बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी के छाए बादल, हुई छूट की वर्षा
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जीएसटी के छाए बादल, हुई छूट की वर्षा

राघवेंद्र कामत और अर्णव दत्ता / मुंबई/नई दिल्ली June 09, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से ब्रांडेड कपड़े और फैशन एक्सेसरीज के खरीदारों की मॉनसून से पहले ही मौज हो रही है। फैशन रिटेल ब्रांड अमूमन हर साल जुलाई में सीजन खत्म होने पर छूट देते हैं लेकिन इस बार उन्होंने जून में ही इसकी शुरुआत कर दी है। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो रहा है और कंपनियां उससे पहले ही अपना स्टॉक खपाना चाहती हैं। प्यूमा, बाटा, ओनली, जैक ऐंड जोंस तथा वेरो मोडा जैसी कंपनियों ने कई बड़े शहरों में अपनी सेल शुरू कर दी है जबकि लुई फिलिप, वैन ह्यïूजन, बेनेटॉन और यूएस पोलो दिल्ली में बिक्री पर छूट दे रही हैं। पेंटालूंस, लाइफस्टाइल और शॉपर्स स्टॉप जैसी रिटेल शृंखलाओं ने अभी तक सीजन के खत्म होने पर होने वाली सेल की औपचारिक शुरुआत नहीं की है लेकिन वे अपने कुछ ब्रांडों और कुछ राष्टï्रीय ब्रांडों पर 20 से 40 फीसदी छूट दे रही हैं। 

 
शॉपर्स स्टॉप के मालिकाना हक वाले हाइपरमार्केट चेन हाइपरसिटी ने सीजन खत्म होने पर दी जाने वाली छूट और सालाना सेल को एक साथ मिलाकर बिक्री शुरू कर दी है। दिल्ली के कनॉट प्लेस में लुई फिलिप के स्टोर के मैनेजर के मुताबिक उनके स्टोर में 10,000 पीस हैं जिसे इसी महीने बेचना है। मैनेजर ने कहा, 'प्रबंधन ने हमें पुराना माल बेचने को कहा है क्योंकि जुलाई में आने वाले माल की अलग कीमत होगी। इसलिए हमने 30 से 40 फीसदी पर माल बेचना शुरू कर दिया है। यह जीएसटी से पहले की सेल है।' मुंबई में लुई फिलिप ने 'तीन खरीदो और दो मुफ्त पाओ' ऑफर शुरू किया है। 
 
वैन ह्यïूजन, यूएस पोलो और बाटा में भी यही कहानी है। कपड़े बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, 'हालांकि कर की नई और पुरानी दरों में कोई खास अंतर नहीं है लेकिन अगर हमने पुराने माल को नहीं बेचा तो अनुपालन के कुछ पचड़े होंगे।' सरकार ने 1,000 रुपये से अधिक कीमत के कपड़ों पर 12 फीसदी और 500 रुपये से अधिक के फुटवीयर पर 18 फीसदी जीएसटी की घोषणा की है। अगर रिटेलरों ने इस बढ़ोतरी को खुद वहन नहीं किया तो इससे इन उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है।
 
मुंबई के गोरेगांव में स्थित ओबेरॉय मॉल के उपाध्यक्ष अनुपम टी ने कहा, 'रिटेलरों का कहना है कि जीएसटी के कारण वे सीजन के अंत में होने वाली सेल पहले आयोजित कर रहे हैं लेकिन मुझे पता नहीं कि इस फैसले में जीएसटी की कितनी भूमिका है।' मुंबई के इनफिनिटी मॉल्स के वरिष्ठï उपाध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि परिधान ब्रांड पहले से ही जीएसटी के तहत ऊंची दर के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'उन्होंने ज्यादा माल नहीं रखा है। वे जानते थे कि उन्हें मौजूदा स्टॉक को खपाने के लिए नियत समय से पहले सेल करनी पड़ेगी।' फूड और ग्रॉसरी शृंखलाओं ने अभी तक ऐसी कोई सेल शुरू नहीं की है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि वे भी इस राह पर चल सकती हैं। एडलवाइस सिक्योरिटीज में संस्थागत इक्विटीज के वरिष्ठï उपाध्यक्ष अवनीश रॉय ने कहा, 'फूड और ग्रॉसरी में इस महीने के दूसरे पखवाड़े में सेल होगी। कंपनियां खुदरा व्यापारियों की चिंताओं से वाकिफ हैं और स्टॉक आउट की स्थिति नहीं चाहती हैं। जहां भी अनुपालन और डेटा का मामला है वे भरपाई करने के लिए तैयार हैं।'
 
अलबत्ता रिटेलर इससे सहमत नहीं हैं। फ्यूचर रिटेल के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश बियानी ने कहा कि जीएसटी में पर्याप्त इनपुट क्रेडिट का प्रावधान है जो नई और पुरानी दरों के बीच अंतर पाट देगा। बियानी ने कहा, 'कपड़ों के मामले में नई और पुरानी दरों में महज 0.9 फीसदी का अंतर है। इसलिए ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।' डी-मार्ट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी नेविल नरोन्हा ने कहा कि उनके पास अधिकतम 30 दिन का स्टॉक है। उन्होंने कहा, 'हम वैसे भी ज्यादा स्टॉक नहीं रखते हैं। इसे और कम करने से बिक्री प्रभावित होगी।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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