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'जीएसटी की तैयारी के लिए अभी 50 दिन'

दिलाशा सेठ और निवेदिता मुखर्जी / नई दिल्ली 06 08, 2017

1 जुलाई से लागू होगा जीएसटी

वैट हो या जीएसटी, कर भुगतान के तरीके को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा
छोटे उद्यमियों के मामले में जटिलता कम है और उनके मौजूदा चार्टर्ड अकाउंटेंट जीएसटी फाइलिंग आसानी से कर लेंगे
बड़ी कंपनियां सलाहकारों व वकीलों से सलाह लेकर जीएसटी को आसानी से लागू करने में सक्षम होंगी

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) के मुख्यालय में इस समय बहुत तेजी से काम चल रहा है, जो 1 जुलाई से लागू होने जा रही नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की सूचना तकनीक की रीढ़ है। नई दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के नजदीक एयरोसिटी में स्थित कार्यालय के चौथे तल पर बैठे जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार इस समय सबसे ज्यादा व्यस्त हैं। भारत के उद्योग जगत से जुड़े छोटे कारोबारी, नीति निर्माता से लेकर सलाहकार व वकील नए कर के बारे में स्पष्ट जानकारी की कवायद में लगे हैं, जिसे लागू होने में महज 20 दिन बचे हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु और अन्य शहरों में स्थित जीएसटीएन के कार्यालयों में लगातार टेलीफोन की घंटियां बज रही हैं और बैठकों का दौर चल रहा है।

तमाम बैठकों व फोन कॉल की व्यस्तताओं के बीच गुरुवार सुबह जीएसटीएन के सीईओ प्रकाश कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि नई कर व्यवस्था के लिए 20 दिन नहीं, वास्तव में 50 दिन का वक्त है। उन्होंने कहा, 'जीएसटी के तहत पहला रिटर्न अगस्त में ही दाखिल होगा, इसलिए हमारे पास पर्याप्त वक्त है।'  बहरहाल 1 जुलाई से इनवाइसिंग व्यवस्था लागू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जुलाई की तिथि नियत है और उन्होंने सितंबर से जीएसटी लागू किए जाने पर हो रहे किसी विचार की चर्चा को पूरी तरह खारिज किया। 

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक नहीं चला तो? और ऐसी स्थिति में प्लान बी और प्लान सी क्या है? कुमार ने किसी वैकल्पिक स्थिति पर बातचीत से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'हम वह सब कुछ करेंगे, जो किए जाने की जरूरत है।' जीएसटी सुविधा प्रदाताओं (जीएसपी) जिन्हें करदाताओं के बीच जाना है, उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि जीएसटीएन को अभी भी 30 से 40 प्रतिशत एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर जारी करना है। कुमार ने इन आंकड़ों पर बात करने से मना किया, लेकिन उन्होंने कहा कि जीएसपी पूरी व्यवस्था का एक हिस्सा हैं। 

कर व्यवस्था में बदलाव को लेकर छोटे व मझोले उद्योगों की असुविधा के बारे में पूछे जाने पर जीएसटीएल के सीईओ ने कहा कि चाहे वैट हो या जीएसटी, कर भुगतान के तरीके को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं होने जा रहा है। विश्लेषकों व उद्योग जगत के पर्यवेक्षकों ने इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि बड़ी कंपनियां तो सलाहकारों व वकीलों से सलाह लेकर जीएसटी को आसानी से लागू करने में सक्षम होंगी, लेकिन छोटे उद्योगों को यह सुविधा नहीं मिल पाएगी। इसके बारे में कांत ने कहा कि बड़ी कंपनियों की जरूरतें ज्यादा हैं, जिन्हें कई राज्यों में काम करना है। इसकी तुलना में छोटे उद्यमियों के मामले में जटिलता कम है और उनके मौजूदा चार्टर्ड अकाउंटेंट जीएसटी फाइलिंग आसानी से कर लेंगे।
Keyword: जीएसटीएन, सूचना तकनीक, हवाईअड्डा, एयरोसिटी, सलाहकार, वकील, टेलीफोन, बैठक, रिटर्न,
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