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दूरसंचार को राहत पैकेज नहीं मिलने के आसार

निवेदिता मुखर्जी / नई दिल्ली 06 11, 2017

... कर्ज के मर्ज पर मरहम नहीं

दूरसंचार उद्योग पर फिलहाल 4.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज पर सरकार नीतिगत हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं
उद्योग के स्वयं मुश्किलों से निकलने की सरकार को उम्मीद
2019 में आम चुनाव से पहले कई दूसरे बड़े सुधारों पर है सरकार का ध्यान

अच्छी संभावनाओं वाले क्षेत्र खासकर दूरसंचार ऐसे समय में वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं जब नरेंद्र मोदी सरकार आर्थिक सुधारों की एक लंबी फेहरिस्त पर विचार कर रही है। इस बारे में एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि अगले आम चुनाव से पहले सरकार सुधार शुरू करने के लिए इस साल को अंतिम अवसर के रूप में देख रही है। देश में दूरसंचार उद्योग पर इस समय 4.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज है और इस क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों का मुनाफा भी घट रहा है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि सरकार इस क्षेत्र को उबारने के लिए कोई नीतिगत हस्तक्षेप या प्रोत्साहन की घोषणा नहीं करेगी। 

वैसे दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) दूरसंचार कंपनियों के प्रवर्तकों के साथ बैठक करने वाले हैं, लेकिन सूत्रों ने कहा कि सरकार की तरफ से किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं है। दूरसंचार उद्योग ने जो मांगें रखीं हैं, उनमें एक खेमे ने हाल में नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के भुगतान के लिए 40 साल का समय मांगा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, 'ऐसी किसी मांग पर विचार नहीं हो रहा है।' अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार उद्योग पहले भी मुश्किलों में फंस चुका है, लेकिन बाद में यह इनसे सफलतापूर्वक उबर गया। 

इस क्षेत्र की कंपनियों की हालत पहले से ही खराब थी, लेकिन रिलायंस जियो ने आगे इनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं और प्रतिस्‍पर्धा भी खासी बढ़ गई। भुगतान टालने के अलावा दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम उपयोगिता शुल्क और लाइसेंस शुल्क दोनों में कमी की मांग कर रही हैं। समायोजित सकल राजस्व (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) की परिभाषा में बदलाव की भी मांग की जा रही है। यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार मोटे तौर पर चाहती है कि ट्राई और दूरसंचार आयोग दूरसंचार क्षेत्र में स्थायित्व सुनिश्चित करें।

इस उद्योग के अलावा सरकार 2019 में आम चुनाव से पहले मौजूदा वित्त वर्ष में कई दूसरे बड़े सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। मिसाल के तौर पर सरकारी बैंकों के समेकन का मुद्दा प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर है। इसके अलावा तेल क्षेत्र में भी विलय पर विचार हो रहा है। सरकारी कंपनी ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) तीसरी सबसे बड़ी खुदरा तेल विपणन कंपनी एचपीसीएल का 42,000 करोड़ रुपये में अधिग्रहण कर सकती है। 

हालांकि सरकार रोजगार सृजन पर कोई स्पष्ट योजना नहीं ला पाई है लेकिन यह श्रम सुधारों को अपनी सफलताओं के तौर पर पेश करना चाहती है। अधिकारियों के अनुसार श्रम सुधारों की दिशा में राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने जो कदम बढ़ाए हैं, उन्हें दूसरे राज्यों को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि भाजपा शासित राज्य इस दिशा में तेजी दिखाएंगे। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार एयर इंडिया में हिस्सेदारी घटाने के मुद्दे पर तेजी से काम करना चाहती है, लेकिन इस संबंध में औपचारिकताओं पर काम किया जाना अभी बाकी है। परिसंपत्तियों की बिक्री कैसे की जानी है, बिक्री में क्या शामिल करना है या क्या नहीं, क्या निजीकरण सौदे के तहत नुकसान का बोझ उठाना चाहिए या नहीं? सरकार ऐसे कई पेचीदा सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।

वित्त वर्ष को बदलकर जनवरी-दिसंबर चक्र से किया जाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अन्य महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। हालांकि जनवरी 2018 से इस बदलाव का मतलब होगा केंद्रीय बजट अक्टूबर 2017 में पेश किया जाना। यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की जुलाई में पेशकश के भी काफी करीब हो सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बहुत ज्यादा समस्याएं भी अच्छा आइडिया साबित नहीं हो सकती हैं, लेकिन आइडिया के तौर पर राजग सरकार में यह विजेता है। राज्य चुनाव के साथ साथ लोकसभा चुनाव भी उन सुधार प्रक्रिया की दिशा में अहम हैं जिन पर सरकार सक्रियता के साथ विचार कर रही है और इस संबंध में जल्द ही कदम उठाया जा सकता है। वर्ष 2014 में भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा रहे रोजगार सृजन पर अधिकारियों का मानना है कि रोजगार पैदा करने के लिए निवेश किया जाएगा। 
Keyword: दूरसंचार, नरेंद्र मोदी, आर्थिक सुधार, चुनाव, मुनाफा, प्रोत्साहन, घोषणा, ट्राई, नीलामी, स्पेक्ट्रम,
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