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ब्रांडेड परिधान, दीजिए ज्यादा दाम

करण चौधरी / नई दिल्ली May 19, 2017

अगली बार जब आप अपने पसंदीदा ब्रांडेड स्टोर में जाएंगे तो डिजाइनर जीन्स और ब्रांडेड टी-शर्ट के लिए ज्यादा दाम चुकाने को तैयार रहें। नई  अप्रत्यक्ष कर प्रणाली वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत ब्रांडेड परिधानों और अन्य तैयार कपड़ा उत्पादों पर कर का बोझ बढ़ाकर 18 फीसदी किए जाने से उनकी कीमतें बढऩे के आसार हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि किस तरह के ब्रांडेड परिधानों पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा और नई कर प्रणाली के तहत असल में ब्रांडेड किसे माना जाएगा? इस वजह से उद्योग से जुड़े कारोबारी चिंतित हैं। स्पाइकर लाइफस्टाइल प्राइवेट लिमिटेड के सीओओ संजय वखारिया ने कहा, 'इसका बड़ा असर होगा क्योंकि इस कारोबार पर कर का बोझ वर्तमान समय की तुलना में बढ़ेगा। इससे निश्चित रूप से ब्रांडेड कपड़े महंगे हो जाएंगे। ब्रांडेड की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। मेरा मानना है कि सभी ब्रांडेड कपड़े महंगे हो जाएंगे, भले ही वे घरेलू हों या विदेशी।'
 
बाजार के जानकारों ने कहा कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि वे किन ब्रांडों पर 18 जीएसटी लगाने की योजना बना रहे हैं। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, 'कोई ब्रांड करोड़ों डॉलर का डिजाइन हाउस हो सकता है और कोई अपने ब्रांड के तहत परिधान बेचने वाला छोटा विनिर्माता। अगर सरकार छोटे विनिर्माता से उतना ही जीएसटी वसूलती है तो इससे परिधान विनिर्माण से जुड़े लघु एवं मझोले उद्योग प्रभावित होंगे।'
 
टेक्नोपेक के मुताबिक भारत का घरेलू परिधान उद्योग वर्ष 2010 में करीब 36 अरब डॉलर का था। पुरुष परिधान खंड 15 अरब डॉलर, महिला परिधान खंड 14 अरब डॉलर और बच्चों के परिधानों का खंड 7 अरब डॉलर का था। परिधान विनिर्माण को वर्ष 2000 के आसपास एसएसआई श्रेणी से अनारक्षित किया गया था। एसएसआई के प्रतिबंधों से उद्योग को विखंडित और असंगठित रहा है। घरेलू कारोबार के अलावा 2010 में निर्यात बढ़कर करीब 11 अरब डॉलर हो गया था और इसमें 2020 तक करीब 40 अरब डॉलर  होने की संभावना है।  ग्रांट थॉर्टन इंडिया एलएलपी में पार्टनर कृष्ण अरोड़ा ने कहा, 'वर्तमान कर प्रणाली में सिले सिलाए परिधानों (इनपुट क्रेडिट प्रतिबंधों के साथ) पर 2 फीसदी उत्पाद शुल्क लगता है और 1,000 रुपये या उससे ऊपर की खुदरा बिक्री कीमत वाले उत्पादों पर शुल्क की प्रभावी दर 7.5 फीसदी है। इसके अलावा तैयार वस्त्रों की बिक्री पर 6 फीसदी वैट लगता है, जिससे कर की असल लागत 12.5 से 13 फीसदी हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी में ज्यादातर परिधान उत्पादों पर 18 फीसदी कर का प्रस्ताव रखा गया है, भले ही उनकी खुदरा कीमत कितनी भी हो। जीएसटी प्रणाली को देखते हुए इनपुट क्रेडिट बढ़ सकता है, लेकिन फिर भी ब्रांडेड परिधान खरीदारों के लिए महंगे हो सकते हैं।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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