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कार्टोसैट-2 के साथ 14 देशों के 29 नैनो उपग्रह छोड़ेगा इसरो

टी ई नरसिम्हन /  06 21, 2017

नई उड़ान

इसरो कार्टोसैट-2 शृंखला उपग्रह सहित 31 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा
कार्टोसैट के साथ ही 14 देशों के 29 नैनो उपग्रह भी अंतरिक्ष भेजे जाएंगे
जल वितरण, सड़क नेटवर्क में होगा कार्टोसैट द्वारा भेजी तस्वीरों का इस्तेमाल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) शुक्रवार को दूरसंवेदी उपग्रह कार्टोसैट-2 शृंखला उपग्रह सहित कुल 31 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा। इन उपग्रहों को इसरो के सबसे भरोसेमंद रॉकेट धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिये भेजा जाएगा। पीएसएलवी की यह 40वीं (पीएसएलवी-सी38) उड़ान है। यह रॉकेट चेन्नई के करीब श्रीहरिकोटा से शुक्रवार सुबह नौ बजकर 29 मिनट पर उड़ान भरेगा।

कार्टोसैट-2 शृंखला उपग्रह का वजन 712 किलोग्राम है। पीएसएलवी-सी38 के जरिये भेजे जाने वाले अन्य 30 उपग्रहों का कुल वजन 243 किलोग्राम है। इन सभी उपग्रहों को 505 किलोमीटर की ऊंचाई पर धु्रवीय सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। पीएसएलवी-सी38 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के पहले लॉन्च पैड से छोड़ा जाएगा। यह पीएसएलवी के एक्सएल संस्करण की 17वीं उड़ान होगी जिसमें ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

कार्टोसैट द्वारा भेजे जाने वाली तस्वीरों का इस्तेमाल नक्शे बनाने, शहरी और ग्रामीण उपयोग, तटीय भूमि के इस्तेमाल और नियमन, सड़क नेटवर्क में निगरानी रखने, जल वितरण, भौगोलिक बदलावों और मानव निर्मित संरचनाओं का पता लगाने, जमीन से जुड़ी कई अन्य तरह की जानकारी जुटाने तथा जीआईएस उपयोग के लिए किया जाएगा।

कार्टोसैट-2 उपग्रह के साथ 14 देशों के 29 नैनो उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। इनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लाटविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया, ब्रिटेन और अमेरिका के हैं। साथ ही भारत का भी एक नैनो उपग्रह है। इस तरह पीएसएलवी-सी38 द्वारा भेजे जाने वाले उपग्रहों का वजन 955 किलोग्राम है। इसरो की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और विभिन्न देशों के बीच हुए करार के तहत 29 नैनो उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जा रहा है।

क्या है कार्टोसैट शृंखला ?

क्या आपको अंतरिक्ष की आंख याद है जिनसे पिछले साल सितंबर में सेना को सीमा पार आंतकवादियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने में मदद की थी। इसरो इस आंख को मजबूत कर रहा है। इसका मकसद किसी खास स्थान की हाई रिजोल्यूशन तस्वीर भेजना है। इसकी संरचना इस शृंखला के पिछले उपग्रहों के समान होगी। यह कार्टोसैट शृंखला का सातवां उपग्रह है।

इस परियोजना के लिए 160 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और इस उपग्रह पर लगे पैनक्रोमेटिक कैमरे से मिली तस्वीरों से हाई रिजोल्यूशन नक्शे बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही इस पर हाई रिजोल्यूशन मल्टी स्पेक्ट्रल उपकरण लगा होगा जो हाई रिजोल्यूशन भू आकलन और कार्टोग्राफी में मदद करेगा और पैनक्रोमेटिक कैमरे के साथ तालमेल बिठाएगा। तस्वीरें लेने के अलावा यह अंतरिक्ष से वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर सकता है। ये तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग सैन्य और असैन्य योजनाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।

इसरो पृथ्वी के चप्पे-चप्पे की जानकारी हासिल करने के लिए रिसोर्ससैट, कार्टोसैट, ओशनसैट, रिसैट और इनसैट शृंखलाओं के उपग्रहों का प्रक्षेपण जारी रखना चाहता है। साथ ही उसकी योजना भूस्थिर कक्षा में एक जियो इमेजिंग सैटेलाइट (जीसैट) स्थापित करने की है। कुल मिलाकर इसरो का मकसद सेवाओं को जारी रखने और संवेदकों और पेलोड की प्रौद्योगिकी में विस्तार करना है। इसी सिलसिले में कार्टोसैट-3, ओशनसैट-3 और इनसैट श्रृंखला के उपग्रहों के डिजाइन, विकास और प्रक्षेपण की भी योजना है।

कार्टोसैट शृंखला के पहले उपग्रह कार्टोसैट-1 को 5 मई 2005 को पीएसएलवी-सी6 के जरिये छोड़ा गया था। कार्टोसैट-2 को 10 जनवरी, 2007 को प्रक्षेपित किया गया था। ऐसे और अधिक उपग्रहों के प्रक्षेपण से भारत उपग्रहीय तस्वीरों के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा और विदेशों से ऐसी तस्वीरें हासिल करने में होने वाले खर्च में कमी आएगी।
Keyword: अंतरिक्ष, अनुसंधान, इसरो, उपग्रह, कार्टोसैट, यान, पीएसएलवी, रॉकेट, भूमि, सड़क, नेटवर्क,
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