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जीएसटी लागू होने से रियल एस्टेट की कीमतों में नहीं होगी बढ़ोतरी

करण चौधरी / नई दिल्ली 06 18, 2017

रियल एस्टेट ग्राहकों को परेशानी

नई कर प्रणाली को लागू होने में दो सप्ताह बचे हैं, इसलिए कुछ रियल एस्टेट डेवलपर संपत्तियों की पूरी रकम के भुगतान को कह रहे हैं
सरकार ऐसे कदम को अवैध करार दे चुकी है
सेवा कर 4.5 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो जाएगा, जिसकी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' से हो जाएगी

एक आईटी कंपनी में इंजीनियर अरविंद पाराशर को कुछ दिन पहले तब एक झटका लगा जब उन्हें अपने रियल एस्टेट डेवलपर से एक ईमेल मिला। इस मेल में डेवलपर ने उन्हें कहा कि या तो वह दिल्ली-एनसीआर में अपने थ्री-बेडरूम फ्लैट की बाकी राशि का भुगतान करें या जुलाई में वस्तुु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद ज्यादा राशि चुकाने को तैयार रहें। डेवलपर को फोन कॉल करने पर उन्हें कर्मचारी द्वारा बताया गया कि सभी नियमों का पालन करने के लिए कंपनी जीएसटी कानून एवं नियमनों के हिसाब से 'डिमांड कम इनवॉयस' में बढ़ोतरी करेगी। 

ई-मेल में कहा गया था, 'इसलिए हम आपको बताना चाहेंगे कि हमारी परियोजना में आपके बुक फ्लैट की अगर बकाया राशि है तो कृपया इसका 1 जुलाई 2017 से पहले भुगतान करें ताकि आप कर में अंतर की वह से बढ़ी राशि के बोझ से बच सकें।' नई कर प्रणाली को लागू होने में दो सप्ताह बचे हैं, इसलिए कुछ रियल एस्टेट डेवलपर संपत्तियों की पूरी रकम के भुगतान को कह रहे हैं। जबकि सरकार ऐसे कदम को अवैध करार दे चुकी है। इसमें बेसहारा फ्लैट मालिक पीस रहे हैं, जिन्हें यह नहीं पता कि क्या उन्हें जीएसटी के बाद ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी। 

पाराशर ने कहा, 'मैं पहले ही कुल 48 लाख रुपये का भुगतान कर रहा हूं। डेवलपर के हिसाब से मुझे करीब 5 लाख रुपये और देने होंगे।' उद्योग के विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि जीएसटी के कारण प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि सेवा कर 4.5 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो जाएगा, लेकिन इसकी भरपाई जीएसटी कानून के तहत 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' से हो जाएगी। इससे अंतिम बिक्री कीमतें यथावत बनी रहेंगी। 

नाइट फ्रेंक इंडिया में मुख्य अर्थशास्त्री एवं राष्ट्रीय निदेशक (अनुसंधान) सामंतक दास ने कहा, 'रियल एस्टेट पर जीएसटी का कोई असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्री पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि उपभोक्ता पर कर का अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। जीएसटी से पहले जिन डेवलपरों को आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) नहीं मिलता था, वे जीएसटी के बाद यह हासिल कर पाएंगे। डेवलपरों को मिलने वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट कर के लिहाज से अत्यधिक उपयुक्त होगा। जीएसटी के मुताबिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का पूरा लाभ ग्राहकों को दिया जाना चाहिए। जीएसटी 12 फीसदी होने और इनपुट टैक्स क्रेडिट से उपभोक्ताओं पर कर का बोझ पहले जितना ही रहेगा।'

उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं के मामले में डेवलपरों को उस हिस्से के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा, जो अब बनेगा। इसलिए अगर खरीदारों को 12 फीसदी जीएसटी चुकाना पड़ा तो उन्हें आईटीसी (डेवलपरों द्वारा उन्हें मुहैया कराया जाने वाला) प्राप्त होगा। नई परियोजनाओं में 12 फीसदी जीएसटी लगेगा और इनपुट टैक्स क्रेडिट पूरी तरह उपभोक्ता को मुहैया कराना होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय, राज्य सरकार और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) को ऐसी कई शिकायतें मिली हैं कि जिन लोगों ने फ्लैट बुक कराए हैं और कुल राशि के एक हिस्से का भुगतान कर दिया है उन्हें 1 जुलाई से पहले पूरा भुगतान करने या ज्यादा कर का बोझ झेलने के लिए कहा जा रहा है। सरकार ने कहा, 'यह जीएसटी कानून के खिलाफ है।' इसमें कहा गया है कि फ्लैट, कॉम्पलेक्स और इमारतों के निर्माण में जीएसटी की दर वर्तमान कर प्रणाली के तहत केंद्रीय एवं राज्य अप्रत्यक्ष करों की तुलना में कम होगी।  

हालांकि उद्योग की संस्थाओं का दावा है कि इस मसले को लेकर भ्रम की स्थिति पूरी होने जा रही परियोजनाओं को लेकर अस्पष्टता के कारण पैदा हुई है। क्रेडाई (राष्ट्रीय) के उपाध्यक्ष मनोज गौर ने कहा, 'ऐसी बहुत सी परियोजनाएं हैं, जो लगभग 80 फीसदी पूरी हो चुकी हैं। इनमें डेवलपर को इनपुट टैक्स क्रेडिट कैसे मिलेगा। इसे लेकर भ्रम की स्थिति है और हम इसे लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि डेवलपर लोगों को शेष राशि के भुगतान के लिए बाध्य नहीं कर सकते।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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