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'जीएसटी दरों की नहीं होगी समीक्षा'

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली May 28, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद द्वारा तय की गई विभिन्न कर दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होगा। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की चेयरपर्सन वनजा सरना ने उद्योग जगत की ओर से दरोंं में बदलाव की मांग पर कहा कि कुछ अपवादों को छोड़कर कर दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने को तैयार है और उद्योग जगत को भी इसी के मुताबिक तैयारी करनी चाहिए। दरों की समीक्षा को लेकर इस समय सरकार के पास उद्योगों के प्रतिनिधिमंडल की भीड़ जुट रही है, जिनमें एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल्स, रेलवे और सौर ऊर्जा शामिल हैं।
पिछली बैठक में जीएसटी परिषद ने 1,211 वस्तुओं और 500 सेवाओं पर लगने वाले कर की दरें तय की थी। इनमें से करीब 60 प्रतिशत वस्तु व सेवाएं 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर ढांचे में हैं।
सरना ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'उद्योग जगत को समझना चाहिए कि परिषद की बैठक में जिसे अंतिम रूप दिया जा चुका है, उनमें से 6 या 7 शेष वस्तुओं को छोड़कर उसकी समीक्षा नहीं होगी। दरों की समीक्षा की मांग कभी खत्म नहीं होगी। अब जीएसटी लागू होने दें, उसके बाद इन मामलों पर विचार किया जा सकता है।'
बहरहाल उन्होंने कहा कि कुछ कर दरों में बाद में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'बजट में होने वाले बदलाव की तर्ज पर इस पर भी बाद में विचार किया जा सकता है।' सरना ने कहा कि परिषद को उपभोक्ता, कारोबारी, उद्योग और राजस्व हितों में तालमेल बिठाना है। उन्होंने 3 जून को परिषद की होने वाली आगामी बैठक में कुछ वस्तुओं व सेवाओं की दरों में बदलाव पर चर्चा की संभावना को खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा, 'हम परिषद के सदस्य को कोई मसला उठाने से नहीं रोक सकते। अगर मांग में दम है तो उस पर विचार हो सकता है।'
ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं ने हाइब्रिड कारों पर कम दर की वकालत की है, जिस पर इस समय 30.3 प्रतिशत कर लगता है, जबकि परिषद की सिफारिश के बाद यह 43 प्रतिशत (जीएसटी 28 प्रतिशत और 15 प्रतिशत सेस) हो जाएगा। सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वह हाइब्रिड कारों पर जीएसटी दरों को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली से बात करेंगे।
एफएमसीजी उद्योग का कहना है कि जैम और अचार को 12 प्रतिशत कर ढांचे में रखा जाना चाहिए, जिस पर परिषद ने 18 प्रतिशत कर लगाया है। उद्योग का तर्क है कि इससे छोटे व मझोले उद्योग प्रभावित होंगे।
अब जीएसटी लागू किए जाने मेंं सिर्फ 4 सप्ताह बचे हैं, और सरना पुनर्गठित केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के 150 से ज्यादा अधिकारियों के स्थानांतरण व नियुक्ति में लगी हुई हैं।
उद्योग जगत द्वारा 1 सितंबर से जीएसटी लागू किए जाने की मांग पर सीबीईसी प्रमुख ने कहा कि उद्योग जगत का एक छोटा हिस्सा 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने को लेकर तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि हर किसी को समझना चाहिए कि सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू करना चाहती है और सीबीईसी उसके लिए पूरी तरह से तैयार है।

Keyword: GST, Rates, review,
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