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किसान चुप, बीज कंपनियां तैयार

दिलीप कुमार झा / मुंबई June 01, 2017

किसानों में अनाज की कम कीमतों की वजह से पैदा हुई चिंताओं के बीच इस बार खरीफ सीजन में बीज की मांग में नरमी देखी जा रही है, क्योंकि परेशान किसान बुआई के लिए बीज खरीदने से पहले पहली बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल असमान बारिश दर्ज की गई थी जिसकी वजह से पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात भी पैदा हो गए थे। 
 
बीज कंपनियों को बारिश की शुरुआत के साथ इस बार हालात में बदलाव की उम्मीद दिख रही है। सामान्य तौर पर कंपनियां मॉनसून की बारिश से पहले अपने वितरकों को बीज की आपूर्ति करती हैं। किसान भी सीजन शुरू होने से पहले ही बुआई के लिए बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेते हैं और कई बार तो काफी पहले ही बीज पैकेटों की बुकिंग हो जाती है। नाथ सीड्ïस के प्रबंध निदेशक एवं नैशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष सतीश कागलीवाल ने कहा, 'इस साल बीज की मांग बेहद कमजोर है। अब तक इसमें अच्छी तेजी आ जानी चाहिए थी। इसकी वजह निश्चित तौर पर अनाज की कीमतों में नरमी और किसानों को नोटबंदी की अवधि के दौरान हुआ नुकसान है।'
 
हाल के सप्ताहों में भारी गिरावट के बाद कृषिगत जिंसों की कीमतें मौजूदा समय में अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे आ गई हैं। उदाहरण के लिए, प्रमुख खरीफ फसलों में से एक मक्का कई थोक बाजारों में 1,300 रुपये प्रति क्विंटल पर उपलब्ध है जबकि इसका एमएसपी 1,365 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं सोयाबीन की कीमत 2,693 रुपये प्रति क्विंटल पर है जबकि इसका एमएसपी 2,775 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। 
 
बीज उद्योग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'कीमतों में गिरावट की वजह से किसान इस खरीफ सत्र में बुआई के लिए आगे बढऩे से हिचकिचा रहे हैं। चूंकि सरकार ने भी अपनी एमएसपी कीमतों को लेकर सुस्ती दिखाई है इसलिए किसान बुआई के लिए अंतिम फैसला लेने से पहले कीमतों पर विचार कर सकते हैं।' आमतौर पर ज्यादातर किसान मॉनसून की बारिश से पहले अपनी स्वयं की सिंचाई सुविधा के सहारे बीज (खासकर धान, प्याज और अन्य उपज) की बुआई करते हैं। हालांकि उन्हें फिर से मॉनसून विलंब से आने और इससे फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका सता रही है।
 
भारतीय मौसम विभाग ने इस बार सामान्य मॉनसून की उम्मीद जताई है। विभाग ने इस बार बारिश लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की 96 फीसदी रहने की भविष्यवाणी की है। मॉनसून केरल में अपने तय समय से दो दिन पहले दस्तक दे चुका है। महाराष्टï्र हाइब्रिड कंपनी के प्रबंध निदेशक राजू बारवाले ने कहा, 'खरीफ 2017 भारतीय कृषि के लिए अच्छा फसल सत्र रहेगा, क्योंकि मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है। बुआई भी समय पर होने की उम्मीद है, क्योंकि मॉनसून केरल पहुंच चुका है। इस सीजन में कपास और मक्का के लिए रकबा बढऩे की उम्मीद है। वहीं सोयाबीन और दलहन के रकबे में कुछ कमी देखी जा सकती है। यदि बारिश अनुकूल रहती है तो हम 2017 में फिर से एक अच्छा कृषि वर्ष देखने में कामयाब होंगे।' रासी सीड्ïस के चेयरमैन एवं भारतीय बीज उद्योग संघ के चेयरमैन एम रामासामी का कहना है कि कुछ खास जिंसों की कीमतें बीज की मांग को तय करेंगी। उन्होंने कहा, 'किसानों ने इस साल कपास और बाजरे से अच्छा मूल्य हासिल किया है। इसलिए इन फसलों के रकबे में इजाफा देखा जा सकता है।'
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
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