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इस बाजार के बारे में प्रतिबद्घता जताना कठिन

अजय मोदी /  May 25, 2017

जापानी कार निर्माता होंडा की भारतीय इकाई ने नई सिटी और डब्ल्यूआर-वी क्रॉसओवर के साथ गिरावट एवं दबाव के अपने दौर को बदल दिया है। चौथी सबसे बड़ी घरेलू कार निर्माता के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्याधिकारी योशिरो यूनो ने अजय मोदी के साथ साक्षात्कार में बताया कि उनके जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए यहां कराधान ढांचे की वजह से कोई बड़ी प्रतिबद्घता करना कठिन है, क्योंकि यह कराधान व्यवस्था छोटे वाहनों के लिए अनुकूल है। पेश हैं मुख्य अंश: 

 
होंडा भारत के कार बाजार में चौथे पायदान पर काबिज है। उसे अपनी यह हैसियत बरकरार रखना कितना महत्त्वपूर्ण है?
 
हमारा स्थान चौथा है, लेकिन बाजार भागीदारी सिर्फ 5-6 फीसदी है, जो नहीं के बराबर है। यहां सिर्फ दो कंपनियां मारुति सुजूकी और हुंडई मजबूत स्थिति में हैं। यदि आप 10 फीसदी की बाजार भागीदारी को पार नहीं कर सकते तो आप एक छोटी कंपनी हैं। भारत में 10 फीसदी से अधिक भागीदारी वाली सिर्फ दो कंपनियां हैं जो भागीदारी के लिहाज से कुछ हद तक कमजोर स्थिति है।
 
होंडा के लिए क्या संभावनाएं हैं? क्या यह बड़ी बाजार भागीदारी हासिल कर सकती है?
 
बिक्री के लिहाज से हम अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन जहां तक बाजार भागीदारी का सवाल है तो हमें इस संदर्भ में संघर्ष करना पड़ रहा है। हमारी वृद्घि कार निर्माण के संबंध में सरकारी नीति पर निर्भर करेगी। यहां कर संरचना भी अलग है और इससे प्रमुख वैश्विक कंपनियों के लिए समस्या पैदा हो गई है। यहां सब-फोर मीटर रेग्युलेशन (लंबाई में चार मीटर से कम की कारों पर सिर्फ 12.5 फीसदी का उत्पाद शुल्क लगता है, जबकि 1500 सीसी से कम इंजन क्षमता वाली समान कारों पर यह शुल्क 24 फीसदी) लागू है, लेकिन चार मीटर से कम की कारों का बाजार अन्य देशों में सीमित है। इसलिए, कई वैश्विक निर्माता इस सेगमेंट में ज्यादा कारें तैयार नहीं करते हैं। वहीं भारत में इस सेगमेंट को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि इसमें बदलाव नहीं आता है तो बड़ी वैश्विक कंपनियों को यहां लगातार संघर्ष करना पड़ेगा। 
 
वर्ष 2010 तक भारत दुनिया में तीसरे सबसे बड़े कार बाजार के तौर पर उभरने के लिए तैयार है। यहां होंडा के लिए सकारात्मक बदलाव क्या होंगे?
 
बिक्री के आधार पर, देश की विकास क्षमता पर किसी को संदेह नहीं है। लेकिन प्रतिबद्घता के आधार पर, विनियमन और सब-फोर मीटर कराधान जैसी सीमाओं की वजह से चुनौती बनी हुई है। बाजार एक खास सेगमेंट पर केंद्रित है और यह पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। इस बाजार के बारे में पूरी तरह प्रतिबद्घता जताना काफी कठिन है। इसे लेकर स्थिति स्पष्टï नहीं है कि क्या ऐसे प्रावधान बरकरार रहेंगे। ऐसा नहीं है कि ग्राहक छोटी कारों को लेकर बहुत खुश हैं। लोग स्पेस और आरामदायक सुविधा की वजह से बड़ी कारों को पसंद करते हैं। मौजूदा कराधान ढांचे ने इस बाजार को छोटे मॉडलों की तरफ केंद्रित बना दिया है। मैं इसे लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि इसका फायदा किसे मिल रहा है। 
 
अगले दो-तीन साल में होंडा की प्रमुख योजनाएं क्या हैं?
 
हम भारतीय बाजार के लिए कोई खास मॉडल पेश करने की योजना नहीं बना रहे हैं। हमारी बिक्री इस लिहाज से ज्यादा उचित नहीं है। हम ऐसी कारें पेश कर सकते हैं जिन्हें अन्य बाजारों के साथ साझा किया जा सके। हमारे सभी छोटे कॉम्पैक्ट मॉडल पहले से ही यहां मौजूद हैं। अब हम कुछ उन्नत मॉडल पेश कर सकते हैं। हम सिविक के लिए अच्छी दिलचस्पी देख रहे हैं। 
 
कंपनी को पिछले साल बिक्री में लगातार गिरावट का सामना करना पड़ा। क्या नई सिटी और डब्ल्यूआर-वी के साथ अब यह दबाव समाप्त हो चुका है?
 
