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कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल को बढ़ाने होंगे पीठ

वीणा मणि / नई दिल्ली June 14, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से बैंकों को 12 प्रमुख गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के मामले में दिवालिया आवेदन के निर्देश ने ऐसे मामलों के निपटान में नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की क्षमता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। दिवालिया की पूरी प्रक्रिया में एनसीएलटी प्रमुख हितधारक है क्योंकि यह फैसला लेता है कि मामला दिवालिया संहिता 2016 के तहत स्वीकार योग्य है या नहीं।
 
इससे जुड़े प्रोफेशनल्स का कहना है कि दबाव झेलने के लिहाज से मौजूदा ढांचा पर्याप्त नहीं है, जो आरबीआई के कदम से उभरने वाला है। ऐसी ही एक प्रोफेशनल ममता बिनानी ने कहा, अगर ऐसे मामलों को देखा जाना है तो और पीठ की दरकार होगी और कुछ एकल सदस्य वाले पीठ को दो सदस्यीय पीठ बनाया जाना चाहिए। अभी एनसीएलटी के 11 पीठ हैं, जिनमें महानगरों की चार पीठ शामिल हैं। आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद समाधान के लिए कंपनियों को 180 दिन मिलते हैं और नियामक चाहे तो इसे बढ़ाकर 270 दिन किया जा सकता है। एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में किया जा सकता है।
 
इस क्षेत्र के कुछ प्रोफेशनल्स को डर है कि ऐसे मामलों को एनसीएलटी 14 दिन की समयसीमा में स्वीकार करने में शायद सक्षम न हो पाएगा। अभी ज्यादातर मामले तय समयसीमा में स्वीकार किए गए हैं। इसके अलावा ऐसे प्रोफेशनल्स के साथ भी क्षमता से जुड़ा मसला है। जब एनसीएलटी मामला स्वीकार कर लेता है तो अंतरिम समाधान प्रोफेशनल एक महीने के लिए कर्जदार को अपने हाथ में ले लेते हैं, जो कंपनी के प्रवर्तक के तौर पर काम करते हैं। पहले महीने के बाद अंतरिम समाधान प्रोफेशनल की जगह पूर्णकालिक प्रोफेशनल ले लेते हैं। ये प्रोफेशनल इसके बाद लेनदारों की समिति को सलाह देते हैं। बिनानी ने कहा, ये चीजें बड़े मामलों को संभालने के प्रोफेशनल की क्षमता की परख करेंगी। यह बताएगा कि देश में इस मामले से जुड़े कितने अच्छे प्रोफेशनल मौजूद हैं। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के प्रोफेशनल नितेश शर्मा ने कहा, सरकार को नया पीठ स्थापित करना चाहिए, जो आरबीआई की तरफ से संदर्भित मामलों को सुनेगा।
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई),
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