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भीम, भारत, आधार से डिजिटल के नए द्वार

करण चौधरी /  05 21, 2017

डिजिटलीकरण सर्वोपरि, छाप दिख रही हर कहीं

50 लाख लोगों ने भीम ऐप डाउनलोड किया
1,00,000 अंतर बैंक ट्रांजक्शन और 20 लाख गैर बैंक ट्रांजक्शन एक दिन में आधार के माध्यम से
2,500 लाख यूपीआई के तहत वर्ष 2017-18 तक डिजिटल ट्रांजक्शन का लक्ष्य
10 लाख बैंकों द्वारा पीओएस मशीनें उपलब्ध कराई गई
20 लाख सितंबर 2017 में आधार कार्ड आधारित पीओएस मशीनें उपलब्ध
कराई गई
1,55,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई
10,000 करोड़ भारत नेट परियोजना वर्ष 2017-18 में आवंटित
1,50,000
ग्राम पंचायत भारत नेट से जुड़ी
1 लाख करोड़ रुपये का अप्रैल में कुल डिजिटल ट्रांजक्शन

भारत में 1980 के दशक में कंप्यूटर लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जाता है लेकिन मोदी सरकार ने पिछले तीन सालों के दौरान डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत कंप्यूटरीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी और सेवाओं के डिजिटलीकरण को बहुत जोरशोर से आगे बढ़ाया है। सरकार के एजेंडे में डिजिटलीकरण सर्वोपरि है और इसकी छाप हर कहीं दिखती है। चाहे वह गांव के स्तर पर ई-पंचायत हो, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के तहत सब्सिडी का वितरण हो या फिर नोटबंदी के बाद लेनदेन के डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देने के लिए भीम और भारत क्यूआर जैसे ऐप लॉन्च करना। आधार पहचान प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया के प्रमुख आधार स्तंभों में से एक है। सरकार जिस तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रही है उसकी अपनी कई चुनौतियां और समस्याएं हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सरकार की मंशा तो अच्छी है लेकिन रणनीति साफ नहीं है और इसके क्रियान्वयन में कई समस्याएं हैं।

डिजिटलीकरण में चुनौतियां

साइबर सुरक्षा डिजिटल विभाजन खराब कनेक्टिविटी नोटबंदी के बाद रुपये आना नियामकीय बाधाएं

डिजिटल इंडिया की शुरुआत

आधार : डिजिटल इंडिया के लिए मुख्य  आधार कार्ड आधारित भुगतान भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) सीईआरटी-इन डिजिधन अभियान डिजिलॉकर प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण (डीबीटी) स्मार्ट सिटी अभियान

नोटबंदी से नकद लेनदेन को बढ़ावा मिला है लेकिन डिजिटल भुगतान से संबंधित नीतियां और बुनियादी ढांचा अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। 100 स्मार्ट शहरों की योजना अभी विचार के स्तर पर है और कई विश्लेषकों का कहना है कि यह योजना अभी तक ड्रॉइंग बोर्ड तक भी नहीं पहुंची है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़ी कंपनियों की संस्था नैसकॉम के अध्यक्ष रमन रॉय ने कहा, 'निश्चित रूप से नोटबंदी से डिजिटल भुगतान में तेजी आई है लेकिन किसी एक कदम पर प्रतिक्रिया के बजाय पूरी व्यवस्था को विकसित करने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सरकार की मंशा अच्छी है लेकिन इसके लिए योजनाएं स्पष्टï नहीं हैं।' उन्होंने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां सरकार के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं। रॉय ने कहा, 'सरकार को दी गई सेवाओं के भुगतान में समस्याएं हैं। हम दुनिया में सर्वश्रेष्ठï आईटी सेवाएं देते हैं लेकिन जब भारत की बात आती है तो कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसी चीजों को सुलझाने की जरूरत है।'

साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता

साइबर सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। हाल में हुए साइबर हमले इस बात का सबूत हैं कि भारतीय आईटी व्यवस्था में कई खामियां हैं। साइबर कानून विशेषज्ञ और उच्चतम न्यायालय में वकील पवन दुग्गल ने कहा, 'जहां तक डिजिटल पहल का संबंध है तो पिछले तीन वर्षों में इस दिशा में ऐतिहासिक काम हुआ है लेकिन देश में साइबर सुरक्षा को लेकर ज्यादा काम नहीं हुआ है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में गंभीर खामियां हैं क्योंकि इसमें डिजिटल दिशा में जाने के खतरों को संज्ञान में नहीं लिया गया है। आईटी कानून को मजबूत बनाने की जरूरत है क्योंकि रैन्समवेयर जैसी चीजें इसके दायरे से बाहर है। आधार से जानकारी लीक होने की भी घटनाएं हुई हैं जो बड़ा सुरक्षा खतरा है। इसलिए डिजिटल ढांचे के लिए कानूनी और नीतिगत व्यवस्था बनाने की जरूरत है।'

