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जीएसटी से कम होगी खुदरा महंगाई

दिलाशा सेठ /  05 21, 2017

बीएस बातचीत

राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा कि अनुपालन में सुधार से इस वित्त वर्ष के अंत तक खुदरा महंगाई में दो फीसदी की कमी आनी चाहिए। जीएसटी संबंधित तमाम मुद्दों पर गुलमर्ग में दिलाशा सेठ ने अढिया से की बातचीत। प्रस्तुत है संपादित अंश:

वस्तुओं और सेवाओं की कर दरों को तय करने के लिए हुई जीएसटी परिषद की 14वीं बैठक के बाद एक जुलाई से जीएसटी लागू करने के लिए कितनी तैयारी है? अभीऔर कितनी बैठकों की जरूरत होगी?

हमने करीब 95 फीसदी काम कर दिया है। अब केवल 5 फीसदी काम बचा है जिसे हम 3 जून को होने वाली अगली बैठक में निपटा देंगे। अगर जरूरत पड़ी तो एक जुलाई से जीएसटी लागू होने से पहले एक और बैठक होगी।

वे कौन से छिटपुट मुद्दे हैं जिन्हें जीएसटी लागू करने से पहले सुलझाया जाना है?

जीएसटी लागू करने से पहले व्यापार और उद्योग जगत तक पहुंचना एक अहम मुद्दा है। हम पहले से ही इस पर काम कर रहे हैं और अब इस प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है। केंद्र और राज्यों की एजेंसियां देश भर में बैठकें कर रही हैं और जीएसटी के बारे में संबंधित पक्षों को जागरूक बना रहे हैं। व्यापारियों और उद्योगों को जीएसटी की प्रक्रियाएं और नियम बताए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को भी इस बारे में जागरूक बनाना अहम है क्योंकि कुछ वस्तुओं पर कर की दरें बदल रही हैं लेकिन कुछ कर में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। कुछ व्यापारी जीएसटी की आड़ में उपभोक्ताओं से ज्यादा दाम वसूलने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए हमें उपभोक्ताओं को जागरूक करने की जरूरत है ताकि उन्हें ज्यादा कर का भुगतान न करना पड़े। फिलहाल हमारे सामने ये दो चुनौतियां हैं।

दूरसंचार क्षेत्र का कहना है कि जीएसटी दर 18 फीसदी होने से उपभोक्ताओं के लिए सेवा महंगी होगी। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

कई सेवाओं के लिए दरें 15 फीसदी से 18 फीसदी हो रही हैं लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी जा रही है। इसलिए वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार और किसी अन्य सेवा के मामले में इनपुट टैक्स क्रेडिट के कारण कर में कम से कम 3 फीसदी कमी आएगी और इसलिए वास्तविक कर में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। यह हर उद्योग में अलग होगा। हमने एक मोटा-मोटा हिसाब किताब लगाया है और यह कटौती कम से कम 3 फीसदी होगी।

तो क्या हमें कीमतों में कमी की उम्मीद करनी चाहिए?

अगर मुख्य दर में बदलाव हो रहा है तो फिर कंपनियां 15 फीसदी के बजाय 18 फीसदी कर वसूलेंगी। चूंकि कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट सुविधा मिल रही है तो उन्हें सेवाओं या वस्तुओं की कीमत उस स्तर तक कम करनी पड़ेगी। तभी कर की दरें लागू होंगी। यानी वास्तव में यह बराबर रहेंगी।

मुनाफाखोरी रोकने के लिए संस्था कब बनाई जाएगी? क्या यह अर्धन्यायिक संस्था होगी या प्रशासनिक व्यवस्था रहेगी?

इसके अर्धन्यायिक या फिर न्यायिक संस्था होने की जरूरत नहीं है। यह प्रशासनिक व्यवस्था हो सकती है लेकिन यह ऐसी संस्था होनी चाहिए जो जवाबदेह हो और जो सरकार की निगरानी में काम करे। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कंपनियों का हिसाब-किताब देखेगी, उनके कुछ सवाल जवाब करेगी, उनका पक्ष सुनेगी और फिर यह तय करेगी कि कंपनियों ने वास्तव में मुनाफाखोरी की है या नहीं।

यह व्यवस्था कितनी जल्दी गठित की जाएगी?

