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मॉनसून पूर्व छूट की बरसात : माल खपाने की होड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्रांडेड परिधान सस्ते

प्रिया नायर /  06 20, 2017

छूट की सौगात

अगर आपको खरीदारी का खुमार चढ़ा है तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। कम से कम इस साल तो नहीं। अब हर साल तो रिटेल स्टोर मई-जून के महीनों में भारी छूट देते नहीं हैं। फैशन स्टोर अमूमन जून के अंत में मॉनसून बिक्री शुरू करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक स्टोर जून-जुलाई में क्लीयरेंस सेल आयोजित करते हैं। लेकिन इस बार 1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हो रहा है और यही वजह है कि इन स्टोर से माल खपाने के लिए समय से पहले ही भारी छूट देनी शुरू कर दी है। 

उदाहरण के लिए विजय सेल्स, कोहिनूर और डिजि1 जैसे इलेक्ट्रॉनिक स्टोर कुछ सामान पर 50 फीसदी तक छूट दे रहे हैं। मुंबई की एक और इलेक्ट्रॉनिक शृंखला स्नेहांजलि ने भी जीएसटी से पहले बिक्री शुरू कर दी है। कंपनी ने अपने विज्ञापनों में दावा किया है कि जीएसटी के बाद अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत 5 फीसदी बढऩे वाले हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनी सैमसंग ने टेलीविजन के साथ मुफ्त डीटीएच कनेक्शन, एयर कंडीशनर और माइक्रोवेव के साथ मुफ्त सर्विस और ज्यादा वारंटी समय की पेशकश की है।

प्यूमा, बाटा, ऑनली, जैक ऐंड जोंस, वीरो मोडा, लुई फिलिप, वैन ह्यसन, बेनेटन और यूएस पोलो जैसे ब्रांड ने सभी प्रमुख शहरों में अपनी सेल पहले ही शुरू कर दी है। पैंटालून्स, लाइफस्टाइल और शॉपर्स स्टॉप जैसी खुदरा शृंखलाओं ने अभी तक सीजन के अंत में होने वाली अपनी बिक्री शुरू नहीं की है लेकिन उन्होंने कुछ चुनिंदा ब्रांडों पर 20 से 40 फीसदी छूट देना शुरू कर दिया है। 

ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट और शॉपक्लूज भी अपने उपभोक्ताओं को जीएसटी लागू होने से पहले के फायदे देने के लिए अपनी तरह बिक्री कर रही हैं। फ्लिपकार्ट फैशन डेज 10 जून से 18 जून तक चला। जीएसटी का असर: जीएसटी लागू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं और रिटेलरों को चिंता है कि पिछले छह महीनों में उन्होंने जो माल खरीदा है उस पर उन्हें पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। यही वजह है कि वे अपने माल को खपाने की कोशिश में लगे हैं। 

अभी रिटेलरों के लिए माल है उस पर वैट, उत्पाद शुल्क और चुंगी का भुगतान हो चुका है। अगर 1 जुलाई तक यह सारा माल नहीं बिका तो रिटेलरों के पास दो तरह का माल होगा। एक माल वह होगा जिसके लिए उनके पास निर्माता कंपनी का बिल होगा और इससे वे जीएसटी का दावा कर सकेंगे। लेकिन दूसरा माल जीएसटी से पहले का होगा। इस माल पर रिटेलरों के पास जीएसटी बिल नहीं होगा और उन्हें केवल 60 फीसदी इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा।

क्रोमा का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी इनफिनिटी रिटेल के मुख्य विपणन अधिकारी ऋतेश घोषाल ने कहा, 'निश्चित रूप जीएसटी से रिटेलरों को घाटा होगा और यही वजह है कि वे पुराना माल खपाने की कोशिश कर रहे हैं।' जीएसटी का असर एक समान नहीं होगा और यह क्षेत्रवार अलग-अलग होगा। उदाहरण के लिए कम वैट दर वाले राज्यों जैसे कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में जीएसटी के बाद कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। गुजरात और मुंबई (मुंबई में चुंगी भी है) जैसे ऊंची वैट दर वाले क्षेत्रों में कीमतों में कमी आ सकती है।