नकदी की दमदार वापसी

एक बार फिर नकदी का बोलबाला होने से सरकार की डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की मुहिम प्रभावित हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक डिजिटल लेनदेन में मार्च की तुलना में अप्रैल में मूल्य और परिमाण दोनों में कमी आई है। मार्च में यह अपनी चरम सीमा पर पहुंचा था। आरबीआई के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 1.095 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल लेनदेन हुआ जो मार्च के 1.495 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 26.78 फीसदी कम है। अलबत्ता मार्च के बाद अप्रैल में ही सर्वाधिक डिजिटल लेनदेन हुआ है। उद्योग के जानकारों के मुताबिक  नोटबंदी के बाद पूंजी बाजार में ज्यादा पैसा आना शुरू हो गया है लेकिन इस कदम के बाद चरम पर पहुंचे डिजिटल लेनदेन में अब ठहराव आ रहा है। अलबत्ता भीम जैसे ऐप लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। 

सरकार की मुहिम जारी

सरकार डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है और खुले हाथों से फंड उपलब्ध करा रही है। सरकार ने इस साल के बजट में भारतनेट कार्यक्रम के लिए 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस कार्यक्रम का लक्ष्य इस साल के अंत तक 150,000 ग्राम पंचायतों को तीव्र गति की ब्रॉडबैंड सुविधा से जोडऩा है। साथ ही तीन साल के दौरान 65,000 प्राथमिक कृषि ऋण संस्थाओं को जिला सहकारी बैंकों से जोडऩे की भी योजना है। इसके लिए 1,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

दूसरे मंत्रालयों को तकनीकी दिशा बताने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का बजट 534 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,039 करोड़ रुपये हो गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के दौर में केवल 2,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई थी जबकि मोदी सरकार ने 1.70 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई है। ऑप्टिकल फाइबर केबल ब्रॉडबैंड और दूरसंचार सेवाओं के लिए जरूरी है। इस साल सरकार ने कई क्षेत्रों में डिजिटलीकरण की शुरुआत की है। इनमें महिला एवं बाल विकास, डिजिगांव पहल के तहत गांवों में डिजिटल दक्षता विकास और ऑनलाइन शिक्षा शामिल है। यहां तक कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा भी डिजिटल होने जा रहा है। 

नकदीरहित लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले छह महीनों के दौरान कई व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें  प्रधानमंत्री की मेजबानी में डिजि धन मेला, आधार आधारित भुगतान प्रणाली सहित डिजिटल भुगतान के नए तरीके शुरू करना, भीम जैसे ऐप, भारत क्यूआर और लोगों को इस बारे में जागरूक बनाने के लिए समर्पित टीवी चैनल डिजिशाला शामिल है। प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा के अगले दिन ही डिजिटल भुगतान, मोबाइल वॉलेट के इस्तेमाल और यूपीआई को बढ़ावा देने का काम शुरू हो गया था। पेटीएम और फ्रीचार्ज जैसी मोबाइल वॉलेट कंपनियों ने अखबारों में पूरे पन्ने के विज्ञापन देकर प्रधानमंत्री को इस साहसिक कदम के लिए बधाई दी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय कुमार ने कहा, 'हम लोगों को सशक्त बनाने और डिजिटल पहल को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। हमारे साझा सेवा केंद्र, आधार, डीबीटी जैसी योजनाएं डिजिटल इंडिया में मदद कर रही हैं।'

आगे की राह

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले चरण में डिजिटल इंडिया के तहत न्याय व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में प्रगति होगी। पिछले तीन सालों में सरकार ने जन धन, आधार और मोबाइल का मजबूत प्रौद्योगिकी ढांचा तैयार किया है और अब उसकी मंशा इसे आगे ले जाने की है। टेक्नोपैक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अरविंद सिंघल ने कहा, 'सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि देश की न्याय व्यवस्था को डिजिटल इंडिया के तहत लाया जाएगा। मोदी सरकार कई क्षेत्रों को इससे जोड़ रही है।'
Keyword: narendra modi, development,,
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