पिछले साल हमारे डीलरों को धीमी बिक्री वाले मॉडलों की ज्यादा इन्वेंट्री से जूझना पड़ा था। इसके अलावा हमें नोटबंदी के दबाव से भी जूझना पड़ा। हालात में सुधार आया है। इस सुधार की रफ्तार को नई सिटी और डब्ल्यूआर-वी से मदद मिली है। लेकिन कुछ महीनों के बाद इनका असर घट सकता है। हम हालात पर नजर रख रहे हैं और वृद्घि की रफ्तार बरकरार रखने के लिए प्रयासरत है।
 
वीडियोकॉन: कर्ज चुकाने के लिए परिसंपत्तियों की बिक्री
 
वीडियोकॉन का शेयर इस सप्ताह के शुरू में 36 प्रतिशत की गिरावट के बाद गुरुवार को भी लगभग 10 फीसदी गिरकर 52.55 रुपये पर बंद हुआ। शेयर की कीमत में कर्ज अदायगी से जुड़ी चिंताओं की वजह से गिरावट आई है। हाल में देना बैंक ने इस कंपनी को दिए ऋण को एनपीए यानी फंसा कर्ज घोषित किया है और इस तरह की खबरें आ रही हैं कि अन्य बैंक भी इस तरह का निर्णय ले सकते हैं। कंपनी अपने कर्ज को घटाने के लिए प्रयास कर रही है। भारतीय बैंकों का उस पर 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा विदेशी बैंकों का भी उस पर 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। समूह ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पिछले तीन महीने में कई संपत्तियां बेची हैं। यहां इसकी ऐसी परिसंपत्तियों का विवरण दिया जा रहा है जो भारी दबाव से जूझ रही हैं या उन्हें बेचा जा चुका है।
 
केनस्टार कंज्यूमर व्यवसाय 
 
कंपनी अपने केनस्टार कंज्यूमर गुड्ïस व्यवसाय और ब्रांड को बिक्री के लिए रखा है और जानकारों के अनुसार 20 कंपनियां इस व्यवसाय के लिए दौड़ में आगे आई हैं। सूत्रों का कहना है कि इस व्यवसाय की बिक्री से कंपनी को 2,000 करोड़ रुपये की रकम मिल सकती है। 
 
बीमा संयुक्त उपक्रम  
 
समूह की अमेरिका के लिबर्टी म्युचुअल के साथ सामान्य बीमा उद्यम में बड़ी हिस्सेदारी है। वह 5,000 करोड़ रु. के मूल्यांकन पर अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहता है।
 
डीटीएच व्यवसाय
 
डायरेक्ट-टु-होम टीवी व्यवसाय को डिश टीवी के साथ जोड़ा गया है जिसके साथ ही यह भारत की नंबर वन सैटेलाइट टीवी कंपनी बन जाएगी। वीडियोकॉन के प्रवर्तकों को विलय के बाद गठित कंपनी में शेयर प्राप्त होंगे। मंगलवार को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने दोनों कंपनियों के विलय को मंजूरी प्रदान कर दी। 2014 में, सैटेलाइट टीवी व्यवसाय नैसडैक पर सूचीबद्घ है और समूह ने 30 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई है। 
 
भूमि बैंक
 
समूह ने बिजली और कोयला व्यवसायों में निवेश किया है जो मध्य प्रदेश में 1500 एकड़ में और छत्तीसगढ़ में 700 एकड़ में फैले हुए हैं। समूह इस भूमि बैंक के कुछ हिस्से की बिक्री करेगा। मुंबई के फोर्ट में स्थित इसका मुख्यालय 300 करोड़ रुपये में पहले ही बेचा जा चुका है।
 
वैश्विक तेल ब्लॉक
 
समूह के इंडोनेशिया और ब्राजील में तेल एवं गैस क्षेत्र हैं और कंपनी इनके लिए 12 अरब डॉलर के मूल्यांकन का दावा करती है। इसमें इंडोनेशियाई ब्लॉक में अगले साल के अंत में या 2019 के शुरू में उत्पादन आरंभ हो जाने का अनुमान है, जबकि ब्राजीलियाई तेल क्षेत्र में 2020 में उत्पादन शुरू हो जाने का अनुमान है। समूह ने इस क्षेत्र में तेल की भागीदारी से प्राप्त लाभ का इस्तेमाल कर्ज घटाने के लिए करने की योजना बनाई है। 
 
मोजांबीक फील्ड
 
वर्ष 2013 में वीडियोकॉन ने 2.5 अरब डॉलर में अपना मोजांबीक गैस क्षेत्र बेचा था। इस रकम का इस्तेमाल बैंक ऋणों को चुकाने में किया गया। 
 
स्पेक्ट्रम की बिक्री 
 
पिछले साल मार्च में कंपनी ने 4,428 करोड़ रुपये में भारती एयरटेल को स्पेक्ट्रम की बिक्री की थी। कंपनी ने इस रकम का इस्तेमाल भारतीय बैंकों के ऋण चुकाने में किया। पिछले 6 वर्षों में कंपनी ने बैंकों को ब्याज के तौर पर 26,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।  
 
देव चटर्जी द्वारा जुटाई गई जानकारी पर आधारित 
Keyword: honda, japan, car,,
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