घोषाल ने कहा, 'इसका तत्काल असर 1.5 फीसदी से ज्यादा ऊपर नीचे नहीं होगा।' फ्यूचर रिटेल के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश बियाणी ने कहा कि परिधान के मामले में जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रावधान है जिससे 999 रुपये से कम कीमत वाले सूती कपड़ों के मूल्य में कमी आएगी जबकि 1,000 रुपये से अधिक के कपड़ों की कीमत में कोई बदलाव नहीं होगा। जीएसटी के तहत कपड़ों पर 5 फीसदी और 12 फीसदी कर का प्रावधान है। बियाणी ने कहा, 'जून के अंत और जुलाई में स्टोरों में सीजन समाप्ति की सेल होती है। इस महीने फेस्टिव सीजन में हम 2,000 रुपये तक की खरीद पर 50 फीसदी कैश बैक का ऑफर दे रहे हैं।' 

खप रहा पुराना माल: मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म टैक्रोपार्क के प्रबंध निदेशक अरविंद सिंघल के मुताबिक कई श्रेणियों के लिए जून और जुलाई बिक्री के लिहाज से साल के सबसे कमजोर महीने होते हैं। इसलिए संभव है कि स्टोर जीएसटी के बहाने कम बिक्री वाले माल को खपाने के लिए छूट दे रहे हों। उन्होंने कहा, 'स्टोर के पास जो माल पड़ा है उस पर उन्हें कर में कोई छूट नहीं मिलेगी। यह भी सेल का एक कारण हो सकता है। लेकिन इसका एक कारण यह भी है कि स्टोर कम बिक्री वाले माल को खपाने के लिए जीएसटी का सहारा ले रहे हैं।'

घोषाल ने कहा कि इस सेल का मकसद स्टोरों के पास पड़े माल को खपाना है। उन्होंने कहा, 'यह साल इस समय स्टोर ऐसा करते हैं। यह पिछले सीजन की समाप्ति और नए सीजन की शुरुआत का समय होता है। मई और जून में स्टोर अपना पुराना माल निकालते हैं।' उदाहरण के लिए नए टीवी मॉडल अगस्त से त्योहारी सत्र के बीच लॉन्च किए जाते हैं। इसी तरह नए लैपटॉप और कंप्यूटर मॉडल जुलाई में लॉन्च किए जाते हैं जब स्कूल और कॉलेजों में नया सेमेस्टर शुरू होता है। संभावना है कि छूट का यह दौर जुलाई के बाद भी जारी रहे क्योंकि स्टोरों को नए मॉडलों के लिए जगह बनाने के वास्ते पुराने मॉडलों को खपाना होगा।

सिंघल कहते हैं, 'त्योहारी मौसम सितंबर में शुरू होता है और तब तक बाजार में आ चुके नए मॉडलों पर अमूमन ज्यादा छूट नहीं मिलती है।' अभी जो छूट दी जा रही है वह किसी श्रेणीवार न होकर खास उत्पादों पर दी जा रही है। यह छूट इस बात पर निर्भर करती है कि सामान कितना पुराना है और कौन सा स्टोर दे रहा है। अधिकांश श्रेणियों पर यह छूट 15 से 25 फीसदी के बीच है। लेकिन कुछ मामलों में यह 70 फीसदी तक हो सकती है। घोषाल ने कहा, 'यह छूट उन लोगों के लिए सही है जो सौदों की तलाश में रहते हैं और जिन्हें पुराने माल से कोई फर्क नहीं पड़ता है।'

Keyword: खरीदारी, रिटेल, स्टोर, छूट, मॉनसून, इलेक्ट्रॉनिक, जीएसटी, विज्ञापन, ई-कॉमर्स, फ्लिपकार्ट,
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