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पीएफसी पर एनपीए का दबाव

श्रेया जय /  05 30, 2017

300 फीसदी बढ़ा एनपीए

बिजली क्षेत्र को धन मुहैया कराने वाली प्रमुख कंपनी पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) का फंसा कर्ज (एनपीए) 300 फीसदी बढ़कर 30,718 करोड़ रुपये पहुंच गया है जिससे कंपनी को पहली बार घाटा हुआ है। पीएफसी को वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही के दौरान 3,409 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। ऋण के लिए अतिरिक्त प्रावधान के कारण वित्त वर्ष 2016-17 में कंपनी का कुल मुनाफा 65 फीसदी गिरकर 2,126 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी का कुल फंसा कर्ज उसके कुल ऋण का 12 फीसदी था जो बिजली क्षेत्र में फंसे कर्ज के बढऩे का संकेत हैं। वित्त वर्ष 2016 में यह 3.15 फीसदी था। 

पीएफसी ने बीएसई को दी गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि फंसे कर्ज के लिए ऊंचे प्रावधान करने और पुनर्गठित परिसंपत्तियों के बढ़ने के कारण उसका मुनाफा प्रभावित हुआ है। 31 मार्च तक पीएफसी का निजी क्षेत्र की कंपनियों पर 19,445 करोड़ रुपये और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों पर 35,994 करोड़ रुपये का बकाया था। पीएफसी के फंसे कर्ज में सबसे बड़ा हिस्सा ताप बिजली परियोजनाओं का है। अधिकारियों का कहना है कि इनमें अधिकांश सरकारी बिजली उत्पादन कंपनियां हैं। 

इन कंपनियों के संयंत्रों से उत्पादन शुरू होने में देरी और इन परिसंपत्तियों से कोई आय प्राप्त नहीं होने के कारण पीएफसी ने उन्हें फंसे कर्ज की श्रेणी में डाला है। कंपनी के मुताबिक 18,234 करोड़ रुपये की 6 परिसंपत्तियों को फंसे कर्ज की श्रेणी में शामिल किया गया है। बीएसई को दी जानकारी में पीएफसी ने कहा कि फंसे कर्ज के कारण मार्च 2017 में खत्म हुई तिमाही के दौरान कंपनी का कर पूर्व मुनाफे में 3,954 करोड़ रुपये की कमी आई है। अलबत्ता कंपनी ने अपने निवेशकों को बताया कि वर्ष 2018 में 80 फीसदी फंसे कर्ज के अपग्रेड होने की संभावना है। बिजली वितरण कंपनियां भी पुनर्गठन के दौर से गुजर रही हैं और उनके ऋण भुगतान की सुस्त चाल से भी पीएफसी का मुनाफा प्रभावित हुआ। 
Keyword: बिजली क्षेत्र, पीएफसी, एनपीए, ऋण, फंसा हुआ कर्ज, मुनाफा, ताप बिजली, परियोजना, संयंत्र,
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