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दिवालिया प्रक्रिया : 12 फर्मों में डूबेंगे निवेशकों के सैकड़ों करोड़ रुपये!

एन सुंदरेश सुब्रमण्यन और अशोक दिवासे / नई दिल्ली/मुंबई 06 20, 2017

रिजर्व बैंक ने दिया है आदेश

रिजर्व बैंक ने 12 बड़ी कंपनियों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है जिससे उनके हजारों खुदरा निवेशकों और कुछ शीर्ष संस्थागत निवेशकों के सैकड़ों करोड़ रुपये डूबने की आशंका है। वित्तीय सेवा देने वाली एक संस्था के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'कंपनियों के दिवालिया प्रक्रिया में जाने का मतलब यह है कि उनके पास सुरक्षित ऋणदाताओं का भुगतान करने के लिए ही पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इक्विटी निवेशकों को कुछ नहीं मिलेगा।' कॉर्पोरेट ढांचे के मुताबिक किसी कंपनी के समाप्त होने पर इक्विटी शेयरधारकों को सबसे आखिर में भुगतान मिलता है। लेकिन भारत में सार्वजनिक शेयरधारिता के मामले में यह एक नया अनुभव होगा क्योंकि कॉर्पोरेट दिवालिया व्यवस्था हाल ही में अस्तित्व में आई है।

आरबीआई ने दिवालिया प्रक्रिया के लिए जिन 12 कंपनियों की पहली सूची जारी की है उनमें एस्सार स्टील और भूषण स्टील ऐंड पावर सूचीबद्ध नहीं हैं। ईरा इन्फ्रा में भी करीब एक साल से कारोबार नहीं हो रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक शेष 9 कंपनियों के कुल खुदरा निवेशकों की संख्या 884,784 है। दो लाख रुपये से कम मूल्य के शेयर रखने वाले व्यक्ति को खुदरा निवेशक माना जाता है। मोनेट इस्पात के सबसे कम 24,793 खुदरा निवेशक हैं जबकि लैंको इन्फ्राटेक के सबसे अधिक 262,638 ऐसे निवेशक हैं। उनकी हिस्सेदारी भी अलग-अलग कंपनियों में अलग-अलग है। 

मोनेट इस्पात में जहां उनकी हिस्सेदारी 7.72 फीसदी है जबकि ज्योति स्ट्रक्चर्स में यह 47.76 फीसदी है। कई संस्थागत निवेशकों की भी इन कंपनियों में हिस्सेदारी है। देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेश भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की छह कंपनियों में एक से 3.65 फीसदी तक हिस्सेदारी है। इनमें एबीजी शिपयार्ड, एम्टेक ऑटो, भूषण स्टील, जेपी इन्फ्राटेक, आलोक इंडस्ट्रीज और ज्योति स्ट्रक्चर्स शामिल हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जबसे मंत्रिमंडल ने बड़े कर्जदारों के लिए दिवालिया प्रक्रिया के इस्तेमाल को हरी झंडी दी है, तबसे इन कंपनियों के शेयरों को भारी नुकसान हो चुका है। हालांकि इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे लेकिन बाजार को इसका अंदाजा था। संभव है कि एलआईसी जैसे कई चतुर निवेशकों ने हिस्सेदारी बेचकर अपने नुकसान को कम कर दिया है।

मंत्रिमंडल ने 4 मई को इस योजना को मंजूरी दी थी। तीन मई से 20 जून के बीच इन 9 कंपनियों के शेयरों में 10 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई थी। इसके परिणामस्वरूप इन कंपनियों में खुदरा निवेशकों के शेयरों की कीमत 1,299 करोड़ रुपये से घटकर 971 करोड़ रुपये रह गई। इसी तरह एलआईसी के शेयरों की कीमत 181 करोड़ रुपये से घटकर 142 करोड़ रुपये रह गई होगी। जब इन कंपनियों की समापन प्रक्रिया शुरू होगी तो इन शेयरों की कीमत शून्य हो जाएगी।

लेकिन इस निराशाजनक स्थिति के बावजूद मंगलवार को 7 कंपनियों के शेयरों में सुधार आया। इनमें भूषण स्टील, मोनेट इस्पात, आलोक इंडस्ट्रीज, एबीजी शिपयार्ड, एम्टेक ऑटो, जेपी इन्फ्रा और इलेक्ट्रोस्टील शामिल हैं।  अलबत्ता निवेशक सलाहकारों ने निवेशकों से इसे नजरअंदाज करने और इन कंपनियों के शेयरों से दूर रहने की सलाह दी है। इक्विटी एडवाइजरी ग्रुप मोतीलाल ओस्वाल सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष राहुल शाह ने कहा, 'एक बात साफ है कि इन कंपनियों में अब कुछ बचा नहीं है। ऐसे में इनसे बाहर निकलना सबसे बेहतर विकल्प है। अल्प अवधि के लिए भी इन कंपनियों में पैसे नहीं लगाने चाहिए।'

Keyword: रिजर्व बैंक, दिवालिया प्रक्रिया, खुदरा निवेशक, संस्थागत निवेशक, वित्तीय सेवा, ऋणदाता, भुगतान,
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