प्रक्रिया के तहत सरकार ऐसा कर सकती है जो केयर्न के लिए एक बड़ा झटका होगा। केयर्न से बकाये कर की वसूली के लिए सरकार जिन विकल्पों पर गौर कर रही है उसमें यह भी शामिल है। आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए केयर्न इंडिया के 20 करोड़ शेयरों का मूल्य फिलहाल करीब 5,200 करोड़ रुपये है।

कर कानून में पिछली तारीख से लागू किए गए संशोधन के तहत आयकर विभाग ने केयर्न से पूंजीगत लाभ के लिए 10,247 करोड़ रुपये के कर की मांग की है। बकाये कर के भुगतान के लिए विभाग ने उसे 15 जून तक का समय दिया था लेकिन इस समय सीमा के भीतर कर अदायगी में विफल रहने के कारण अब कंपनी के खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। कर ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग द्वारा की गई कर मांग को सही ठहराया था और उसके करीब तीन महीने बाद अब यह कार्रवाई की जा रही है। ब्रिटेन की प्रमुख तेल कंपनी को आयकर विभाग के जुर्माने का भी सामना करना पड़ सकता है। विभाग उसके खिलाफ 300 फीसदी जुर्माना लगा सकता है जो करीब 30,000 करोड़ रुपये होगा। हालांकि केयर्न पर जुर्माना लगाने के लिए विभाग के पास सितंबर तक का समय है।

सूत्रों के अनुसार, खुले बाजार में केयर्न इंडिया की 9.8 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं हो सकता क्योंकि इससे शेयर भाव को झटका लग सकता है। इन शेयरों की बिक्री अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी वेदांत को करने पर भी विचार किया जा सकता है अन्यथा केयर्न कर वसूली अधिकारी से स्थगनादेश हासिल कर सकती है। हालांकि आयकर विभाग ने वसूली नोटिस का जवाब देने के लिए केयर्न यूके को 15 दिनों का समय दिया है। इन शेयरों की जब्ती का अब तीन साल से भी अधिक समय हो चुका है। 

सूत्रों के अनुसार, कोई आधार मूल्य तक करते हुए 9.8 फीसदी हिस्सेदारी की नीलामी अथवा रिवर्स ऑक्शन की जा सकती है। हालांकि राजस्व विभाग इस मुद्दे पर निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) की भी राय ले सकता है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया। इस बीच, वेदांत ने पहले ही बैंकों से कहा है कि वह एस्क्रो खाते में पड़े 660 करोड़ रुपये कर विभाग को हस्तांतरित कर दे। केयर्न ने पिछले महीने बाजार नियामक सेबी से संपर्क कर अनिल अग्रवाल की अगुआई वाले वेदांत समूह की तरफ से 670 करोड़ रुपये का लाभांश नहीं चुकाए जाने की शिकायत की थी।

केयर्न ब्रिटेन ने कर बकाया वसूली से भारत को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल से अंतरिम आदेश की चाह में अपील की थी, जिसे समिति ने खारिज कर दिया, जो 12 जून को लंदन में सुनवाई के लिए बैठी थी। इसकी अंतिम सुनवाई जनवरी 2018 में होगी। कर की मांग केयर्न ब्रिटेन की तरफ से केयर्न इंडिया होल्डिंग्स की हिस्सेदारी केयर्न इंडिया को करने के मामले में हुई है, जो 2006-07 में समूह के आंतरिक पुनर्गठन के तौर पर हुई थी। इसकी अलग-अलग व्याख्या हुई कि क्या ब्रिटेन की कंपनी ने पूंजीगत लाभ कमाया।

वास्तव में केयर्न अभी तक आईएटीए के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय नहीं पहुंची है। जबकि कर विभाग पहले ही न्यायालय में प्रतिवाद दायर कर चुका है और यह कंपनी की तरफ से आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश पर किसी तरह से स्टे की मांग के खिलाफ दायर हुआ  है। आईपीओ के समय भारतीय संपत्तियों का मालिकाना हक केयर्न यूके होल्डिंग्स से नई कंपनी केयर्न इंडिया को हस्तांतरित कर दिया गया। साल 2006 में केयर्न इंडिया ने केयर्न इंडिया होल्डिंग्स की पूरी शेयर पूंजी का अधिग्रहण केयर्न यूके होल्डिंग्स से कर लिया। इसके बदले केयर्न इंडिया के 69 फीसदी शेयर केयर्न यूके होल्डिंग्स को जारी किए गए। ऐसे में केयर्न यूके होल्डिंग्स के जरिए केयर्न एनर्जी की केयर्न इंडिया में 69 फीसदी हिस्सेदारी है।

बाद में 2011 में केयर्न एनर्जी ने 9.8 फीसदी अल्पांश हिस्सेदारी को छोड़कर केयर्न इंडिया की बिक्री अनिल अग्रवाल के वेदांत समूह को कर दी। पिछले साल के विवाद समाधान योजना के तहत सरकार ने एकबारगी कर निपटान योजना पेश की थी, जो 1 जून से 31 दिसंबर तक के लिए थी, जिसे बाद में 31 जनवरी तक बढ़ाया गया। लेकिन इसके लिए कंपनी की तरफ से लंबित मामले वापस लेने पर सहमति जरूरी थी। इसके तहत सरकार ने इस निपटान योजना का इस्तेमाल करने वालों से जुर्मान व ब्याज माफ करने की पेशकश की थी। केयर्न ने इस योजना का फायदा नहीं उठाया।
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