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बेहद सटीक तस्वीरें उतारने में सक्षम नया कार्टोसैट उपग्रह भेजेगा इसरो

टीई नरसिम्हन /  06 11, 2017

... और तेज होगी भारत की नजर

क्या आपको आकाश की वह आंख याद है, जिसने पिछले साल सितंबर में भारतीय सैनिकों को नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान में आतंकी अड्डों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने में मदद की थी? भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह कार्टोसैट-2 शृंखला में एक नया उपग्रह इस महीने के आखिर में प्रक्षेपित कर इस आंख की नजर को और तेज करने जा रहा है। 

कार्टोसैट-2 शृंखला के तहत प्रक्षेपित किए जा रहे उपग्रहों का मुख्य मकसद धरती की स्पष्ट तस्वीरें मुहैया कराना है। नए उपग्रह का ढांचा इस शृंखला के तहत पहले छोड़े गए उपग्रहों के समान ही है। इसे इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी-सी38 के जरिये आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड से 500 ऊपर भेजा जाएगा। यह इसरो की ओर से प्रक्षेपित किया जाने वाला 7वां कार्टोसैट उपग्रह होगा। 

उपग्रह का वजन 700 किलोग्राम से अधिक है, जिसे सूर्य की समकालिक कक्षा में 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए 160 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उपग्रह से स्पष्ट नक्शे बनाने में मदद मिलेगी, जिसमें उपग्रह में लगे पानक्रोमटिक कैमरे की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाएगा। उपग्रह में एक हाई रिजोल्यूशन का मल्टी स्पेक्ट्रल उपकरण लगा होगा, जिससे पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने और कार्टोग्राफी में मदद मिलेगी। यह उपकरण पानक्रोमटिक कैमरे के साथ मिलकर काम करेगा। 

तस्वीरें लेने के अलावा यह उपग्रह आकाश से वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकता है। ये तस्वीरें और वीडियो सैन्य एवं नागरिक योजना बनाने समेत विभिन्न कार्यों में मददगार होंगे। कार्टोसैट-2 शृंखला के उपग्रहों द्वारा ली गई तस्वीरें नक्शे एवं चार्ट बनाने, शहरी एवं ग्रामीण कार्यों, तटीय जमीन का इस्तेमाल और नियमन, सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण जैसे यूटिलिटी प्रबंधन, भू उपयोग के नक्शे बनाने आदि में मददगार होंगी। भविष्य के पृथ्वी निगरानी कार्यक्रम में भूमि, पानी और महासागर मौसमी उपयोगों के लिए रिसोर्ससैट, कार्टोसैट, ओसियनसैट, रीसैट, इनसैट सीरीज के उपग्रहों की शृंखला को जारी रखना है। 

इन सब का मकसद सेवाओं की निरंतरता बरकरार रखना और सेंसर और पेलोड के संबंध में तकनीकी क्षमताओं में इजाफा करना है। इस संबंध में उपग्रहों की कार्टोसैट शृंखला में कार्टोसैट-3 की डिजाइन, विकास और प्रक्षेपण की योजना बनाई गई है। कार्टोसैट पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह उपग्रहों की शृंखला का पहला उपग्रह कार्टोसैट-1 पीएसएलवी-सी6 के जरिये 5 मई 2005 को प्रक्षेपित किया गया था। इसके बाद 10 जनवरी 2017 को कार्टोसैट-2 छोड़ा गया। ऐसे और उपग्रह प्रक्षेपित करने से देश को उपग्रह तस्वीरों के मामले में आत्मनिर्भर बनने और विदेशी स्रोतों से ऐसी तस्वीरें हासिल करने की लागत घटाने में मदद मिलेगी।
Keyword: ISRO, satellite, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो),
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