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पुनर्गठन से फर्मों ने बचाए करोड़ों

पवन बुरुगुला / मुंबई June 08, 2017

मार्च में शेयरधारिता का पुनर्गठन करने वाले भारतीय प्रवर्तकों को अंतत: राहत मिल गई है। आम बजट में लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर पर एक प्रावधान लागू किए जाने के प्रस्ताव के प्रतिकूल असर को भांपते हुए कई भारतीय प्रवर्तकों ने 2 लाख करोड़ रुपये की शेयरधारिता का आपस में हस्तांतरण किया। यह हस्तांतरण विभिन्न इकाइयों में एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक डील के जरिए हुआ, जिस पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) लागू होगा।
 
1 अप्रैल 2017 से प्रभावी नए नियमों के मुताबिक, एसटीटी का भुगतान किए बिना जितने भी शेयरों का अधिग्रहण हुआ उस पर पूंजीगत लाभ कर लगेगा। पर कर विभाग ने 5 जून को अंतिम नियम जारी करते हुए लेनदेन की ऐसी सूची सामने रखी है जिसे इन प्रावधानों से छूट मिली हुई है और प्रवर्तकों के बीच शेयरधारिता का आपसी हस्तांतरण इस सूची में शामिल नहीं है। एक सूत्र ने कहा, शुरुआत से सरकार शेयरधारिता के आपसी हस्तांतरण पर किसी तरह का राहत नहीं देना चाहती थी। हालांकि उद्योग की तरफ से ऐसे हस्तांतरण को छूट दिए जाने की मांग के बाद भी इस पर विचार नहीं किया गया। कई भारतीय प्रवर्तकों को संकेत मिला था कि सरकार शायद ऐसे लेनदेन को छूट वाली सूची में शामिल नहीं करेगी। ऐसे में नए नियम लागू होने से पहले उन्होंने पुनर्गठन की कवायद को अंजाम दे दिया।
 
मार्च में जिन कंपनियों ने हिस्सेदारी का आपसी हस्तांतरण किया, उनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज कॉरपोरेशन, अरबिंदो फार्मा, हीरो मोटोकॉर्प, आईआरबी इन्फ्रा और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस शामिल हैं। आने वाले दिनों में 15 फीसदी पूंजीगत लाभ कर शेयरों के लेनदेन पर लगाया जाएगा। भारतीय कंपनी जगत ने 1 अप्रैल से पहले लेनदेन को अंजाम देकर इस दर पर करीब 30,000 करोड़ रुपये का कर बचाया। कई कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी अप्रत्यक्ष तौर पर फैमिली ट्रस्टों या सीमित दायित्व वाली साझेदारी (एलएलपी) के जरिए होती है और शुरुआती चरण में प्रवर्तकों ने अपनी हिस्सेदारी का हस्तांतरण इन इकाइयों को बाजार से बाहर किया। ऐसे सौदे स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म से बाहर हुए, लिहाजा इस पर एसटीटी नहीं लगा। अगर भविष्य में ये प्रवर्तक पुनर्गठन करते हैं तो इस पर पूंजीगत लाभ कर लगेगा।
 
कर विभाग ने तीन परिदृश्य बताए हैं, जहां पूंजीगत लाभ कर लागू होगा - अगर शेयर का अधिग्रहण बिना एसटीटी भुगतान के हुआ हो। आपसी हस्तांतरण दूसरी श्रेणी में आती है : सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरोंं का अधिग्रहण स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म से बाहर हुआ हो। नियामक की तरफ से मंजूर विलय व अधिग्रहण और एम्पलॉयी स्टॉक ऑप्शंस इस श्रेणी में आते हैं और इन्हें पूंजीगत लाभ कर से छूट दी गई है। केपीएमजी के कर प्रमुख (राष्ट्रीय) गिरीश वनवारी के मुताबिक, स्पष्टीकरण देकर कर विभाग ने काफी बड़ा काम किया है, लेकिन कुछ निश्चित क्षेत्र हैं जिसे छोड़ दिया गया है।
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