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एमेजॉन, बिग बास्केट व ग्रोफर्स का सपना

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली June 13, 2017

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को भंग किया गया था, लेकिन इसमें देर इसकी गैर-मौजूदगी से ही हो रही है। ऑनलाइन मार्केटप्लेस एमेजॉन, बिग बास्केट और ग्रोफर्स ने सामूहिक तौर पर फूड रिटेल में एक अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश की योजना बनाई है, लेकिन वह इसमें आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि अंतिम मंजूरी के लिए कोई प्राधिकरण मौजूद नहीं है। एमेजॉन, ग्रोफर्स और बिग बास्केट ने देश में फूड रिटेल स्टोर खोलने के लिए जनवरी में औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के पास आवेदन किया था। सरकार पहले ही फूड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दे चुकी है और इन कंपनियों ने स्टोर खोलने की इच्छा जताई थी। 
 
खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल के मुताबिक, एफआईपीबी भंग किए जाने से ही देर हो रही है। मंगलवार को उन्होंने कहा, एफआईपीबी भंग कर दिया गया है और इसके कारण ही देर हो रही है। हालांकि उन्होंने कहा, इसकी मंजूरी जल्द दी जाएगी। इसी उम्मीद में कंपनियों ने ज्यादातर काम मसलन खुदरा जगह की तलाश और मानव संसाधनआदि पूरा कर लिया है। एमेजॉन पहले ही इस परियोजना में 51.5 करोड़ डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुका है। अन्य कंपनियों की भी योजना तैयार है। इनमें से एक कंपनी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा, ऑफलाइन रिटेल का हमारा खाका तैयार है और बैक एंड भी। 
 
पिछले साल जून में सरकार ने बहुब्रांड खाद्य खुदरा में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी थी, जिसके तहत ई-कॉमर्स के जरिए भी निवेश हो सकता है। हालांकि खाद्य उत्पादों का उत्पादन, प्रसंस्करण और विनिर्माण भारत में ही करना होगा। एफआईपीबी के पास 5,000 करोड़ रुपये तक के निवेश की मंजूरी देने का अधिकार था और एमेजॉन के निवेश प्रतिबद्धता का फैसला इसने ही लिया था, जो 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है। अब हर क्षेत्र के मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों की मंजूरी प्रक्रिया का काम संभाल रहे हैं और इस बाबत प्रस्ताव को मंजूरी औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग देगा। हर मामले विभिन्न मंत्रालयों को अगले तीन हफ्ते में भेजे जाएंगे और डीआईपीपी इस पर अगले 60 दिन में फैसला लेगा। फूड रिटेल को एफडीआई के लिए खोले जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय खुदरा कंपनियों की काफी कम दिलचस्पी नजर आई है, जिनकी शिकायत है कि यह सिर्फ खाद्य के लिए है, जो व्यावहारिक विकल्प नहीं है। वॉलमार्ट और फ्रांस के ऑचन समूह ने देश में निवेश का संकेत दिया है, अगर सरकार खाद्य के अलावा अन्य घरेलू सामान भी बेचने की अनुमति दे।
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