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दक्षता विकास से ही निकल सकेगी आईटी क्षेत्र की राह

मुद्रा मंत्र
सुबीर रॉय /  May 23, 2017

भारतीय सॉफ्टवेयर एवं सेवा उद्योग को दुनिया भर में अपने क्षेत्र का अगुआ माना जाता था लेकिन इन दिनों ऐसी मीडिया रिपोर्ट आ रही हैं जिनमें इस उद्योग में लगे हजारों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराने की खबरें दिखाई दे रही हैं। ऐसे समय में हमें निर्णायक भूमिका निभा रहे मुद्दों को समझने की जरूरत है। इन मुद्दों को सही ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में भी देखना होगा ताकि सटीक नीतियों के सहारे इस उद्योग के मौजूदा संकट से निकल पाने का रास्ता तलाशा जा सके। 

 
भारतीय सॉफ्टवेयर एवं सेवा उद्योग ने ऐतिहासिक रूप से चक्रीय पैटर्न दिखाया है। जब भी कोई नई चुनौती आती है तो यह उद्योग नई रणनीतियां लेकर सामने आता रहा है। वर्ष 2009-10 का समय भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती का दौर था। पूरी दुनिया वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के गहरे असर से निकलने की जद्दोजहद में लगी थी। उसके एक दशक पहले भी प्रौद्योगिकी और दूरसंचार का बुलबुला फूटने से नई प्रौद्योगिकी में निवेश प्रभावित हुआ था। 11 सितंबर, 2001 के आतंकी हमले ने तो समूची दुनिया में कारोबारी धारणाओं पर गहरी चोट पहुंचाई थी। उस बार भी भारतीय आईटी उद्योग को संकट से निकलने का रास्ता तलाशना पड़ा था। इस तरह यह एक ऐसा उद्योग है जो समय-समय पर खतरों से जूझता रहा है और बखूबी उससे बाहर भी निकला है। इस उद्योग ने वित्त वर्ष 2015-16 में करीब 37 लाख लोगों को रोजगार दिया था। सॉफ्टवेयर कंपनियों के राष्ट्रीय संगठन नैसकॉम के एक अध्ययन में कहा गया था कि करीब 40-50 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने और उनकी दक्षता बढ़ाने की जरूरत होगी। सॉफ्टवेयर उद्योग को पहले से ही अंदाजा था कि आने वाले समय में उसे अपने समूचे कार्यबल को नए सिरे से प्रशिक्षित करना पड़ेगा। इस तरह यह नहीं कह सकते कि सॉफ्टवेयर उद्योग को मौजूदा चुनौतियों के बारे में पहले से अनुमान नहीं था। 
 
हालांकि डॉनल्ड ट्रंप की जीत और उसके बाद की वीजा पाबंदियों का पूर्वानुमान नहीं लगाया गया था। यह भी ध्यान में रखना महत्त्वपूर्ण है कि सभी भारतीय आईटी एवं सेवा कंपनियों पर मौजूदा संकट का एक जैसा असर नहीं पड़ा है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) अपना कारोबार ऐसे कर रही हैं मानो वह किसी दूसरे ही ग्रह पर हो। उसने अपने कर्मचारियों की छंटनी के भी कोई संकेत नहीं दिए हैं। इसने हाल ही में बिहार सरकार के सहयोग से पटना में एक सेंटर भी खोला है जहां करीब तीन हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। भारत की बड़ी आईटी कंपनियों में से टीसीएस का कारोबार दुनिया में सर्वाधिक फैला हुआ है। उसका 54 फीसदी राजस्व तो अकेले उत्तरी अमेरिका से आता है। इसके साथ ही भारत में भी वह अपने पांव जमाए हुए है। वहीं आईटी क्षेत्र के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित कॉग्निजेंट का 75 फीसदी राजस्व उत्तरी अमेरिका से आता है। यही वजह है कि उसने इस दौर में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है।
 
इससे दो सरल सिद्धांत निकलकर सामने आते हैं- अपने कारोबार को बेहद विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैलाइए और हरेक तरह का काम करने के लिए तैयार रहिए। हाल ही में अपना पासपोर्ट बनवाने वाले किसी भी भारतीय को यह अहसास हुआ होगा कि पासपोर्ट सेवा केंद्र की तस्वीर बदलने में टीसीएस ने कितनी अहम भूमिका निभाई है। दरअसल देश के अधिकांश पासपोर्ट सेवा केंद्रों का संचालन टीसीएस के ही पास है। इन केंद्रों में तैनात सरकारी कर्मचारी भी अब लोगों के प्रति अधिक दोस्ताना नजर आते हैं। नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन देने के बाद मैं दो घंटे के भीतर ही पासपोर्ट सेवा केंद्र से अपना काम पूरा कर बाहर निकल आया। एक हफ्ते के भीतर ही घर पर मेरा पासपोर्ट भी पहुंच गया था। अब जरा भारत को डिजिटल बनाने के लिए सरकार की तरफ से घोषित उद्देश्य पर गौर कीजिए। यूनिफाइड पेमेंट्स सिस्टम के आने से पैदा हुई कारोबारी संभावनाओं पर गौर कीजिए। इसकी वजह से पहले बैंक जाने या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने से भय महसूस करने वाले मामूली पढ़े-लिखे लोग भी बॉयोमेट्रिक तरीके से अपनी पहचान सुनिश्चित कर आसानी से डिजिटल भुगतान करने लगे हैं। 
 
एक अरब से भी अधिक आबादी वाले देश के तीव्र गति से डिजिटल होने से नवाचार लेकर आने वाले स्टार्टअप के सामने भी बेशुमार अवसर सृजित होंगे। तेजी से डिजिटल हो रही दुनिया में ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्लॉउड कंप्यूटिंग के चलते पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय आईटी उद्योग किस तरह से खुद को तैयार करता है? नैसकॉम के अध्ययन में इसकी रूपरेखा भी बताई गई है। भारत को डिजिटल तकनीक में नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना, नवाचार में लगे समूहों को तकनीकी संस्थानों से संबद्ध करना, 40-50 लाख लोगों की दक्षता बढ़ाने के लिए क्षमता का विकास, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम पर अधिक जोर, भारत की ब्रांडिंग किफायती तकनीक के अगुआ के स्थान पर वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में की जाए और इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ऐसे नियम बनाए जाएं जो घरेलू स्तर पर भी बाजार पैदा कर सके। इसके अलावा बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण, साइबर सुरक्षा कानूनों को सशक्त बनाने, शिक्षा में सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी को सरल बनाना और कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना होगा।
 
भारतीय आईटी उद्योग को तो आने वाली चुनौती और उससे निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी थी लेकिन देश और सरकार के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है। भारतीय आईटी कंपनियों के पुनर्गठन का मध्यवर्ग के रोजगार पर तगड़ा असर पड़ेगा। उस स्थिति में आईटी क्षेत्र पहले की तरह रोजगार का बड़ा प्रदाता नहीं रह जाएगा। कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने की कोशिशों का सामाजिक प्रभाव भी पड़ सकता है। 10 साल से अधिक अनुभव रखने वाले टीम लीडर को अगर अपनी नौकरी बचाने के लिए नई तकनीक सीखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा तो यह उसके लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा।
Keyword: IT, आईटी ब्रांड, सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स,
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