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जीएसटी का असर : कुछ के लिए उम्मीद की डगर

राम प्रसाद साहू, शीतल अग्रवाल और उज्ज्वल जौहरी /  05 21, 2017

वस्तु एवं सेवा कर के विभिन्‍न पहलू

विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र की तुलना में ऊंची दरों वाले क्षेत्रों की कंपनियों को बिक्री मात्रा सुधारने और मार्जिन बनाए रखने में आ सकती हैं दिक्कतें

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई दरों के मिलेजुले असर की संभावनाएं हैं, लेकिन इससे लंबी अवधि में फायदा मिलेगा। जीएसटी व्यवस्था से कर प्रणाली सुधरने की उम्मीद है। इससे विभिन्न केंद्रीय और राज्य करों की जगह एक कर ले लेगा, जिससे कर प्रणाली के नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी। यह इसलिए संभव होगा क्योंकि पूर्ववर्ती चरणों के करों को इनपुट क्रेडिट के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, भले ही लेनदेन किसी राज्य के भीतर या दो राज्यों के बीच हो। इस आसान कर प्रणाली से विशेष रूप से एफएमसीजी कंपनियों की लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन कुछ मामलों में इस कर प्रणाली के तहत ऊंची दरों से कंपनियों पर विपरीत असर भी पड़ेगा और यह बाजार की उम्मीदों के प्रतिकूल होगा। 

मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के उपभोक्ता विश्लेषक कृष्णन सांबमूर्ति कहते हैं, '28 फीसदी की दर (वर्तमान दर 25 से नई दर 28 फीसदी होना ) से संगठित और असंगठित कंपनियों के उत्पादों की कीमतों के बीच अंतर मामूली बढऩे के आसार हैं, जिससे असंगठित क्षेत्र की कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी।' यही स्थिति भवन निर्माण सामग्री के मामले में रहेगी। ऐंबिट कैपिटल के अनुसंधान प्रमुख नितिन भसीन कहते हैं कि जीएसटी भवन निर्माण सामग्री में विशेष रूप से प्लाईवुड और टाइल क्षेत्र के लिए नकारात्मक है। इसकी वजह यह है कि अंतिम दरें (28 फीसदी) तय की गई हैं, जो 18 फीसदी की अनुमानित दर से काफी अधिक हैं। 

इसका मतलब यह है कि संगठित क्षेत्र के असंगठित क्षेत्र का हिस्सा हासिल करने के पहले के अनुमान आसानी से पूरे नहीं होंगे। विश्लेषकों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में दरें बढ़ी हैं, उनके सभी खंडों में मात्रात्मक वृद्धि सीमित रहेंगी क्योंकि कीमतों में कटौती की कम गुंजाइश है। संगठित उद्यमों को मार्जिन या मात्रा में से किसी एक को चुनना होगा। कंपनियां बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्या रणनीतियां अपनाती हैं, यह आगे बहुत अहम होगा। 

दूसरी ओर कर की दर कम होने से प्लास्टिक फर्नीचर बनाने वाली संगठित कंपनियों को असंगठित कंपनियों से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। कई क्षेत्रों में कर की दरें कम भी हुई हैं। इन कंपनियों द्वारा यह लाभ उपभोक्ताओं को दिए जाने और अपनी बिक्री मात्रा में इजाफा किए जाने की उम्मीदें हैं। आगे बाजार की उन श्रेणियों की दरों पर नजर रहेंगी, जिनकी दरें अभी तय नहीं की गई हैं। इनमें तंबाकू, बिस्कुट, फुटवियर, कीमती धातुएं, आभूषण और कपड़े आदि शामिल हैं। यहां हम उन श्रेणियों और उनसे जुड़ीं चुनिंदा कंपनियों पर नजर डाल रहे हैं, जो नई कर प्रणाली के तहत सकारात्मक और नकारात्मक रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। 
 