हम जल्दी से जल्दी इस व्यवस्था को बनाने की कोशिश कर रहे हैं या फिर ऐसी एजेंसी की पहचान कर रहे हैं जो यह काम कर सके। अगर हम जीएसटी लागू होने के तीन महीने बाद भी इसे गठित करें तो फिर इससे पहले मुनाफाखोरी में संलिप्त किसी की भी जांच की जा सकती है। हम व्यापारियों और उद्योगों के साथ सलाह मशविरा करेंगे और उनसे सहयोग का आग्रह करेंगे। जीएसटी के सुगम क्रियावन्यन के लिए हम उनसे फिलहाल कीमतें न बढ़ाने का अनुरोध करेंगे।

क्या स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) को लेकर ई-कॉमर्स कंपनियों की चिंता का जीएसटी परिषद में समाधान कर लिया गया है?

ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए एक फीसदी टीसीएस की दर तय की गई है। ई-कॉमर्स कंपनियां इस प्रावधान को नहीं रखने की मांग कर रही थीं लेकिन परिषद ने एक फीसदी टीसीएस को मंजूरी दी। मौजूदा कानूनों के तहत दो फीसदी टीसीएस का प्रावधान है।

जीएसटी लागू होने के बाद आप राजस्व में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि सरकार कर अनुपालन बढऩे की आस लगा रही है?

हम राजस्व में काफी सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट की निर्बाध गति के साथ जीएसटी कराधान की एक आधुनिक व्यवस्था है। यह ऐसी शृंखला है जिससे कोई बचकर नहीं जा सकता। इसलिए कर अनुपालन में निश्चित रूप से सुधार होगा। इसलिए हम राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। इसलिए हमने कुछ जोखिम लिया है और कई वस्तुओं पर कर की दर में कमी की है। हमें उम्मीद है कि कई वस्तुओं पर कर की दर घटाने और कुछ वस्तुओं को छूट की श्रेणी में रखने के बावजूद हमें नुकसान नहीं होगा।

क्या आपके पास कोई आंकड़ा है कि सरकार को राजस्व में कितना फायदा होगा?

मैं कोई संख्या नहीं दे सकता लेकिन इतना कह सकता हूं कि कम से कम इस वित्त वर्ष के हमारे राजस्व के लक्ष्य हासिल हो जाएंगे। दूसरे साल से राजस्व में ज्यादा बढ़ोतरी होगी। 

क्या जीएसटी से पहले साल महंगाई बढ़ेगी?

मुझे ऐसा नहीं लगता है क्योंकि हमने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की वस्तुओं को छूट वाली श्रेणी या न्यूनतम श्रेणी में रखा है। इसमें सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 11 फीसदी है और इनमें से अधिकांश सेवाएं शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इसलिए हमें उम्मीद है कि जीएसटी से महंगाई नहीं बढ़ेगी। करों में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को मिला तो वित्त वर्ष के अंत तक खुदरा महंगाई दो फीसदी कम हो सकती है। 

इस वित्त वर्ष में राज्यों को कितना मुआवजा दिया जाएगा? यह 2015-16 के 50,000 करोड़ रुपये से किस तरह अलग होगा?

अभी हमने इस बारे में सटीक अनुमान नहीं लगाया है लेकिन मोटे तौर पर इस वित्त वर्ष में जो भी मुआवजा देना होगा वह उपकर की कमाई से आएगा। यही वजह है कि हमने छोटी कारों पर कर की दर घटाने का प्रयास नहीं किया। हम वहां से कुछ राजस्व कमाना चाहते थे। 2015-16 में अनुमानित राशि 50,000 करोड़ रुपये थी जबकि 2017-18 के लिए अभी हमने अनुमान नहीं लगाया है। अलबत्ता हमने मोटे तौर पर हिसाब-किताब लगाया है।

जीएसटी के लिए आईटी नेटवर्क कितना तैयार है?

मैंने पिछले सप्ताह की जीएसटी नेटवर्क की तैयारियों की समीक्षा की थी। इसके लिए इन्फोसिस मुख्य सेवा प्रदाता है। मेरी उनसे लंबी चर्चा हुई थी। मुझे लगता है कि उनकी तैयारी अच्छी चल रही है। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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