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भारतीय स्टार्टअप का मार्गदर्शन करेगा अमेरिकी 'नेक्सस'

करण चौधरी /  06 11, 2017

अमेरिका के विदेश विभाग शुरू किया कार्यक्रम

अमेरिकी सरकार कुछ भारतीय स्टार्टअप को राह दिखाने की तैयारी में है। दरअसल अमेरिका यह उम्मीद कर रहा है कि इनमें से कुछ स्टार्टअप अपने कारोबार का विस्तार करने में सफल रहेंगे और आगे चलकर उसके यहां भी अपना कामकाज शुरू करेंगे। अमेरिका के विदेश विभाग ने भारत की स्टार्टअप कंपनियों की मदद के लिए 'नेक्सस' नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है। टैक्सस यूनिवर्सिटी के आईसी2 इंस्टीट्यूट के सहयोग से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के जरिये भारतीय स्टार्टअप कंपनियों को शुरुआती दौर की समस्याओं से निपटने में मदद की जाएगी। नेक्सस कार्यक्रम के तहत इस साल के अंत तक करीब 60 भारतीय स्टार्टअप का मागदर्शन किया जाएगा। उनमें से 12 स्टार्टअप को कारोबार के लिए फंड जुटाने में भी मदद की जाएगी।

नेक्सस ने दिल्ली में अपनी गतिविधियां शुरू भी कर दी हैं। आगे चलकर देश के अन्य हिस्सों में भी इसे चलाया जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के इस कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप शुरू करने वाले कारोबारियों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। ये विशेषज्ञ नया कारोबार खड़ा करने में आने वाली तकनीकी समस्याओं से निपटने के अलावा फंड जुटाने में भी उनकी मदद करेंगे। इनमें से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कुछ स्टार्टअप को आगे चलकर अमेरिका में भी अपना आधार तैयार करने में मदद दी जाएगी। 

नेक्सस कार्यक्रम से सलाहकार के तौर पर जुड़े टैक्सस यूनिवर्सिटी के क्लिफ जिंटग्राफ कहते हैं, 'हम इस कारोबारी क्षेत्र के बारे में समझ पैदा करने, संभावित ग्राहकों और साझेदारों से बातचीत के तरीके बताने और बुनियादी मुद्दों पर गहरी समझ बनाने में नए उद्यमियों की मदद करेंगे।' अमेरिकी सरकार का यह कदम इस लिहाज से अहम है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप स्थानीय नौकरियों को बचाने और केवल उच्च योग्यता वाले पेशेवरों को ही वीजा देने की बात करते आ रहे हैं। जब जिंटग्राफ से यह पूछा गया कि क्या संरक्षणवाद के मौजूदा दौर में इस तरह की पहल निरर्थक तो नहीं साबित होगी तो उन्होंने कहा कि संभवत: यह दूसरे बाजारों में भी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा, 'उद्यमशीलता कभी भी निरर्थक नहीं होती है। यह किसी भी नीतिगत या राजनीतिक बाधाओं से आगे निकल जाती है।'

स्टार्टअप कंपनियों के लिए कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा। इंडियन एंजेल नेटवर्क, टीआईई और पीई निवेशकों के साथ ये कार्यशालाएं काम करेंगी। नेक्सस ने भारत के कुछ अग्रणी शिक्षण संस्थानों से संपर्क भी साधा है। आईआईटी और कुछ प्रमुख प्रबंध संस्थानों के साथ मिलकर स्टार्टअप का मार्गदर्शन किया जाएगा। नेक्सस कार्यक्रम के निदेशक एरिक आजुले का कहना है कि नेक्सस स्टार्टअप कंपनियों के लिए एक्सीलरेटर के तौर पर काम नहीं करेगा क्योंकि पहले से ही कई लाभ-भोगी संस्थान यह काम कर रहे हैं। आजुले कहते हैं, 'हम अपने मार्गदर्शन के एवज में न तो उस स्टार्टअप में कोई हिस्सेदारी लेंगे और न ही किसी तरह का कमीशन लेंगे। हां, अगर सही लगेगा तो हम उन स्टार्टअप को फंड मुहैया कराएंगे लेकिन वह हमारा मुख्य लक्ष्य नहीं होगा।'

बहरहाल अमेरिका ऐसा पहला देश नहीं है जो भारतीय स्टार्टअप कंपनियों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। इसके पहले दक्षिण कोरिया भी के-स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के नाम से एक कार्यक्रम शुरू कर चुका है। इस पहल का मुख्य मकसद यह है कि कोरियाई कंपनियों के साथ सहयोगी तकनीक के विकास की संभावना रखने वाले स्टार्टअप की मदद की जाए। इंडिया-कोरिया एसडब्ल्यू कोऑपरेशन सेंटर के कार्यकारी निदेशक ली क्यूंग ह्वान कहते हैं कि इस चुनौती से तकनीक के क्षेत्र में सक्रिय भारतीय स्टार्टअप के लिए कोरियाई बाजार में प्रवेश के रास्ते खुलेंगे और वे आगे चलकर वैश्विक पहुंच भी बना सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर भारत स्टार्टअप के मार्गदर्शन के लिए गठित कार्यक्रमों के लिहाज से काफी आकर्षक स्थल है। नेटऐप और बॉश ने भी इसी सप्ताह भारतीय स्टार्टअप कंपनियों के लिए अपना मार्गदर्शक कार्यक्रम शुरू किया है। भारत की तरह दुनिया के करीब 25 देशों में आईसी2 इंस्टीट्यूट अमेरिकी विदेश विभाग के सहयोग से इस तरह के कार्यक्रम चला रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी सरकार सीधे ही किसी स्टार्टअप को अपने यहां आमंत्रित कर लेगी। आजुले इस बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहते हैं, 'इन स्टार्टअप को विभिन्न स्रोतों से फंड जुटाने में मदद की जाएगी और अगर ऐसा लगेगा कि इनमें से कुछ अमेरिका में कारोबार कर सकती हैं तो फिर टैक्सस यूनिवर्सिटी उन्हें अमेरिका जाने का भी मौका देगी।'
Keyword: startup, company, policy, america,,
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