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भारतीय सिनेमा जगत के लिए चीन में अवसर

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  May 26, 2017

नितेश तिवारी की फिल्म दंगल ने पिछले सप्ताह चीन के बॉक्स ऑफिस में 723 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। शुआई च्याओ बाबा या 'आओ कुश्ती लड़ें पापा' के नाम से बनी यह फिल्म चीन में विदेशी भाषा की सबसे हिट फिल्मों में शुमार है। यह एक पिता के संघर्ष की कहानी है जो अपनी बेटियों को अंतरराष्ट्रीय कुश्ती स्पर्धा में पदक जीतने में मदद करता है। चीन में इस फिल्म के 1.17 करोड़ टिकट बिक चुके हैं। चीन की मीडिया रिसर्च कंपनी एंटग्रुप के मुताबिक टिकटों की यह तादाद गार्जियंस ऑफ द गैलेक्सी वॉल्यूम 2 से चार गुना अधिक है। डिज्नी की ये दोनों फिल्में चीन में 5 मई को रिलीज हुईं। 

 
बाहुबली: 2 द कन्क्लूजन जुलाई में चीन में रिलीज होने वाली है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या दंगल फिल्म ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फिल्म बाजार भारत के लिए खोल दिया है? हालांकि इसमें कुछ किंतु-परंतु भी हैं। यिंग झू न्यूयॉर्क में रहने वाली फिल्म और मीडिया विशेषज्ञ हैं। वह कहती हैं,  'चीन में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन में मौजूदा सुधार और बीते कुछ सालों के दौरान भारत और चीन के बीच फिल्म निर्माण समझौतों का सीधा संबंध चीन की वन बेल्ट वन रोड पहल से है।' ट्रिनिटी पिक्चर्स के मुख्य कार्याधिकारी अजित ठाकुर कहते हैं कि चीन के बाजार में पहुंच बनाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें वहां जाकर नेटवर्क और संपर्क तैयार करना होगा। आमिर खान ने यह काम कर दिया है।' ट्रिनिटी भारत के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो इरोस की शाखा है और वह दो भारतीय-चीनी फिल्मों का निर्माण कर रही है। आमिर खान और नितेश तिवारी पेइचिंग, शांघाई और चेंगदू के नौ दिवसीय दौरे पर गए। खान ने स्थानीय मीडिया, प्रशंसकों और दर्शकों से जमकर बातचीत की और सोशल मीडिया पर खूब माहौल बनाया। 
 
चीन एक ऐसा बाजार है जिस पर दांव खेला जा सकता है। वर्ष 2016 में 44,200 करोड़ रुपये के बॉक्स ऑफिस संग्रह के साथ हालांकि वह अभी भी अमेरिका और कनाडा (76,380 करोड़ रुपये) से पीछे है लेकिन भारत 14,200 करोड़ रुपये के साथ खासा पीछे है। हालांकि हमारी फिल्में रचनात्मक हैं और इनको दुनिया भर में आलोचकों की सराहना मिलती है। लेकिन स्क्रीन की कमी के कारण देश में उनको उचित मुनाफा नहीं मिल पाता। ऐसे में नए बाजार उसके लिए अवसर की तरह हैं। 
 
सन 1990 के दशक में जब भारतीय फिल्मों का विदेशों में प्रदर्शन शुरू हुआ, तब से अमेरिका, ब्रिटेन, मध्य एशिया आदि उसके स्वाभाविक बाजार बने हुए हैं क्योंकि वहां भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी तादाद में रहते हैं। हमेशा यह चर्चा सुनने को मिलती रही कि भारतीय सिनेमा को विश्व स्तर पर ले जाया जाएगा लेकिन ऐसा कभी हो नहीं सका। शाहरुख खान जैसे अभिनेताओं की फिल्में विदेशों में होने वाली कमाई का करीब आधा हिस्सा बटोर लाती हैं। अब वे फिल्में जर्मनी, पोलैंड तथा अन्य यूरोपीय बाजारों में पहुंच बनाने लगी हैं। परंतु दक्षिण पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया में भारतीय फिल्में नजर नहीं आतीं। रजनीकांत की फिल्में जरूर इन देशों में दिख जाती हैं। 
 
दंगल दो वजहों से उम्मीद जगाती है। फिल्म जगत के एक वरिष्ठï व्यक्ति कहते हैं, 'यह एक ऐसे बाजार में हिट हुई है जहां प्रवासी न के बराबर है। वहां स्थानीय आबादी ने फिल्म देखी। हम जिस बदलाव की बात करते हैं यह वही है।' दंगल ने चीन में 723 करोड़ रुपये की कमाई की जो भारत में उसकी 571 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है। दूसरी बात, समय बहुत महत्त्वपूर्ण है। विदेशी फिल्मों की सीमा तय होने के चलते स्थानीय फिल्मों को बॉक्स ऑफिस में 60 फीसदी हिस्सेदारी मिलती है। बहरहाल वर्ष 2016 के मध्य से वहां मंदी का माहौल है क्योंकि स्थानीय दर्शक अब चीन और हॉलीवुड के सिनेमा से परे देख रहे हैं। ठीक इसी समय दंगल ने चीन के बाजार में प्रवेश किया, वह भी तीन सुखद संयोगों के साथ। इसके पहले वहां 3ईडियट्स फिल्म सुपरहिट रही थी। शैक्षणिक तंत्र के दबाव की बात ने चीन के लोगों को अपील किया क्योंकि वहां भी माहौल ऐसा ही है। इसी तरह वर्ष 2014 में आई फिल्म पीके वहां हिट रही थी क्योंकि वहां नास्तिकता का जोर है। इन दोनों फिल्मों में भी आमिर खान ने शीर्ष भूमिका निभाई थी। डिज्नी ने इस बात को ध्यान में रखते हुए दंगल को चीन में 8,000 से अधिक स्क्रीन पर रिलीज किया। 
 
लेकिन इसमें जोखिम भी हैं। अधिकांश भारतीय फिल्में तयशुदा शुल्क पर रिलीज की जाती हैं। ऐसे में अगर फिल्म सफल रही तो कोई फायदा नहीं होता है। इसके अलावा वेरायटी के एशिया संपादक पैट्रिक फ्रेटर कहते हैं कि हवा का रुख कभी भी बदल सकता है। वर्ष 2016 के मध्य में जब कोरिया के साथ चीन के रिश्ते बिगड़े तो सह निर्माण रद्द कर दिए गए और चीन में कोरियाई फिल्मों की रिलीज रोक दी गई। इन तमाम जोखिमों के बावजूद यह एकदम उचित समय है कि भारत चीन के फिल्म बाजार में दखल बढ़ाए। बाजार में काफी अवसर हैं और दंगल के बाद दर्शक तथा कारोबारियों का भी भारतीय फिल्मों के प्रति सकारात्मक रुझान है। ऐसे में बाहुबली 2 को पुरजोर अंदाज में चीन में दस्तक देनी चाहिए। 
Keyword: film, movie, bahubali-2,
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