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पी-नोट पर लगाम का प्रस्ताव एफपीआई को नहीं आया रास

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई June 11, 2017

विदेशी निवेशकों ने बाजार नियामक सेबी को पत्र लिखकर पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट) या ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट (ओडीआई) पर लगाम कसने के प्रस्ताव का विरोध किया है। पिछले महीने पेश चर्चा पत्र में बाजार नियामक सेबी ने डेरिवेटिव मार्केट में पी-नोट को सटोरिया पोजीशन लेने से रोकने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त इसमें हर तीन साल में प्रति ओडीआई प्रति सबस्क्राइबर पर 1,000 डॉलर का शुल्क लगाने की बात भी कही गई है। सेबी ने सुझाव दिया है कि ओडीआई जारी करने को हेजिंग के अलावा दूसरे मकसद से डेरिवेटिव में लिए गए दूसरे पोजीशन की बिकवाली के लिए 31 दिसंबर 2020 तक का समय दिया जाएगा। एफपीआई ने नियामक से कहा है कि वैयक्तिक निवेशकों के सटोरिया व हेजिंग पोजीशन को अलग करना उनके लिए मुश्किल होगा और इसका आकलन करना भी कि निवेशकों के पास कितने ओपन पोजीशन हैं।
 
दूसरी ओर, ज्यादातर निवेशक अपने ट्रेड पोजीशन का खुलासा करने के अनिच्छुक होंगे। डेलॉयट के पार्टनर राजेश गांधी ने कहा, अगर पी-नोट जारी करने वाले सबूत पर जोर देते हैं, न कि स्वत: खुलासे पर, तो व्यावहारिक तौर पर निवेशकों को अपने ट्रेड के बारे में पर्याप्त दस्तावेज मुहैया कराना चुनौतीपूर्ण होगा, खास तौर से अगर वे पी-नोट जारी करने वाली विभिन्न निकाय के साथ काम कर रहे हों। पी-नोट जारी करने वालों को भी ऐसे आंकड़े रखने में असुविधा होगी।
 
डेरिवेटिव ट्रेड पर पाबंदी से बाजार में नकदी और प्राइस डिस्कवरी पर असर पड़ेगा, साथ ही पी-नोट के जरिए भारतीय शेयर में होने वाले निवेश की लागत भी बढ़ेगी। ऐसा विश्लेषकों का मानना है। अपनी टिप्पणी में निवेशकों ने कहा है कि वह एकल ओडीआई इश्यूकर्ता के जरिए निवेश करने की नियामक की मांग को पूरा करने में शायद सक्षम नहींं होंगे क्योंकि कई ओडीआई के साथ काम करने पर परिचालन का जोखिम कम हो जाता है। विदेशी निवेशकों ने हेजिंग की परिभाषा पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। एफपीआई के साथ काम करने वाले एक व्यक्ति ने कहा, क्या हेजिंग स्टॉक-टु-स्टॉक पोजीशन को संदर्भित करता है। क्या किसी को शेयरों के बास्केट मसलन निफ्टी के खिलाफ हेजिंग करने या एक देश से दूसरे तक हेजिंग की अनुमति दी जा सकती है यानी भारत में शॉर्ट और चीन में लॉन्ग।
 
निवेशकों ने कहा, सटोरिया कारोबार पर विराम के अलावा संकीर्ण परिभाषा से हेजिंग की गतिविधियों पर भी विराम लग सकता है। निवेशकों ने नियामक से कहा है कि वे नए शुल्क को पूरा कर सकते हैं, लेकिन कुछ एफपीआई की इच्छा है कि नियामक प्रस्तावित 1,000 डॉलर प्रति ओडीआई प्रति सबस्क्राइबर तीन साल में लिए जाने के बजाय एकबार का शुल्क लगाए। पी-नोट जारी करने वाली हर इकाई औसतन 200-300 क्लाइंट संभालती है। ऐसे में पी-नोट जारी करने वालों को 2 लाख से तीन लाख डॉलर चुकाना होगा, जबकि अभी हर तीन साल में उन्हें 3,000 डॉलर देने होते हैं।
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