बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी: वादे और हकीकत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 25, 2017 12:05 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

जीएसटी: वादे और हकीकत

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  May 26, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अब तक का सबसे महत्त्वपूर्ण कर सुधार होने का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। इसे लागू कराने की कवायद में जुटे हर व्यक्ति को श्रेय मिलना चाहिए। परंतु अभी इसका सहज तरीके से क्रियान्वयन बाकी है। यह विचार भी जरूरी है कि अगर इसकी राह में किए गए तमाम समझौते नहीं किए जाते तो क्या हो सकता था। विजय केलकर की अध्यक्षता वाले 13वें वित्त आयोग ने कहा था कि जीएसटी में 12 फीसदी की एकल दर हो सकती है  ताकि यह राजस्व निरपेक्ष रह सके। दलील यह थी कि एकल दर से वर्गीकरण से जुड़े विवाद समाप्त होंगे, कर प्रशासन को सहज बनाया जा सकेगा और करदाताओं की जिंदगी आसान होगी। अपनी मूल अवधारणा में जीएसटी में केंद्रीय और राज्य स्तर के उत्पाद शुल्क और बिक्री कर तथा तमाम स्थानीय कर शामिल किए जाने थे। ऐसा करने से कारोबार के समक्ष उपस्थित अंतरराज्यीय अड़चनें दूर करने में मदद मिलनी थी। इससे राज्यों की सीमाओं पर ट्रकों का जमावड़ा नहीं लगता और पूरी व्यवस्था की अन्य खामियों को दूर करने में मदद मिलती। जीएसटी के आगमन से करवंचना कठिन होगी, कर संग्रहण की कमियां दूर होंगी। इससे कम कर दर पर अधिक राजस्व आएगा और काले धन का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। इन अनुमानों के आधार पर दो वादे किए गए थे: व्यवस्था से किफायत के रूप में प्राप्त होने वाले उल्लिखित लाभ सकल घरेलू उत्पाद में दो से 2.5 फीसदी तक का इजाफा करेंगे और निर्यात में 10 से 14 फीसदी की तेजी आएगी। दूसरा दावा यह था कि जीएसटी के आगमन से कर पर कर की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और लागत में कमी आएगी और समूची अर्थव्यवस्था में कीमत कम होगी।

 
अब जरा हकीकत की बात करते हैं। एक देश, एक कर के वादे के बीच चार कर दरें सामने हैं। इसके अलावा शून्य दर और उच्चतम दर के ऊपर विभिन्न उपकर भी इसमें शामिल हैं। वहीं पेट्रोलियम और शराब जैसी वस्तुओं पर अलग से कर लगाया जाएगा। शुरुआत में 12 फीसदी की एकल कर दर की बात की गई थी। उसके अलावा अब 18 फीसदी तथा अन्य दरें भी शामिल हैं। कुल 1,211 वस्तुओं को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें से 62 फीसदी पर 18 और 28 फीसदी की उच्च दर से कर लगेगा। इसके अलावा उपकर की भी व्यवस्था है। जबकि सूची की 17 फीसदी वस्तुओं के लिए मूल 12 फीसदी की दर तय की गई है। कुल वस्तुओं के पांचवें हिस्से पर ही 5 फीसदी की न्यूनतम दर से कर लगाया जाएगा या उन्हें रियायत दी जाएगी। इसमें प्राथमिक कृषि वस्तुएं शामिल हैं। सेवाओं के लिए भी विविध कर दर तय की गई हैं। यहां भी 18 फीसदी को मानक दर बनाया गया है। यह मौजूदा दर से कमी के बजाय उसमें बढ़ोतरी है। कुछ स्टैंप शुल्क अभी जारी रह सकते हैं। कुलमिलाकर यह न तो एक कर है और न ही एक दर।
 
मामले पर करीबी नजर रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा है कि नए प्रस्ताव के मुताबिक दूध और उससे बने उत्पादों पर शून्य कर दर होगी या अलग-अलग दर पर कर लगेगा। यह इस बात पर निर्भर होगा कि वह सादा दूध है, छाछ है, दही है, खुशबूदार दूध है, दूध पाउडर है, बिना ब्रांड का चीज है, पैकेटबंद चीज है, मक्खन है या कुछ और। यात्रा पर कर लगेगा लेकिन धार्मिक यात्राओं पर नहीं। अब यह कौन निर्धारित करेगा कि किसी धार्मिक शहर की यात्रा पर जाने वाला व्यक्ति धार्मिक उद्देश्य से जा रहा है या कारोबारी? इस बीच अधिक कर संग्रह का दावा इस बात पर निर्भर था कि दरें कम होने से राजस्व निरपेक्षता आएगी। लेकिन यह मुश्किल है क्योंकि एक के बजाय कई दरें हैं। यानी कर संग्रह में सुधार की कोई आशा नहीं है। अगर दरें व्यापक तौर पर यही रहीं और वांछित लाभ हासिल हुए तो अप्रत्यक्ष कर राजस्व में इजाफा होगा। इसका तात्पर्य होगा औसत कीमत में इजाफा। एक से अधिक दरों की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. केलकर ने कहा है कि जीडीपी को जिस लाभ की आशा जताई गई थी वह नहीं हासिल होगा। इस निराशा को समझा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर नीति निर्माण की वास्तविक दुनिया में अक्सर दूसरे विकल्प के कामयाब होने की संभावना अधिक रहती है। शायद अर्थशास्त्रियों के लिए इसमें यह सबक है कि वे जिन उपायों को एकदम साफ-सुथरा मानते हैं वे राजनीतिक अर्थव्यवस्था में उलटपुलट हो सकते हैं। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अस्पतालों के शुल्क पर लगना चाहिए अंकुश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.