सेंचुरी प्लाईबोड्र्स/ ग्रीनप्ले
 
बाजार प्लाईवुड की दर 18 फीसदी तय होने का अनुमान लगा रहा था, लेकिन वास्तविक दर 28 फीसदी रखी गई है। इससे सेंचुरी प्लाईवुड और ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज जैसी संगठित कंपनियों की अपने क्षेत्र की असंगठित कंपनियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी क्षमता कम होगी। इस तरह संगठित कंपनियों को कीमत-मूल्य समीकरण के बीच उचित संतुलन साधना होगा, जबकि ऊंची दर का बोझ ग्राहकों पर डालना होगा। 
 
कॉलगेट 
 
टूथपेस्ट उद्योग की अगुआ कॉलगेट को पतंजलि, डाबर और अन्य से मिल रही कड़ी टक्कर के कारण पिछले कुछ समय से वृद्धि के लिए जूझना पड़ रहा है। टूथपेस्ट पर जीएसटी की दर कम तय किए जाने से उसे कुछ प्रतिस्पर्धी दबाव कम करने में मदद मिलेगी। कंपनी इस फायदे को अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचा सकती है या इसे ब्रांड बिल्डिंग या बिक्री प्रचार में निवेश कर सकती है। दोनों ही कदमों से कॉलगेट की टूथपेस्ट की बिक्री में इजाफा होगा। 
 
डाबर इंडिया 
 
डाबर के लिए जीएसटी मिली-जुली खबर लाया है। आयुर्वेदिक उत्पादों पर 12 फीसदी दर तय की गई है, जबकि यह उद्योग 5 फीसदी की उम्मीद कर रहा था। हालांकि यह दर वर्तमान स्तर के काफी नजदीक है और इसलिए इसका कंपनी के आयुर्वेदिक खंड पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन टूथपेस्ट की कीमतें कम करने से डाबर को फायदा मिलेगा। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का मानना है कि प्राकृतिक शहद (5 फीसदी) और कृत्रिम शहद (12 फीसदी) की दरों के बीच अंतर से कंपनी को फायदा मिलेगा। कंपनी की प्राकृतिक शहद के खंड में बाजार हिस्सेदारी बढ़ सकती है। जूस पर कर की दर 6 से 8 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गई है, जिसे कंपनी अंतिम ग्राहकों पर डाल सकती है। कुल मिलाकर डाबर को जीएसटी से फायदा मिलने की उम्मीद है। 
 
हैवेल्स 
 
उपभोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रिकल उपकरणों का बड़ा बास्केट रखने के कारण हैवेल्स को जीएसटी दरों के मामले में कई अड़चनों का सामना करना पड़ेगा। इस कंपनी की सभी श्रेणियों में उपस्थिति है, जबकि अन्य कंपनियों की किसी एक उत्पाद में मौजूदगी है। एयर कंडीशनर खंड में हैवेल्स कीमतों में वॉल्टास, ब्लू स्टार और व्हर्लपूल जितनी बढ़ोतरी करेगी। हैवेल्स सबसे अधिक निराश पंखों के खंड में होगी क्योंकि इस खंड पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा। हालांकि पहले 26 फीसदी कर था और इस खंड में जीएसटी 18 फीसदी तय किए जाने की उम्मीद थी। पंप और एलईडी बल्ब के लिए जीएसटी की दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से कंपनी को राहत मिलेगी। 
 
हिंदुस्तान यूनिलीवर 
 
हिंदुस्तान यूनिलीवर पर जीएसटी का असर मिला-जुला रहेगा। सकारात्मक असर साबुन, टूथपेस्ट, आइसक्रीम, नूडल्स एवं जैम पर 18 फीसदी जीएसटी तय किया जाना है। इसकी वजह यह है कि कंपनी इन उत्पादों पर अभी ज्यादा कर चुकाती है। आयुर्वेदिक उत्पादों के लिए दर 12 फीसदी तय की गई है, जिसके 5 फीसदी तय होने का अनुमान थी। यह कंपनी के लिए निराशाजनक है। हालांकि यह दर वर्तमान दरों के आसपास है, इसलिए ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। डिटर्जेन्ट पर पर ज्यादा दर निराशाजनक है, लेकिन इस खंड में एचयूएल को अगुआ स्थिति का फायदा मिलेगा। कॉफी और शैंपू पर भी ज्यादा दर नकारात्मक है। 
 
