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साबरमती नदी के तट पर होटल, मॉल और कंपनियों के दफ्तर

विनय उमरजी /  05 30, 2017

अच्छे दिन आने वाले हैं

अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे जल्द ही अब होटल, मॉल और कंपनियों के कार्यालय दिखेंगे। करीब एक दशक से कुछ पहले तक साबरमती की पहचान एक सूखी और कराहती नदी के तौर पर होने लगी थी और औद्योगिक कचरे और नालों ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी थी। इतना ही नहीं, नदी के दोनों किनारों पर झुग्गियां बस गईं और इसका पानी जल जनित बीमारियों का पनाहगाह बन गया था।

अब इसके दिन अच्छे दिन आने वाले हैं। गुजरात सरकार ने साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना के तहत वॉल्यूमेट्रिक बिल्डिंग बाई-लॉज (निर्माण के नियमन संबंधी नियम) और भूखंडों की नीलामी की अनुमति दे दी है। इससे अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) को इनकी बिक्री से करीब 6,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। परियोजना में करीब 1.25 करोड़ वर्ग फुट निजी निर्माताओं और कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं। वे इन पर कार्यालय, व्यावसायिक परिसर, आतिथ्य परियोजनाएं या आवासीय इमारतों का निर्माण कर सकते हैं। भूखंड की नीलामी के लिए एमएसी महानगरों में रोडशो भी कर रहा है। 

निगम आयुक्त और साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआरएफडीसीएल) के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार ने कहा, 'ऐसे रोडशो का मकसद परियोजना से लोगों को रूबरू कराना है और ई-नीलामी के लिए बोलियां आमंत्रित करनी हैं। जो लोग प्रदूषण के कारण इस नदी से कट गए थे वे एक बार फिर इससे जुड़ सकते हैं।' एसआरएफडीसीएल परियोजना के लिए गठित विशेष कंपनी है। झुग्गियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास से जुड़े मद्दों के कारण परियोजना में थोड़ी देरी हो गई थी। 

कुमार ने कहा, 'साबरमती के किनारे जमीन दोबारा हासिल करने और सार्वजनिक स्थलों जैसे पार्क और बगीचे, जल क्रीड़ा की सुविधाएं आदि विकसित कर लोगों से भावनात्मक रूप से जुडऩे में कुछ वर्षों का समय लगा। गुजरात मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद साबरमती के किनारे निजी निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।'12,000 परिवारों के पुनर्वास पर करीब 1,200 करोड़ रुपये खर्च आए, जो परियोजना लागत 2,500 करोड़ रुपये का आधा है।

इस परियोजना का डिजाइन अहमदाद की एचसीपी डिजाइन और सीईपीटी यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है। परियोजना पेरिस की रिवरफ्रंट स्काईलाइन्स, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और लंदन से प्रेरित है। दूसरे बिल्डिंग बाई-लॉज के मुकाबले वॉल्युमेट्रिक (आयतन आधारित) विधि एसआरएफडीसीएल को भूखंडों की बिक्री क्षेत्रफल के बजाय आयातन आधार पर करने करने की अनुमति देती है। यह एसआरएफडीसीएल को विभिन्न भूखंडों के लिए विभिन्न तरह के फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) तय करने की इजाजत देती है। 

कुमार ने कहा, 'कुल 51 भूखंड हैं, जिनमें 26 पूर्वी और 25 पश्चिमी किनारे पर है। इनकी बिक्री की जाएगी। हम क्षेत्रफल के बजाय आयतन आधार पर जगह बेच रहे हैं। लिहाजा अगर हम किसी भूखंड पर 5 तले के लिए आयतन बेच रहे हैं तो निर्माता को 5 तले ही बनाने होंगे। शहर के दूसरे हिस्से के मुकाबले यहां हरेक भूखंड का अलग एफएसआई होगा।' यह परियोजना कुल 22 किलोमीटर की होगी और दोनों किनारों पर आधी-आधी फैली होगी। 22.5 लाख वर्ग मीटर भूखंड में केवल 14.5 प्रतिशत या करीब 326,730 वर्गमीटर निजी निर्माण के लिए बेचे जाने की योजना है।

कुमार ने कहा, 'इस पहल से बड़ी कंपनियां भी यहां अपनी मुख्यालय खोल सकती हैं। साथ ही आतिथ्य क्षेत्र की बड़ी परियोजनाएं भी यहां आ सकती हैं। एएमसी मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलूरु में निजी क्षेत्र तक पहुंचने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की मदद ले रहा है। ई-नीलामी 5 मई को शुरू हुई और एसआरएफडीसीएल के प्लेटफॉर्म पर 5 जून तक चलेगी। परियोजना आवंटित होने के बाद इसका छह साल के भीतर निर्माण होगा।' एएमसी ने दूसरे चरण की रिवरफ्रंट परियोजना की भी घोषणा की है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो रही है। कुमार ने कहा, 'मौजूदा परियोजना से प्राप्त रकम का इस्तेमाल दूसरे चरण के लिए किया जाएगा, जिस पर करीब 500 करोड़ रुपये लागत आएगी।'

Keyword: अहमदाबाद, साबरमती नदी, होटल, मॉल, औद्योगिक कचरा, पानी, बीमारी, ई-नीलामी,
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