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जिंस एक्सचेंज बना रहे कृषि व धातु सूचकांक

राजेश भयानी / मुंबई May 26, 2017

देश में दो अग्रणी जिंस एक्सचेंजों- एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स ने डेरिवेटिव्ज में कारोबार शुरू करने के लिए सूचकांक बनाना शुरू कर दिया है। यह कदम बाजार नियामक सेबी द्वारा जिंस डेरिवेटिव्ज में ऑप्शन को मंजूरी दिए जाने के फैसले के बाद उठाया गया है। एक्सचेंजों को उम्मीद है कि इसके बाद सेबी जिंस सूचकांकों पर आधारित डेरिवेटिव्ज और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जैसे सूचकांक आधारित उत्पादों को मंजूरी देगा। 
 
एनसीडीईएक्स के एमडी और सीईओ समीर शाह ने कहा, 'हम अपने सूचकांक बना रहे हैं। हमने हाल में एक फार्म सूचकांक बनाया है और कुछ अन्य पर काम कर रहे हैं।' नसीडीईएक्स की ज्यादातर बाजार हिस्सेदारी कृषि जिंसों में है। वहीं धातु एवं ऊर्जा में दबदबा रखने वाला मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) वैश्विक विशेषज्ञ कंपनी के साथ मिलकर सूचकांक विकसित कर रहा है। एमसीएक्स के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने थॉमसन रॉयटर्स के साथ मिलकर सूचकांक उत्पादों बनाने के लिए करार किया है। हमारा मानना है कि ऑप्शन के बाद सूचकांक कारोबार को मंजूरी दी जाएगी।'
 
एमसीएक्स की कृषि खंड में मौजूदगी है, लेकिन उसके कारोबार मेंं ज्यादातर हिस्सा गैर-कृषि खंड का है। कीमती धातुओं, मूल धातुओं, कच्चा तेल एवं गैस की कीमतों का निपटान अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर किया जाता है और इसलिए कारोबारी सूचकांक वायदा बाजार के निपटान के मुताबिक होने चाहिए। माना जा रहा है कि एनसीडीईएक्स भी करार करने के बारे में विचार कर रहा है, लेकिन अभी कुछ तय नहीं किया गया है। उन्होंने फार्म सूचकांक हाउस क्वांट टीम की मदद से तैयार किया है। यह सूचकांक प्रमुख जिंसों का प्रतिनिधित्व करता है, भले ही उनका कारोबार वायदा पर होता है या नहीं। 
 
इसका मकसद एक ऐसा सूचकांक उत्पाद तैयार करना है, जिससे फसली रकबे और संबंधित जिंसों की कीमतों के आधार पर खाद्य कीमतों की हेजिंग की जा सके। इन जिंसों का उनकी फसल, खपत आदि के आधार पर सूचकांक में भारांश होगा। एनसीडीईक्स का पहले ही धान्य सूचकांक है, जिसमें उसके प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध और कारोबार वाली जिंसें शामिल हैं। लेकिन ये भारत के कृषि फसलों का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। उन्होंने कहा, 'हम उस सूचकांक को बरकरार रखेंगे क्योंकि यह उन निवेशकों की जरूरत पूरी करता है, जो वायदा अनुबंधों के बास्केट में निवेश करना चाहते हैं।'
 
वैश्विक स्तर पर जिंसों में सूचकांक डेरिवेटिव्ज से बहुत ज्यादा कारोबार नहीं निकलता है, लेकिन वित्तीय निवेशक सूचकांकों में शामिल विभिन्न जिंसों के भारांश के लिए जिंस सूचकांकों पर नजर रखते हैं। यह मॉर्गन स्टैनली के एमएससीआई सूचकांक के समान है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक संबंधित बाजारों में निवेश के लिए शेयरों के भारांश का फैसला लेने के लिए करते हैं। 
 
एसऐंडपी डाऊ जोन्स इंडीसेज की प्रबंध निदेशक (उत्पाद प्रबंधन) जोडी गुंजबर्ग ने कहा, 'भारत में कोई जिंस सूचकांक नहीं है। समावेश के लिए वायदा बाजारों की उपलब्धता की जरूरत है।' सूचकांकों की चाल के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जिंसों के प्रदर्शन के बारे में उन्होंने कहा, 'एसऐंडपी जीएससीआई और डाऊ जोन्स कमोडिटी इंडेक्स में 24 में से आधे 2017 में बढ़त में हैं।'
 
जिंसों के जोखिम प्रबंधन के एक विशेषज्ञ ने कहा, 'निफ्टी सूचकांकों के कारोबार की तरह अगर जिंस सूचकांक आधारित कारोबार वैश्विक रुझान के विपरीत भारत में बेहतर रहे तो यह आश्चर्यजनक नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि भारत में बहुत सी धातुएं एवं तेल रिफाइनरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने दांव के आधार पर अपने जिंस कीमत जोखिम की हेजिंग करती हैं। इनमें से ज्यादातर ओटीसी डेरिवेटिव्ज है, जो वैश्विक स्तर पर एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले ङ्क्षजस डेरिवेटिव्ज से काफी बड़ा है। 
हालांकि एमसीएक्स के प्रवक्ता ने साफ किया, 'सूचकांक उत्पाद शुरू करना नियामक के सूचकांक उत्पाद को मंजूरी देने पर निर्भर करेगा। हमारा मानना है कि ऑप्शन के बाद इसे मंजूरी दी जाएगी।'
Keyword: jins exchange, MCX, NCDEX,,
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