कजारिया सिरैमिक्स/ सेरा
 
दोनों कंपनियों पर कई वजहों से जीएसटी का नकारात्मक असर पड़ेगा। सैनिटरीवेयर और ऊंचे मार्जिन वाली विट्रिफाइड टाइल पर जीएसटी की दर 18 फीसदी तय किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन असल दर 28 फीसदी तय की गई है। हालांकि बुनियादी सिरैमिक टाइलों पर दर 18 फीसदी रखी गई है, जिससे उन्हें दबाव कुछ कम करने में मदद मिलेगी। विश्लेषकों का कहना है कि अगर ये कंपनियां ऊंचे कर के बोझ को ग्राहक पर डालती हैं तो उनके उत्पादों और असंगठित उद्यमियों के उत्पादों की कीमतों के बीच अंतर और बढ़ेगा। 
 
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा 
 
वाहन क्षेत्र में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा साफ तौर पर फायदे में रहेगी। कंपनी जिन वाहनों का विनिर्माण करती है, उनमें से ज्यादातर पर जीएसटी की प्रस्तावित दरें कम हैं। कंपनी के बोलेरो और एक्सयूवी500 जैसे बड़े स्पोट्र्स यूटिलिटी व्हीकल्स (एसयूवी) के पोर्टफोलियो पर अब 43 फीसदी कर लगेगा, जिसमें 28 फीसदी बुनियादी दर और 15 फीसदी उपकर है। पहले अधिकतम दर 53.3 फीसदी थी। कंपनी के सबसे ज्यादा मुनाफे वाले खंड ट्रैक्टर पर कर का भार यथावत रहेगा। 
 
मारुति सुजूकी 
 
कुल मिलाकर मारुति सुजूकी के लिए नई कर प्रणाली फायदेमंद रहेगी। कंपनी के लिए अच्छी खबर उसके पेट्रोल पोर्टफोलियो के लिए है, जिसमें कर की दरें कम होंगी। कंपनी की बिक्री में पेट्रोल वर्जन का बड़ा योगदान है। इस समय छोटी पेट्रोल कारों पर कर की दर करीब 30 फीसदी है, जबकि जीएसटी की दर 29 फीसदी (1 फीसदी उपकर सहित) अनुमानित है, जिससे थोड़ा फायदा मिलेगा। छोटी डीजल कारों पर ज्यादा उपकर (3 फीसदी) से ग्राहकों के लिए ऑन-रोड कीमत बढ़ सकती है। 
 
पिडिलाइट 
 
पिडिलाइट के लिए एडहेसिव की दरों में कमी फायदेमंद और सीलंट की दरों में बढ़ोतरी नुकसानदेह रहेगी। पिडीलाइट की मजबूत अगुआ स्थिति और मार्जिन को बनाए रखने पर लगातार ध्यान देना उसकी ताकत हैं। 
 
टाटा मोटर्स 

देश की इस सबसे बड़ी वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता कंपनी के लिए अप्रत्यक्ष कर का बोझ घटकर 28 फीसदी पर आ जाएगा, जो इस समय 30.2 फीसदी है। कंपनी को 70 फीसदी आमदनी वाणिज्यिक वाहन खंड से होती है। मझोली और बड़ी कारों के खंडों में भी टाटा मोटर्स को फायदा मिलेगा। इन खंडों में कर (उपकर सहित) 43 फीसदी होगा, जबकि पहले दर 47 से 49 फीसदी थी। ज्यादा दरों की वजह से उसके छोटी कारों के पोर्टफोलियो (टियागो, टिगोर, इंडिका और इंडिगो) के डीजल सेगमेंट पर मामूली नकारात्मक असर पड़ेगा। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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