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सरकार को जीएसटी से कम फोन बिल की उम्मीद

किरण राठी /  May 28, 2017

सरकार का मानना है कि देश में जीएसटी लागू होने से फोन बिल में कमी आएगी लेकिन दूरसंचार कंपनियों की राय इससे अलग है। दूरसंचार कंपनियों ने लोगों के फोन बिल में जीएसटी के कारण इजाफे की आशंका जताई है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दूरसंचार कंपनियों से कहा है कि वे जीएसटी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं लेकिन दूरसंचार कंपनियों ने फोन बिल में 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी के बारे में चेताया है। दूरसंचार कंपनियों के संगठन सीओएआई ने कहा है कि यह कहना कि जीएसटी दर में 3 फीसदी के इजाफे की भरपाई व्यापक कर लागत (राज्य वैट, प्रवेश कर एवं खरीद पर एसएडी यानी विशेष अतिरिक्त शुल्क) में कमी से काफी हद तक हो जाएगी, गलत है।
सीओएआई के डीजी राजन एस मैथ्यूज ने कहा, 'दूरसंचार सेवाओं के लिए प्रस्तावित 18 फीसदी की जीएसटी दर से उपभोक्ताओं के लिए दूरसंचार सेवाओं की लागत बढ़ेगी क्योंकि फिलहाल दूरसंचार सेवाएं 15 फीसदी सेवा कर (उपकर सहित) के दायरे में आती हैं।' आगामी 1 जुलाई से प्रभावी होने वाली जीएसटी प्रणाली के तहत दूरसंचार कंपनियों को 18 फीसदी शुल्क देना पड़ेगा लेकिन वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकती हैं जिससे वास्तविक शुल्क में कमी आ सकती है।
सरकार के आकलन के अनुसार, दूरसंचार उद्योग को 2 फीसदी आईटीसी का अतिरिक्त लाभ मिलेगा जो उद्योग के कुल कारोबार के करीब 2 फीसदी के बराबर हो सकता है। साथ ही स्पेक्ट्रम शुल्क (2016 में) पर देय सेवा शुल्क के आईटीसी के संदर्भ में कुल उधारी अब केवल एक वर्ष के लिए उपलब्ध हो सकती है यानी मौजूदा अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के तहत 3 साल की अवधि के बजाय अब यह 2017-18 के लिए उपलब्ध होगी।
हालांकि सीओएआई ने कहा है कि यह कहना सही नहीं होगा कि उधारी का लाभ तीन साल की अवधि के बजाय उसी साल लिए जाने से दूरसंचार कंपनियों की लागत में कमी आएगी क्योंकि ब्याज लाभ की रकम काफी छोटी होगी जो वास्तव में आईटीसी की वर्तमान मात्रा से  आएगी।
मैथ्यूज ने कहा, 'कुल मिलाकर दूरसंचार कंपनियां 1 अप्रैल 2016 के बाद आवंटित एवं नीलाम किए गए स्पेक्ट्रम के लिए कर का भुगतान केवल किस्तों में करती हैं न कि स्पेक्ट्रम की पूरी रकम के लिए।' उन्होंने कहा, 'एक तिहाई किस्त अभी बाकी है जो वित्त वर्ष 2018-19 में लिया जा सकता है। ऐसे में उधारी की उस रकम को स्थानांतरित करने के लिए कोई स्पष्टï ढांचा तैयार नहीं किया गया है।'
सीओएआई ने कहा कि इसलिए उद्योग का मानना है कि 18 फीसदी जीएसटी दर के मुकाबले इनपुट टैक्स क्रेडिट में बढ़ोतरी के कारण कोई फायदा नहीं होगा। दर में की गई यह वृद्धि अंतिम उपभोक्ता के लिए भी फायदेमंद नहीं होगी।
वित्त मंत्रालय के बयान पर टिप्पणी करते हुए नांगिया ऐंड कंपनी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर राकेश नांगिया ने कहा, 'वे दिन अब लद चुके हैं जब मूल्य निर्धारण की निगरानी नहीं की जाती थी। अब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि दूरसंचार सेवाओं के मूल्य में कोई भी वृद्धि उचित कारण के बिना न हो। इसे कर दर में वृद्धि के साथ-साथ कर उधारी के लाभ में बढ़ोतरी के मद्देनजर निर्धारित किया गया है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार है कि जीएसटी के कारण लघु अवधि में भी मुद्रास्फीति में बेवजह तेजी नहीं आएगी।'
नांगिया ने कहा कि सरकार ने स्पष्टï तौर पर संकेत दिया है कि पूंजीगत वस्तु एवं सेवाओं की खरीद पर अतिरिक्त आईटीसी और स्पेक्ट्रम शुल्क के लिए उधारी की आसान उपलब्धता से मूल्य में तत्काल कमी आएगी। उन्होंने कहा, 'सरकार क्षेत्र पर पडऩे वाले प्रभाव पर गंभीरतापूर्वक काम कर रही है जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। मेरा भी मानना है कि उद्योग को नई कर व्यवस्था के तौर-तरीकों को स्वीकार करना चाहिए और कर लागत में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए।'

Keyword: Telecom, mobile, GST,
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