Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, August 18, 2017 09:42 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम खबर

कर्ज माफी से बिगड़ेगी राज्यों की सेहत!

ईशान बख्शी /  06 11, 2017

किसानों का कर्ज और मर्ज

राजकोषीय स्थिति के लिहाज से महाराष्ट्र किसान समस्या से परेशान
अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर स्थिति में

किसानों का कर्ज माफ करने की उत्तर प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों ने भी ऋण माफी को लेकर आंदोलन तेज कर दिया। सवाल उठता है कि क्या ये राज्य वित्तीय रूप से किसानों का कर्ज माफ करने की स्थिति में हैं? अगर ऐसा है तो क्या फिर क्या किसानों का कर्ज माफ करना फंड के इस्तेमाल का विवेकपूर्ण तरीका है? महाराष्ट्र की स्थिति पर नजर डालते हैं। राजकोषीय से महाराष्ट्र अधिकांश दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। वर्ष 2016-17 (संशोधित अनुमान) में राज्य का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.2 फीसदी था जिसे 2017-18 में 1.53 फीसदी लाने का लक्ष्य है। यह 2016-17 (बजट अनुमान) में सभी राज्यों के औसत 2.98 फीसदी से कम है। 

इसी तरह जीएसडीपी के अनुपात में राज्य का कर्ज (देनदारियां) 2010 के 23.8 फीसदी के मुकाबले 2016-17 (बजट अनुमान) में घटकर 17.6 फीसदी रह गई। इस तरह इन दोनों मोर्चों पर महाराष्ट्र एफआरबीएम समीक्षा समीक्षा द्वारा तय की गई सीमा से नीचे है और वह किसानों का कर्ज माफ करने की स्थिति में है। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'आदर्श स्थिति में किसानों का ऋण माफ करने की स्थिति से बचा जाना चाहिए। कृषि संकट का कारण कई समस्याएं हैं। महाराष्ट्र अन्य खर्चों में कटौती किए बिना किसानों का कर्ज माफ करने की स्थिति में है।'

महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों का 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किए जाने से 2017-18 के लिए उसका राजकोषीय घाटा बढ़कर 2.71 फीसदी हो जाएगा, बशर्ते कि उसका राजस्व बजट के स्तर पर बरकरार रहे। हालांकि यह प्रबंध करने लायक है क्योंकि 2016-17 के संदर्भ में देखें तो राज्य का कुल पंूजीगत खर्च 37,059 करोड़ रुपये था। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के लिए किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सीमित वित्तीय स्थिति है।

वित्त वर्ष 2015-16 में राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.49 फीसदी था जो 2016-17 (संशोधित अनुमान) में 4.63 फीसदी पहुंच गया। राज्य ने 2017-18 के बजट में इसे 3.49 फीसदी रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन अगर पूर्व के रुझानों को देेखें तो इसके लक्ष्य से दूर रहने की ही उम्मीद है। राज्य ने इसके 2020-21 तक 3 फीसदी पर आने का अनुमान जताया है।

इसी तरह जीएसडीपी के अनुपात में राज्य के कर्ज की बुरी स्थिति है। 2016-17 (संशोधित अनुमान) में राज्य की देनदारियां जीएसडीपी की 24.63 फीसदी थी जिसके 2020-21 तक 26.51 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। इस तरह राज्य के पास अतिरिक्त कर्ज लेने की गुजाइंश नहीं के बराबर है। इस तरह दोनों मोर्चों पर राज्य के एफआरबीएम समीक्षा समिति द्वारा तय सीमा को पार करने की संभावना है। इस तरह राज्य के पास किसानों का कर्ज माफ करने के लिए वित्तीय संसाधन नहीं है। दूसरे खर्चों में कटौती करके राज्य ऐसा कर सकता है।

इक्रा के समूह प्रमुख (कॉर्पोरेट सेक्टर रेटिंग्स) जयंत रॉय ने कहा, 'जब तक अतिरिक्त संसाधन नहीं जुटाए जाते हैं या फिर दूसरे खर्चों पर लगाम नहीं लगाई जाती है तो किसानों का कर्ज माफ करने से राज्य के राजकोषीय घाटे की स्थिति और बदतर होगी।' उन्होंने कहा कि प्रतिबद्घ व्यय, सब्सिडी और सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती करना मुश्किल होगा। किसानों का कर्ज माफ करने के लिए उत्पादक पूंजीगत व्यय के एक हिस्से में कटौती किए जाने की आशंका है। 

लेकिन राज्य के पास कई और विकल्प हैं। कर्ज माफी की प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। इससे सालाना राजकोषीय आंकड़ों पर असर भी कम होगा। राज्य बैंकों का पैसा चुकाने के लिए किसी सरकारी संस्था को बॉन्ड जारी करने को कह सकती है। इसका असर राज्य की बैलेंस शीट पर नहीं दिखाई देगा। साथ ही राज्य इस आर्थिक बोझ को वहन करने के लिए अन्य वित्तीय संसाधनों का भी इस्तेमाल कर सकता है।
Keyword: किसान, कर्ज, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ऋण, आंदोलन, राजकोषीय, जीएसडीपी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या संस्कृति में टकराव है इन्फोसिस से सिक्का की विदाई?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.