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आईटी क्षेत्र में वजूद बचाने की जंग

आयान प्रामाणिक और रघु कृष्णन /  06 14, 2017

आगे मुश्किल समय

इस समय आईटी क्षेत्र में करीब 39 लाख लोग कर रहे हैं काम
कंपनियां ज्यादा समय तक हजारों कर्मचारियों को बैठे हुए नहीं दे सकतीं वेतन
नैसकॉम के मुताबिक आईटी क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2017 में 27,000 कम नियुक्तियां कीं
इन्फोसिस ने करीब 11,000 आईटी कार्यों का ऑटोमेशन कर दिया है
कंपनियों को अमेरिका में ऑटोमेशन और स्थानीय नियुक्तियों का दोहरा झटका झेलना होगा
अब अल्पकालिक और नतीजा आधारित हो गई हैं आईटी परियोजनाएं

हाल में एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें फ्रांस की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनी कैप जेमिनाई के मुंबई कार्यालय की एक कर्मचारी कार्मिक अधिकारी से खुद को नौकरी से न निकाले जाने को लेकर लड़ रही है। यह इस बात का संकेतक है कि इस क्षेत्र में हो रहे बदलावों से मानव का मूल्य क्या है। यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें उस कर्मचारी को अपने निष्कासन आदेश का विरोध करते हुए सुना जा सकता है, लेकिन उनका विरोध कोई काम नहीं आया। इस कर्मचारी को अपने सहयोगियों द्वारा लिखे गए कोड में बग (खामी) को मैनुअली दूर करने का 8 साल का अनुभव है। 

उनकी तरह अन्य कंपनियों में जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है, उन्होंने श्रम विभाग से मदद की गुहार लगाई है। मानव संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में 39 लाख लोग कार्यरत हैं, जिनमें से कम से कम 1 लाख की नौकरी चालू वित्त वर्ष के अंत तक जाने के आसार हैं। ऑटोमेशन से टेस्टिंग और फस्र्ट लेवल मैंटिनेंस जैसी नौकरियां खत्म हो रही हैं, जिनमें आमतौर पर उच्चस्तरीय कौशल की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा भारत से इंजीनियर भेजने का भी अमेरिका और ब्रिटेन में विरोध हो रहा है। 

यह निराशाजनक माहौल का दायरा बहुत व्यापक है। भारत के आईटी क्षेत्र की वृद्धि वर्ष 2016-17 में एक अंक में रही। यह साल भी खराब नजर आ रहा है और संभवत इसी वजह से इस क्षेत्र से जुड़ी संस्था नैसकॉम ने वृद्धि के अनुमानित आंकड़े जारी नहीं किए हैं। ऐसे माहौल में उद्योग ने नए कौशल सीखने में कर्मचारियों की उत्पादकता, कुशलता और क्षमता की निगरानी बढ़ा दी है।

कंपनियों ने अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे अपने प्रमुख बाजारों संरक्षणवादी झंझावतों से मुकाबला करने के लिए वहां स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां करना शुरू कर दिया है। हालांकि बहुत से लोग इन हालातों को भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए खुद को बदलने और भविष्य के लिए तैयार होने के मौके के रूप में देखते हैं। नैसकॉम ने कहा है कि सबसे बड़ा यह होने जा रहा है कि अब 'स्केल नहीं स्किल' पर ध्यान दिया जाएगा। 

इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज में बोर्ड के पूर्व सदस्य और इस क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े वी बालाकृष्णन वर्तमान दौर को 'कारोबारी मॉडल में बदलाव केसमय' के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में अप्रवास के मुद्दे, रुपये की मजबूती और डिजिटल तकनीक एवं ऑटोमेशन के उभार के कारण स्थितियां बदल रही हैं।' ये बदलाव डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने और निचले स्तर की नौकरियों में ऑटोमशन को अपनाने को बाध्य कर रहे हैं ताकि लागत कम आए। आईएसजी में पार्टनर (भारतीय कारोबार) राजेश गुप्ता ने कहा कि इन आईटी कंपनियों के ज्यादातर अमेरिकी ग्राहक सेवाओं के एक बिल्कुल अलग मॉडल की तलाश में हैं।

गुप्ता ने कहा, 'अमेरिकी ग्राहक आउटसोर्सिंग के परंपरागत मॉडल में बदलाव कर रहे हैं। वे लीक से हटकर समाधान की मांग करते हैं, जहां सेवा प्रदाता एक कैप्टिव मॉडल की भांति साइट पर ही समाधान मुहैया करा सकता है। सीधे शब्दों में आउटसोर्सिंग तेजी से घटेगी।'

आने वाले समय में लागत घटाने पर ध्यान दिया जाना तय है। बालाकृष्णन ने कहा, 'ये कंपनियां निचले स्तरों पर बड़ी तादाद में लोगों को नियुक्त किया करती थीं, जो नए कर्मचारी होते हैं। इससे औसत कर्मचारी लागत कम रहती थी। लेकिन जब उन्हें औसत वृद्धि 6 से 8 फीसदी रहने के आसार नजर आ रहे हैं तो निचले स्तर के कर्मचारियों की तादाद कम हो रही है और मझोले स्तर के कर्मचारियों की तादाद बढ़ रही है। स्वाभाविक है कि औसत कर्मचारी लागत संतुलित रखने के लिए कुछ मध्यम स्तर के प्रबंधकों को निकालना होगा। अन्यथा इससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा।' अल्वारेज ऐंड मार्शल इंडिया में वरिष्ठ निदेशक (उच्च तकनीक) मलय शाह ने कहा कि कुछ कंपनियां कर्मचारियों से ज्यादा काम लेने पर ध्यान दे रही हैं, जबकि बहुत सी कंपनियां नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की जगह नई नियुक्तियां नहीं कर रही हैं।

Keyword: आईटी, कर्मचारी, वेतन, नैसकॉम, नियुक्ति, नौकरी, ऑटोमेशन, सोशल मीडिया, वायरल, नैसकॉम,
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