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फंसे कर्ज पर सेबी का भी मिला साथ, पी-नोट्स के नियम होंगे सख्त

श्रीमी चौधरी / मुंबई 06 21, 2017

... सेबी के निर्णय

कर्ज में फंसी सूचीबद्ध कंपनी का बहुलांश हिस्सा खरीदने वालों को खुली पेशकश लाने से मिलेगी छूट
शेयर अधिग्रहण पर कीमत का फॉर्मूला भी नहीं होगा लागू
एफपीआई के पंजीकरण की प्रक्रिया होगी औैर आसान
पी-नोट जारी करने पर लगेगा शुल्क, लेकिन पी-नोट को पूरी तरह से खत्म करने का इरादा नहीं
पीई के लिए आईपीओ में एक साल की लॉक-इन अवधि की बंदिश हटाई
हेज फंडों को जिंस डेरिवेटिव बाजार में भागीदारी को मंजूरी

फंसे कर्जों के खिलाफ मुहिम में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी मददगार बनने जा रहा है। बुधवार को हुई बोर्ड की बैठक में उसने कर्जदार कंपनियों के अधिग्रहण के मामले में शेयरों संबंधी नियमों में काफी रियायत प्रदान की है। बाजार नियामक ने कहा कि अगर कोई निवेशक सूचीबद्ध कर्जदार कंपनी का नियंत्रण लेना चाहेगा तो उसे ओपन ऑफर लाने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही ऐसे मामलों में शेयरों के अधिग्रहण पर सेबी का कीमत फॉर्मूला भी लागू नहीं होगा। 

मौजूदा हालात में अभी इस तरह की छूट बैंकों को दी जाती है। लेकिन पुनर्गठन प्रक्रिया उस समय पटरी से उतर जाती है जब बैंक नए निवेशक को हिस्सा बेचने का फैसला करते हैं। सेबी के अध्यक्ष अजय त्यागी ने कहा कि बोर्ड ने फंसी हुई परिसंपत्तियों के समाधान को सहज बनाने में मदद का फैसला किया है और इस तरह वह भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय दिवालिया बोर्ड के प्रयासों में मददगाार बन रहा है। 

बैठक में सेबी ने कुछ और भी फैसले किए। इनमें पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी नोट) के डेरिवेटिव बाजार में खुली पोजीशन लेने पर रोक लगाना शामिल है। सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की प्रवेश प्रक्रिया को और आसान बना दिया है। आईपीओ में वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के रूप में पंजीकृत निजी इक्विटी निवेशकों के लिए एक साल की लॉक इन सीमा हटा ली गई है।

सेबी ने कहा कि दिवालिया कानून के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट से मंजूर ऋणग्रस्त कंपनियों के अधिग्रहण को ओपन ऑफर से छूट दी गई है। मौजूदा नियमों के तहत कोई अगर किसी सूचीबद्ध कंपनी में 25 फीसदी हिस्सा खरीदता है तो उसे और 26 फीसदी के लिए ओपन ऑफर लाना पड़ता है। सेबी की राहत से अधिग्रहण की लागत नियंत्रण में रहेगी और फंसे कर्जों की समाधान प्रक्रिया में तेजी आएगी। सेबी ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब रिजर्व बैंक और सरकार 7 लाख करोड़ रुपये की फंसी हुई ऋण संपत्तियों का दर्द दूर करने की कोशिश कर रही है।

सेबी ने कहा कि अल्पमत शेयरधारकों के लिए कुछ सुरक्षा उपाय होंगे। इनमें नए निवेशकों के लिए 3 साल का लॉक इन अवधि और नए प्रमोटर को मंजूरी के लिए विशेष प्रस्ताव की जरूरत शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्गठन के मामलों में बैंकों के सामने आ रही चुनौतियां इससे कुछ हद तक दूर होंगी। इकनॉमिक लॉ प्रैक्टिस में पार्टनर दर्शन उपाध्याय ने कहा कि सेबी का यह अहम कदम है। पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्राथमिकता आवंटन या बोली प्रक्रिया के तहत नए शेयर जारी किए जाएंगे तो उनकी कीमत के बारे में क्या दिशानिर्देश होंगे। बोली प्रक्रिया के तहत समाधान प्रक्रिया के तहत विभिन्न बोलीदाता विभिन्न कीमत की पेशकश करते हैं। कॉर्पोरेट प्रफेशनल्स में पार्टनर और प्रमुख मनोज कुमार ने उम्मीद जताई कि इन योजनाओं के अनुसार जल्दी ही बड़ी कर्जदार सूचीबद्ध कंपनियों में प्रबंधन स्तर पर बदलाव होगा। 

इस बीच सेबी ने उन देशों से आने वाले विदेशी निवेशकों के लिए कागजी काम घटाने का फैसला किया है जिनसे भारत के राजनयिक संबंध हैं। दूसरी तरफ सेबी ने पी-नोट की व्यवस्था को और सख्त बना दिया है और प्रत्येक ओडीआई खातेदार पर एक अप्रैल 2017 से हर तीन साल में 1,000 डॉलर का जुर्माना लगाने का फैसला किया है। सेबी ने कहा कि पी-नोट का इस्तेमाल सिर्फ हेजिंग मकसद से हो सकेगा। 

त्यागी ने कहा कि सेबी का इरादा पी-नोट पर पूरी तरह रोक लगाने का नही है क्योंकि जो निवेशक पंजीकरण से पहले भारतीय बाजार का जायजा लेना चाहते हैं उनके लिए यह महत्वपूर्ण जरिया है। बाजार में नकदी क्षेत्र के बजाय डेरिवेटिव में ज्यादा कारोबार पर सेबी ने कहा कि इक्विटी डेरिवेटिव मार्केट पर परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। त्यागी ने कहा कि खुदरा निवेशकों के लिए यह उत्पाद कितना ठीक है, इसकी समीक्षा करने की जरूरत नहीं है।
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