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अन्य समुदाय भी करने लगे पृथक गोरखालैंड की मांग

अभिषेक रक्षित /  June 18, 2017

खुद को गोरखा मुसलमान बताने वाले करीब 2,000 मुसलमानों ने रविवार को तख्तियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। इन तख्तियों पर लिखा था, 'हम अलग गोरखालैंड राज्य चाहते हैं और बिमल गुरुंग का समर्थन करते हैं।' जाहिर है वे अलग गोरखालैंड राज्य के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। जीजेएम उत्तरी पश्चिम बंगाल के गोरखा और लेप्चा आबादी के लिए अलग राज्य की मांग करता रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले एक स्थानीय कारोबारी ने बताया, 'हम गोरखालैंड की मांग का समर्थन करते हैं। यहां रहने वाले तकरीबन 20,000-25,000 मुसलमान खुद की पहचान गोरखा मुसलमान के तौर पर करते हैं और यहां शांतिपूर्ण तरीके से रहते हैं। हम कई पीढिय़ों से यहां रहते आए हैं और हमें गोरखा लोगों से किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।' 

 
दार्जिलिंग के जीजेएम विधायक अमर सिंह राय की तर्ज पर ही यहां के मुसलमानों का मानना है कि इस पर्वतीय इलाके में राज्य सरकार बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थानीय समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। इनका मानना है कि मौजूदा स्थिति को भी संभालने में काफी कोताही बरती गई है। राय का कहना है, 'शांतिपूर्ण तरीके से भी हिंसा और आंदोलन की स्थिति को संभाला जा सकता था। पुलिस, सेना और अद्र्धसैनिक बल को भेजकर सरकार स्थानीय लोगों को डराने की कोशिश कर रही है और एक राजनीतिक आंदोलन को कानून व्यवस्था भंग करने वाली स्थिति में तब्दील कर दिया गया है।' वह कहते हैं, 'मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वह मौजूदा स्थिति को थोड़ा बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश करें।' 
 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को दावा किया कि जीजेएम का ताल्लुक पूर्वोत्तर भारत के आतंकी संगठनों के साथ है। हालांकि राय ने इस दावे को बेहद हास्यास्पद बताया। जीजेएम के वरिष्ठ नेता राय ने कहा कि उनकी पार्टी दो पूर्व निर्धारित शर्तों  के साथ केंद्र से बातचीत करने के लिए तैयार है। पहली शर्त यह है कि दार्जिलिंग में तैनात किए गए सुरक्षा बलों को हटाया जाए और बातचीत का मुद्दा अलग गोरखालैंड राज्य पर ही केंद्रित होना चाहिए। उनका कहना है कि अगर ये शर्तें मान ली जाएं तो राज्य सरकार भी इन वार्ताओं का हिस्सा हो सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'इस बार हमें पूर्ण राज्य से इतर कोई और बात मंजूर नहीं होगी और हम जीटीए या इससे पहले के उपायों की तरह किसी भी स्वायत्त संस्था के निर्माण पर विचार नहीं करेंगे।' हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की तरह जीजेएम भी केंद्र में मौजूद मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)की सरकार से खफा है। 
 
राय का कहना है, 'हमने दो दफा भाजपा के उम्मीदवारों को यह सोचकर चुना कि वे गोरखालैंड की मांग में हमारी मदद करेंगे। लेकिन हम केंद्र के हाथों में बस एक मोहरा ही बनकर रह गए हैं और मौजूदा स्थिति में केंद्र की भूमिका को लेकर हम बिल्कुल खुश नहीं हैं।' उनका मानना है कि राज्य ने बांग्ला भाषा की अनिवार्यता की घोषणा कर पहली सबसे बड़ी भूल कर डाली और साथ ही अपने उद्देश्य को भी स्पष्ट नहीं किया। राज्य सरकार हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रही जिसकी वजह से स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि बनर्जी ने यह स्पष्ट किया कि पर्वतीय इलाके में बांग्ला एक वैकल्पिक भाषा होगी लेकिन जीजेएम अब मंत्रिमंडल की तरफ से इसका प्रस्ताव चाहती है। 
 
जीजेएम ने अपने तीन कार्यकर्ताओं की मौत के विरोध में रविवार को काले झंडे के साथ जुलूस निकाला और 'जय गोरखा' के नारे भी लगाए गए। दोपहर तक कुछ जगहों की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर इस पर्वतीय इलाके में कोई बड़ी घटना नहीं घटी। पहले के मुकाबले पुलिस ने प्रदर्शन रैली को नहीं रोका और जीजेएम ने भी अपने कार्यकर्ताओं के मौत के विरोध में दार्जिलिंग के चौक बाजार में शांतिपूर्ण तरीके से रैली निकाली। शनिवार को जीजेएम ने यह दावा किया कि पुलिस ने उसके तीन कार्यकर्ताओं को मार डाला, हालांकि राज्य प्रशासन ने इसका खंडन किया है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी स्थिति अभी बेहद गंभीर बनी हुई है। जीजेएम के प्रमुख बिमल गुरुंग ने अपने एक गुप्त ठिकाने से वीडियो संदेश भेजना शुरू किया था जिसके बाद इस पर्वतीय इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद हो गईं।
Keyword: west bengal, mamta, darjling,,
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