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मसाला निर्यात 12 फीसदी बढ़ा, उच्च स्तर पर

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली June 14, 2017

दुनिया भर के देशों द्वारा खाद्य सुरक्षा विनियमन में सख्ती किए जाने से भारतीय मसालों और मसाला उत्पादों के निर्यात में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। 2016-17 में यह निर्यात मूल्य के रूप में 17,664.61 करोड़ रुपये और मात्रा के रूप में बढ़कर 9,47,790 टन हो गया है। अंतरराष्टï्रीय बाजार में भारी प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारत ने अपने निर्यात में निरंतरता बनाए रखी है। 
मूल्य और मात्रा दोनों ही रूप में मसालों और उनसे संबंधित उत्पादों का निर्यात उत्साहजनक रहा है। 2015-16 में 16,238.23 करोड़ रुपये मूल्य का 8,43,255 टन निर्यात हुआ था। इस तरह, इसके मुकाबले मात्रा के रूप में 12 प्रतिशत और मूल्य के रूप में (रुपये में) नौ प्रतिशत तथा डॉलर में छह प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
 
वित्त वर्ष 2016-17 में भी मिर्च सबसे अधिक मांग वाले मसालों में शुमार रही। इस दौरान 5,070.75 करोड़ रुपये मूल्य की 4,00,250 टन मिर्च का निर्यात हुआ। मात्रा के रूप में इसमें 15 प्रतिशत और मूल्य के रूप में 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ। सबसे ज्यादा निर्यात किए जाने वाले मसालों में जीरा दूसरे स्थान पर रहा। मात्रा के रूप में इसमें 22 प्रतिशत और मूल्य के रूप में 28 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ। 2016-17 के दौरान भारत से 1,963.20 करोड़ रुपये का कुल 1,19,000 टन जीरा निर्यात किया गया। आयातक देशों के बार-बार सावधान किए जाने से मसाला बोर्ड द्वारा की जाने वाली जीरे और इसके गौण उत्पादों की अनिवार्य जांच इस इजाफे की प्रमुख वजह रही। मसाला बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. ए जयतिलक ने कहा कि भारत ने निर्यात के पिछले सभी कीर्तिमानों को पीछे छोड़ दिया है और वैश्विक बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपने गुणवत्तापूर्ण मसालों के लिए बढ़ती अंतरराष्टï्रीय मांग को पूरा किया है। सबसे संतोषजनक बात यह रही कि निर्यात में यह प्रशंसनीय वृद्धि अंतरराष्टï्रीय जिंस व्यापार का निर्धारण और निर्णय करने वाले खाद्य सुरक्षा के कड़े विनियमों के  बावजूद हुई है।
 
खास तौर पर औषधीय क्षेत्र में हल्दी की बढ़ती मांग ने 2016-17 में इसके निर्यात को मात्रा के रूप में बढ़ाकर 1,16,500 टन के स्तर को छू लिया और मूल्य के रूप में 1,241 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर लिया। पिछले वित्त वर्ष कीतुलना में सौंफ में सबसे ज्यादा इजाफा दिखाई दिया। मात्रा के रूप में इसमें 129 प्रतिशत और मूल्य के रूप में 79 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जायफल और जावित्री की निर्यात मांग में भी वृद्धि का रुख रहा। 2015-16 के दौरान 4,050 टन की तुलना में यह 25 प्रतिशत बढ़कर 5,070 टन रही। इसी तरह अजवायन का निर्यात 2016-17 में बढ़कर 6,250 टन हो गया जिसका मूल्य 62.46 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2015-16 के दौरान यह 5,310 टन था जिसका मूल्य 53.28 करोड़ रुपये था। डॉ. जयतिलक ने कहा कि खासतौर पर देश के उत्तरी-पूर्वी इलाके में बड़ी इलायची के उत्पादन को बढ़ाने के मसाला बोर्ड के प्रयासों से इसके निर्यात में मात्रा के रूप में 30 प्रतिशत और मूल्य के रूप में नौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
Keyword: agri, farmer, spice, export,,
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