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जीएसटी विरोध: कपड़ा व्यापारी हड़ताल पर

दिलीप कुमार झा / मुंबई June 15, 2017

सूती कपड़े को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में शामिल करने के सरकार के निर्णय के विरोध में इसके कारोबारियों ने आज एक दिन की राष्टï्रव्यापी हड़ताल की। वित्त मंत्री ने 11 जून को सूती कपड़े पर 5 फीसदी कर लगाने की घोषणा की थी। इसका मतलब है कि अब तक कर नहीं चुका रहीं लगभग 10 लाख छोटी और मझोले आकार वाली इकाइयों को जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद 5 फीसदी कर चुकाना पड़ेगा।
 
कुल मिलाकर, यदि ये इकाइयां अपने दबाव से जूझ रहे व्यवसाय को बरकरार रखना चाहती हैं तो उन्हें जीएसटी चुकाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। सरकार से इनपुट क्रेडिट प्राप्त करने के लिए परिधान निर्माताओं को अब कोई सौदा करने से पहले कपड़ा निर्माताओं से जीएसटी अनुपालन पत्र लेने की जरूरत होगी। टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन द्वारा वित्त मंत्रालय को सौंपे गए एक पत्र में कहा गया है, 'अब तक सूती कपड़े पर कोई शुल्क लागू नहीं था। लेकिन जीएसटी परिषद ने टेक्सटाइल फैब्रिक पर 5 फीसदी जीएसटी का प्रस्ताव रखा है। शुरू में हमें विश्वास था कि इन उत्पादों पर कोई कर (उत्पाद शुल्क या वैट) नहीं लगेगा और ये कर-मुक्त बने रहेंगे। टेक्सटाइल को जरूरी जिंस/विशेष महत्त्व के सामान के तहत वर्गीकृत किया गया है। लगभग 10 करोड़ लोग इस व्यापार से परोक्ष और अपरोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें से ज्यादातर असंगठित क्षेत्र में हैं या स्वरोजगार से जुड़े हुए हैं। यदि टेक्सटाइल फैब्रिक पर जीएसटी थोपा जाता है तो कपड़ा व्यापार की रीढ़ ही टूट जाएगी।' देश में लगभग 25 लाख बिजली-चालित करघे हैं जिनमें 15 लाख मौजूदा समय में महाराष्टï्र में हैं। महाराष्टï्र देश के फैब्रिक उत्पादन में अहम योगदान दे रहा है और बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया करा रहा है। ज्यादातर करघे विकेंद्रीकृत लघु क्षेत्र में हैं और प्रत्येक इकाई के पास सिर्फ 4-16 करघे ही उपलब्ध हैं। यह क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। 
 
टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के संयोजक रायचंद बिनायका ने कहा, 'यदि जीएसटी को वापस नहीं लिया गया तो पूरा कपड़ा व्यवसाय तबाह हो जाएगा। मौजूदा समय में, पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन में सिर्फ धागे पर ही केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है। चूंकि सरकार मौजूदा उत्पाद शुल्क की दर को 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी पहले ही कर चुकी है, इसलिए अकेले कपड़े पर जीएसटी वापस लिए जाने से सरकार को बड़ा राजस्व नुकसान नहीं होगा। यदि यह कर थोपा गया तो इससे असंगठित टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए मौत की घंटी बज जाएगी।' इस बीच व्यापारी जीएसटी की 18 जून को होने वाली अगली बैठक की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। व्यापारियों ने कहा है कि यदि सरकार सूती कपड़े पर 5 फीसदी जीएसटी को वापस नहीं लेती है तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। वहीं कम्पोजिट टेक्सटाइल मिलों को कोई समस्या नहीं हो रही है क्योंकि वे कपड़े पर इस 5 फीसदी जीएसटी को गारमेंट उत्पादन से इनपुट क्रेडिट के तौर पर वापस पाने में सफल होंगी। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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