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वैश्विक पहचान की तलाश में कोल इंडिया के श्रमिक संगठन

अभिषेक रक्षित / कोलकाता June 18, 2017

ऐसा नहीं है कि केवल कोल इंडिया ही लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्धता और विदेश में कोयला संपत्तियां खरीदकर वैश्विक स्तर पर मौजूदगी दर्ज करने की योजना बना रही है, बल्कि इसके श्रमिक संगठन भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने के इच्छुक हैं। इससे उन्हें बदलते कारोबारी समीकरणों को सीखने और अपनाने में मदद मिलेगी। कोल इंडिया का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन इंडियन नैशनल माइनवर्कर्स फेडरेशन (आईएनएमएफ) जेनेवा में इंडस्ट्रीयल ग्लोबल यूनियन (आईजीयू) में हिस्सा लेने जा रहा है। आईएनएमएफ को कंपनी के 40 फीसदी से अधिक श्रमिकों का समर्थन हासिल है। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे सदस्य वहां वैश्विक श्रमिक संघों के नेताओं से बातचीत करेंगे। उनका मकसद वैश्विक श्रमिक संघों के नेताओं के अनुभव हासिल कर कोयला श्रमिकों के लिए स्थायी औद्योगिक नीति लाना और सांगठनिक क्षमताओं में सुधार करना है। 

 
आईजीयू सम्मेलन पांच मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जिनमें राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर खनन श्रमिकों के लिए मजबूत श्रम संघ बनाना और तेजी से बदलते खनन के परिदृश्य में कामगारों के हितों की रक्षा करना आदि शाामिल हैं। आईएनएमएफ के महासचिव ए क्यू जमा ने जेनेवा के लिए रवाना होने से पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'खदानों का मनीशीकरण और कंपनी एवं कोयला क्षेत्र का डिजिटलीकरण होने जा रहा है। जब कोल इंडिया वैश्विक मौजूदगी के बारे में विचार कर रही है तो हमें (श्रमिक संगठनों) को भी इसी तर्ज पर ही सोचना होगा और बदलते कारोबारी समीकरणों से कदमताल मिलाना होगा।'
 
जमा के मुताबिक कोल इंडिया की लंदन स्टॉक एक्सचेंज के अधिकारियों के साथ शुरुआती बातचीत इस बात का संकेत है कि कंपनी विदेश से पूंजी जुटाना चाहती है और पूरे पश्चिमी यूरोप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। कंपनी की ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन, इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन (आईएमडब्ल्यूएफ) जैसे अन्य केंद्रीय श्रमिक संगठन (सीटीयू) कंपनी के विदेश में कोयला संपत्तियां खरीदने को देश की खदानों में मशीनीकरण बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखते हैं। 
 
आईएमडब्ल्यूएफ के महासचिव रामेंद्र कुमार ने कहा, 'हम मशीनीकरण के खिलाफ नहीं हैं क्योंकि हमें पता है कि यह उत्पादकता बढ़ाने के लिए जरूरी है। लेकिन हमें ऊर्जा के बदलते परिदृश्य को भी मद्देनजर रखना होगा, जो अक्षय ऊर्जा स्रोतों की तरफ बढ़ रहा है। हमें कोयले के खनन के भविष्य को भी समझना होगा।' जेनेवा में ट्रेड यूनियन कांग्रेस में आईएनएमएफ 140 देशों के श्रमिक संघों के नेताओं से उद्योग के मसलों और आगे की राह पर बातचीत करेगा। आईएनएमएफ ने जेनेवा सम्मेलन में हासिल ज्ञान को कोल इंडिया में लागू करने की योजना बनाई है। 
 
केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने 19 और 20 जून को हड़ताल की घोषणा की है। वे केंद्र द्वारा कोल माइंस प्रॉविडेंट फंड (सीएमपीएफ) के कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में विलय के प्रस्ताव और 5 लाख कोयला श्रमिकों के वेतन में बढ़ोतरी में देरी का विरोध कर रहे हैं। श्रमिक संगठन कंपनी में बाहर से लाए गए कर्मचारियों की बढ़ती तादाद का भी विरोध कर रहे हैं। कोल इंडिया की स्थापना 1975 में कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण के बाद हुई थी। पहले कंपनी के स्थायी कर्मचारियों की तादाद 6.5 लाख थी, जो 2014 में घटकर 3,33,000 पर आ गई थी। सेवानिवृत्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं के बाद कर्मचारियों की संख्या और घटकर 3,26,000 पर आ गई है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के मुताबिक 2014-15 में उत्खनित 49.2 करोड़ टन कोयले में से 52 फीसदी का उत्खनन अनुबंधित श्रमिकों द्वारा किया गया। चालू वित्त वर्ष में यह अनुपात बढ़कर 55 फीसदी होने के आसार हैं। हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के महासचिव राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा, 'महज 5 साल पहले कुल उत्पादन में अस्थायी कर्मचारियों का योगदान करीब 40 फीसदी था। अब यह बढ़कर 55 फीसदी हो गया है और इसके आने वाले दिनों में और बढऩे के आसार हैं।'
Keyword: coal india, कोल इंडिया (सीआईएल),
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