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परिचालन के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा को सरकारी पैकेज की नहीं दरकार

अभिजित लेले और हंसिनी कार्तिक /  May 21, 2017

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक पी एस जयकुमार ने अभिजित लेले और हंसिनी कार्तिक को दिए साक्षात्कार में इस बात की पुष्टि की है कि वित्त वर्ष 2018 में कर्ज वसूली में सुधार नजर आएगा। एक साल पहले के मुकाबले ज्यादा आत्मïिवश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि बैंक को अपने परिचालन को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी पैकेज की दरकार नहीं है, लेकिन वह और रकम को ना नहीं कहेंगे। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश..

 
फंसे कर्ज के मोर्चे पर कितना और काम लंबित है?
 
काम के तीन क्षेत्र हैं। पहला, गैर-निष्पादित आस्तियों के लिए प्रावधान है। जब पुनर्गठन योजनाएं मसलन रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन होता है तो चर्चा वाले खाते और वास्तव में बने एनपीए के बीच कभी-कभी अंतर होता है। एसडीआर की संख्या कम है, लेकिन हमें इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। कितने प्रावधान की दरकार होगी, काफी महत्वपूर्ण होता है। दूसरा, जब दबाव वाले कर्ज के समाधान में लंबा वक्त लगता है तो पुराने प्रावधान जारी रहते हैं। इस साल पुराने एनपीए के प्रावधान पिछले साल से अलग नहीं होंगे। यह बड़ी संख्या है। एक या दो बड़े खाते होंगे, जो अभी एनपीए में शामिल नहीं हुए हैं। वहां चुनौतियां हैं। तीसरा, एसएमई के पोर्टफोलियो के व्यवहार का पता नहीं होता क्योंकि हमारा ध्यान बड़े खातों पर रहता है।
 
क्या नोटबंदी के बाद आप एसएमई को लेकर सतर्क हो गए हैं?
 
मैं नहीं कह रहा हूं कि एसएमई समस्या बनने जा रहा है। यह समाधान का मसला है कि अगला जोखिम कौन सा बनने जा रहा है। अच्छी बात यह है कि जहां भी उधार लेने वाले हमारे प्रोसेसिंग सेंटर पर आ रहे हैं, प्रदर्शन अच्छा रहा है। एसएमई के मामले में ग्राहकों को पकडऩा होगा, न कि उनके आने का इंतजार करना। 
 
आने वाले समय में जोखिम का क्या आकलन है?
 
जोखिम की प्रकृति का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। हम इस मामले में सतर्क हैं। बुरी परिस्थितियों में हमारा मानना है कि एक साल का परिचालन लाभ हमारी सभी चुनौतियों की खातिर प्रावधान के लिए पर्याप्त होगा।
 
वित्त वर्ष 2017 में 66 फीसदी प्रावधान कवरेज बैंक के लिए बेहतर हैं? इसका क्या परिदृश्य है?
 
मार्च 2018 तक प्रावधान कवर अनुपात 70 फीसदी तक जाएगा। समाधान के मामले में तस्वीर आशावादी नजर आ रही है। धरातल पर काफी काम हुए हैं। अब नए नियम आ गए हैं, लिहाजा इसके बारे में सकारात्मक अहसास की काफी वजहें हैं। यह शायद वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में नहीं होगा। लेकिन दूसरी तिमाही मेंं थोड़ी प्रगति नजर आ सकती है और तीसरी व चौथी तिमाही में निश्चित तौर पर नतीजे देखने को मिलेंगे।
 
वित्त वर्ष 2018 में वसूली के लिए क्या आपने कोई लक्ष्य तय किया है?
 
हम ग्राहकों के साथ और नजदीक जा रहे हैं। पिछली बार हमने जो अनुमान सामने रखा था, वही करीब-करीब वास्तविक नजर आया है। वित्त वर्ष 2018 में आप एनपीए में 3,000 करोड़ रुपये का इजाफा देख सकते हैं और इस तरह से सकल एनपीए करीब 46,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।
 
पहले आपने संकेत दिया था कि सरकारी पूंजी के बिना बैंक आगे बढ़ सकता है। क्या यह राय अभी भी कायम है?
 
कभी भी महालक्ष्मी को वापस मत भेजिये, अगर वह आपके घर आती हो। अगर रकम मिलती है तो हम ना नहीं कहेंगे, लेकिन हमें रकम की जरूरत नहीं है। तब शुद्ध रूप से यह सरकार का फैसला होगा कि वह राइट्स इश्यू में निवेश करे। हमें सरकारी पैकेज की दरकार नहीं है।
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