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66 वस्तुओं पर दरें हुईं कम

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 06 11, 2017

जीएसटी परिषद की बैठक में नई दरों पर लगी मुहर

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से करीब दो सप्ताह पहले जीएसटी परिषद ने आज 66 तरह के उत्पादों पर पहले निर्धारित कर की दरों को संशोधित कर दियाऔर छोटे व्यापारियों, विनिर्माताओं और रेस्त्रां मालिकों के लिए कंपोजीशन (एकमुश्त) योजना का दायरा बढ़ा दिया। उद्योग जगत ने 133 वस्तुओं की दरों की समीक्षा का अनुरोध किया था जिनमें से जीएसटी परिषद ने इन्सुलिन, अचार, प्रिंटर, अगरबत्ती, स्कूल के बस्ते और काजू सहित 66 वस्तुओं की दरों को कम कर दिया।

जीएसटी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कुछ मामलों में रेट फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी के तहत कर की मौजूदा दर बरकरार रखने के सिद्धांत से परे जाकर विचार किया और उपभोक्ताओं के उपयोग व्यवहार में बदलाव को ध्यान में रखते हुए इन वस्तुओं पर कर की दर कम कर दी। उन्होंने कहा, 'कुछ वस्तुओं पर ऐतिहासिक रूप से ऊंचा कर लगता था लेकिन परिषद को लगा कि इस बोझ को कम करने की जरूरत है।'

जीएसटी के तहत छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजीशन स्कीम का दायरा बढ़ाकर उन व्यापारियों, विनिर्माताओं और रेस्त्रां मालिकों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है जिनका सालाना कारोबार 75 लाख रुपये है। पहले 50 लाख रुपये तक के कारोबारियों को इसमें शामिल किया गया था। इस योजना के तहत वे क्रमश: 1 फीसदी, 2 फीसदी तथा 5 फीसदी की दर से कर का भुगतान कर सकते हैं। जीएसटी के तहत सभी वस्तुओं और सेवाओं को 4 कर श्रेणियों 5, 12, 18 और 28 फीसदी में रखा गया है जबकि कुछ को करमुक्त रखा गया है।

इन्सुलिन, काजू और अगरबत्ती पर कर की दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है। इसी तरह स्कूल बैग, प्रिंटर और ट्रैक्टर पर अब 18 फीसदी जीएसटी लगेगा जबकि पहले इन वस्तुओं को 28 फीसदी की श्रेणी में रखा गया था। बच्चों की अभ्यास पुस्किाओं पर भी जीएसटी को 12 फीसदी से घटाकर करमुक्त कर दिया गया है। 100 रुपये तक के सिनेमा टिकट पर जीएसटी को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है जबकि इससे महंगे टिकट पर 28 फीसदी कर बरकरार रहेगा। रसोई में काम आने वाले सामान जैसे अचार, मस्टर्ड सॉस और मुरब्बे पर अब 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। इन पर पहले 18 फीसदी कर का प्रस्ताव था।

डेलॉयट हस्किंस ऐंड सेल्स के एम एस मणि ने कहा कि जीएसटी की प्रस्तावित दरों में बदलाव इस बात का संकेत है कि कई उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी या फिर जीएसटी लागू होने के बाद उनमें कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, 'इससे जीएसटी के कारण महंगाई बढऩे की आशंका समाप्त होगी। हो सकता है कि इससे कीमतें स्थिर हो जाएं और उपभोक्ताओं को फायदा हो।'

जेटली ने कहा कि परिषद द्वारा तय की गई सभी दरों का औसत मौजूदा कर से उल्लेखनीय रूप से कम है। यह पूछने पर कि क्या फिर से दरों में संशोधन होगा, जेटली ने कहा कि फिटमेंट कमेटी और जीएसटी परिषद ने गहराई से सभी मामलों का अध्ययन किया है और व्यापक चर्चा के बाद दरें निर्धारित की गई हैं। उन्होंने कहा, 'मोटे तौर पर ये अंतिम दरें हैं।'

परिषद ने अकाउंट और रिकॉर्ड के बारे में नियमों को अंतिम रूप दे दिया। परिषद की अगली बैठक 18 जून को होगी जिसमें ई-वे और लॉटरी कर के मुद्दों पर विचार किया जाएगा। पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा, 'ट्रैक्टर और परिधान जैसे कुछ मामलों में कर ढांचे को ठीक करने की कोशिश की गई है।' उन्होंने कहा कि उद्योग को मुनाफाखोरी रोकने के प्रावधानों और ई-परमिट पर स्पष्टीकरण का इंतजार है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों के बीच लेनदेन और उत्पाद शुल्क मुक्त क्षेत्रों में बने सामान पर दिए गए सीजीएसटी के रिफंड पर भी स्पष्टीकरण की जरूरत है।

हाइब्रिड कारों पर जीएसटी की दर कम करने की ऑटोमोबाइल कंपनियों की मांग पर जेटली ने कहा कि इस पर उद्योग ने जो तथ्य पेश किए हैं वे लगत हैं। उन्होंने कहा, 'हमने ऑटो इंडस्ट्री की मांग का विस्तृत अध्ययन किया है और इस संबंध में एक दस्तावेज तैयार किया गया है जिसे सदस्यों के बीच वितरित किया जाएगा। इस दस्तावेज के मुताबिक ऑटो इंडस्ट्री जो तथ्य दे रही है वह गलत है।' हाइब्रिड कारों पर इस समय 30.3 फीसदी कर लगता है जबकि जीएसटी के तहत इसे 43 फीसदी (28 फीसदी और 15 फीसदी) रखा गया है।
Keyword: जीएसटी, बैठक, जीएसटी परिषद, उत्पाद, व्यापारी, विनिर्माता, रेस्त्रां, योजना, समीक्षा,
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