Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 28, 2017 04:10 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

एनटीपीसी, कोल इंडिया के सामने खड़ी हो रही अस्तित्व की चुनौती

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  June 11, 2017

पिछले महीने की दो खबरों ने देश के बिजली क्षेत्र को उत्साहित किया। पहली खबर थी कोल इंडिया द्वारा लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्घ होने की योजना और दूसरी एनटीपीसी द्वारा मसाला बॉन्ड जारी कर 2,000 करोड़ रुपये का ऋण जुटाना जिसे डॉलर में निस्तारित किया जाएगा। दोनों घटनाएं इन कंपनियों की महत्त्वाकांक्षाओं के बारे में काफी कुछ बताती हैं। खासतौर पर जिस तरह वे स्थायी विकास के लिए वैश्विक फंड जुटाने के प्रयास में हैं। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि कोल इंडिया देश और दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक है और एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है। देश के कुल बिजली उत्पादन का चौथाई हिस्सा एनटीपीसी उत्पादित करती है। 

 
यह आकलन भी जरूरी है कि क्या कोल इंडिया और एनटीपीसी अपनी विकास योजनाएं उन मूलभूत बदलावों के अनुरूप तैयार कर रही हैं जो ऊर्जा क्षेत्र में घटित हो रही हैं। अगर ऐसा नहीं है तो इनके कारोबार के भविष्य पर प्रश्नचिह्नï लग जाएगा। दोनों कंपनियों को कम से कम बदलते ऊर्जा परिदृश्य पर बहस आयोजित करनी चाहिए ताकि उनके कारोबारी लक्ष्यों और प्राथमिकता की समीक्षा हो सके। लेकिन दोनों सरकारी कंपनियां हैं इसलिए यह आशंका भी है कि वे बहुत धीमी प्रतिक्रिया देंगी। 
 
गत वित्त वर्ष में केंद्रीय बिजली प्राधिकार ने अनुमान जताया था कि देश की अधिकतम बिजली मांग 165,000 मेगावॉट रहेगी। उस वक्त देश की अधिकतम उत्पादन क्षमता इसकी करीब दोगुनी यानी 315,000 मेगावॉट थी। उत्पादन क्षमता और मांग के बीच का अंतर बताता है कि बिजली संयंत्र इतने गैरकिफायती क्यों हैं और संयंत्रों का पूरा इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा। क्षमता के कम इस्तेमाल के लिए कोयले की गुणवत्ता भी एक वजह है। बिजली के पारेषण और वितरण के दौरान भी नुकसान होता है जो बिजली चोरी और अवैध तरीके से बिजली लेने के चलते पैदा होता है। बिजली वितरण कंपनियों की खस्ता हालत भी इसी से जुड़ी है।
 
सरकार पहले ही संकटग्रस्त बिजली वितरण कंपनियों को उबारने और उनका ऋण का बोझ कम करने के लिए योजना ला चुकी है। विशेषज्ञों को उस योजना में भी खामी मिली है, हालांकि बड़ी तादाद में बिजली वितरण कंपनियां उसे अपना चुकी हैं। इस योजना में बोझ का बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों द्वारा वहन किए जाने के बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ये कंपनियां टैरिफ में ऐसा इजाफा करेंगी कि ये दोबारा घाटे के भंवर में न उलझें। बहरहाल, अगले कुछ वर्षों में इन बिजली इकाइयों के लिए अच्छा समय जरूर रहेगा। इससे बिजली की मांग बढ़ेगी और क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। 
 
इसके साथ ही बिजली वितरण कंपनियों ने वितरण और पारेषण संबंधी नुकसान कम करने की पहल की है। बिजली वितरण और पारेषण के नुकसान में पहले ही कमी आने लगी है हालांकि मौजूदा 22 फीसदी का स्तर भी आदर्श स्थिति से काफी दूर है। बिजली वितरण कंपनियों की सेहत सुधरने पर इसमें बेहतरी आने की उम्मीद है। बिजली क्षेत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बिजली की मांग सालाना 8 फीसदी की दर से बढऩे के बावजूद करीब 24 करोड़ भारतीयों की पहुंच अभी भी बिजली तक नहीं है। बिजली वितरण सुधार इन लोगों तक बिजली पहुंचा सकता है। इससे उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल भी सुनिश्चित होगा। 
 
बिजली क्षेत्र की कोयला आयात पर निर्भरता भी समस्या की बात है और इससे भी नए तरीकों से निपटा जा रहा है। कोल इंडिया की ओर से उत्पादन वृद्घि के साथ ही आयात में कमी आई है। वर्ष 2014-15 में 21.2 करोड़ टन कोयला आयात का अनुमान लगाया गया था जो अब लगातार कम हो रहा है। कोयला ब्लॉक की नीलामी दोबारा शुरू हो गई है, हालांकि घरेलू उपलब्धता पर इसका असर अभी दिखना है। एक बार मांग में सुधार होने पर घरेलू कोयला उत्पादन भी बढ़ेगा और आयात कम होगा। 
 
बिजली वितरण सुधार से जुड़े इन मुद्दों और कोयले की उपलब्धता की दिक्कत कम होने पर भी कोल इंडिया और एनटीपीसी की चुनौतियां बढ़ती जाएंगी। अगर मौजूदा बिजली संयंत्रों की क्षमता का इस्तेमाल 10 फीसदी सुधरता है तो वितरण के लिए ज्यादा बिजली उपलब्ध होगी। वह मांग से काफी अधिक होगी। यह खबर एनटीपीसी तथा अन्य बिजली कंपनियों की मौजूदा और नई बिजली परियोजनाओं के लिए अच्छी खबर नहीं होगी। 
 
जाहिर सी बात है कि क्षमता इस्तेमाल में मामूली सुधार और अधिकाधिक लोगों तक बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने के बाद बिजली की उपलब्धता मांग से कहीं ज्यादा होगी। इस स्थिति में एनटीपीसी को भी एक नई नीति पर विचार करना होगा ताकि इन नई चुनौतियों के बीच परियोजनाएं व्यवहार्य बनी रहें। लेकिन कोल इंडिया के लिए समस्या और अधिक जटिल हो सकती है। फिलहाल देश में बनने वाली कुल में से करीब 60 फीसदी बिजली कोयले से बनती है। परंतु अब पर्यावरण संबंधी वजहों से कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं से दूरी बनाने का काम चल रहा है। पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा पर आधारित बिजली संयंत्रों से उत्पादित बिजली के दाम तेजी से कम हो रहे हैं। देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 16 फीसदी है और सरकार की रुचि को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में इसमें काफी इजाफा होगा। अचानक नवीकरणीय ऊर्जा व्यवहार्य लग रही है और इसकी कीमत कम हो रही है। 
 
अगर यही रुझान बरकरार रहा तो कोल इंडिया अपना कोयला किसे बेचेगी? निश्चित रूप से वह उन कोयला संयंत्रों को कोयला बेचती रहेगी जो ताप बिजली का निर्माण करते हैं। लेकिन फिर भी कंपनी का भविष्य बहुत अधिक उज्ज्वल नहीं माना जा सकता है। ऐस में जाहिर है एनटीपीसी और कोल इंडिया यानी देश की इन दोनों महारत्न सरकारी कंपनियों को आने वाले दिनों में अस्तित्व की चुनौती से जूझना पड़ सकता है।
Keyword: NTPC, coal india, stock exchange,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या जीएसटी से बढ़ेगी छोटे कारोबारियों की मुश्किलें?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.