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जीएसटी शिखर सम्मेलन से घाटी में जगी पर्यटन की उम्मीद

दिलाशा सेठ /  05 21, 2017

शिखर सम्मेलन से कश्मीर में सामान्य हालात का संदेश

कश्मीर के अस्थिर हालात ने अब तक राज्य में पर्यटन को चोट पहुंचाई है। लेकिन श्रीनगर की जीएसटी परिषद की बैठक ने यह संदेश दिया है कि घाटी में सब कुछ दुरुस्त है। इस बैठक में वरिष्ठï केंद्रीय मंत्रियों, अधिकारियों और राज्य के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर यह दो दिवसीय बैठक पिछले सप्ताह श्रीनगर में संपन्न हुई। बैठक में नई कर व्यवस्था की दरों को अंतिम रूप देने के लिए बड़ी संख्या में मंत्रियों और अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने देश भर से आकर हिस्सा लिया। इस बैठक से विश्व को यह संकेत मिलने की संभावना है कि घाटी में सब ठीक है। हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन स्थानीय लोगों से बात की उन्होंने कहा कि लगातार अशांति की वजह से पिछले कुछ महीनों से पर्यटन पूरी तरह से बरबाद हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि जीएसटी शिखर सम्मेलन ने यहां सामान्य हालात होने का जो संदेश दिया है, उससे पर्यटकों को बढ़ावा मिल सकता है और एक बार फिर सक्रिय कारोबार का सीजन बन सकता है। कम से कम उन्हें तो ऐसा ही लगता है।

शहर के एक टैक्सी ड्राइवर ने कहा, 'यहां न मौसम का भरोसा है, न हालात का।' यहां देवदार, चिनार, विलो और अखरोट के वृक्षों की घनी चादर के साथ-साथ हर कोने पर सशस्त्र राज्य पुलिस बल को देखा जा सकता है। आलम यह है कि अस्थिर हालात से होटल खाली हो गए हैं। एक प्रसिद्ध होटल के कार्यकारी ने कहा, 'इस समय हमारे पास केवल 10 कमरे बुक हैं और यह सीजन का शीर्ष है।' अगर इसकी पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करके देखें तो उस समय 95 कमरे बुक थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आतंकी हमलों के डर के अलावा आए दिन होने वाली पत्थरबाजी की घटनाएं पर्यटकों को दूर कर रही हैं। दरअसल, यहां पत्थरबाजी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। 19 वर्षीय छात्र बिलाल से पूछें कि समय व्यतीत करने के लिए उनका पसंदीदा काम क्या है तो उनका उत्तर होगा, 'मैं और मेरे दोस्त पत्थर मारकर मजा करते हैं। हम क्रिकेट नहीं खेलते, सिनेमा नहीं देखते।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटक कभी भी निशाना नहीं रहे हैं और इसलिए कश्मीर में उनका आगमन जरूर जारी रहना चाहिए। जीवनयापन के लिए टैक्सी चलाने वाले एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि इस सीजन में उनके कारोबार में 60 प्रतिशत तक गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि पर्यटन की कमी ने हमें बुरी तरह प्रभावी किया है, जिससे युवाओं को अवैध काम करने को बढ़ावा मिला है।

राज्य के एक सूचना एवं प्रचार अधिकारी ने कहा कि शिकारा मालिकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, 'आमतौर पर अप्रैल के बाद से हमें पश्चिम बंगाल और गुजरात से बहुत से पर्यटक मिलते हैं लेकिन इस साल उनका आना बहुत कम है। इसने छोटे रेस्तरां, होटलों और शिकारा संचालकों की गुजर-बसर पर असर डाला है।' श्रीनगर से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित गुलमर्ग की भी यही दास्तान है। केबल कार के एक कर्मचारी ने कहा कि इस साल कारोबार पिछले साल के मुकाबले एक-तिहाई ही रह गया है। फिलहाल आलम यह है कि जांच और चौकसी कश्मीर के हालात की बानगी पेश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली द्वारा जीएसटी के ब्रीफिंग कार्यक्रम के लिए मुगल गार्डन के ऐतिहासिक शाही झरने चश्मेशाही की ओर जाते हुए पत्रकारों को ले जाने वाली गाड़ी को वीवीईपी पास होने के बावजूद कम से कम तीन बार पूछताछ के लिए रोका गया।

घाटी में सोशल मीडिया का कोई सवाल ही नहीं है। ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सऐप प्राय: अवरुद्ध रहते हैं। एयर इंडिया के होटल सेंटूर के एक कर्मचारी ने कहा कि कृपया करके यह संदेश फैला दें कि श्रीनगर सुरक्षित और सुंदर है। जीएसटी परिषद की बैठक का आयोजन स्थल भी यही होटल था। कर्मचारी ने कहा कि कमजोर पर्यटन ने उनकी कमाई पर चोट पहुंचाई है। यादगार वस्तुओं के एक विक्रेता के अनुसार यहां लोग रोजमर्रा की नई जिंदगी के आदी हो चुके हैं। हम बंदूकों और पत्थरों के हमेशा से आदी रहे हैं लेकिन पिछले साल पैलेट्स हमारे लिए नए थे। अब हम इसके भी आदी हो चुके हैं। जीएसटी शिखर सम्मेलन की कवरेज के लिए गए पत्रकारों समेत अन्य लोगों के शामिल होने को राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। जम्मू और कश्मीर पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि यहां अशांति नहीं है। छोटी-मोटी घटनाएं तो हर शहर में हो रही हैं। आप यह संदेश जरूर दीजिए कि कश्मीर पर्यटन के लिए सुरक्षित जगह है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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