बिजनेस स्टैंडर्ड - लक्जरी कारें और एसयूवी हो सकती हैं सस्ती
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लक्जरी कारें और एसयूवी हो सकती हैं सस्ती

अजय मोदी / बेंगलूरु May 19, 2017

जीएसटी लागू होने से जहां बड़ी और लक्जरी कारें और एसयूवी की कीमतों में कुछ नरमी देखी जा सकती है वहीं आपको छोटी कारों के लिए 1 जुलाई से कुछ अधिक कीमत चुकाने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। ट्रैक्टर और वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में हलकी कमी देखी जा सकती है। छोटे कारों की कीमतें 3,000 रुपये तक बढ़ सकती हैं जबकि स्कॉर्पियो और इनोवा जैसे ताकतवर वाहन लगभग 58,000 रुपये और 85,000 रुपये तक सस्ते हो जाने का अनुमान है।  सभी यात्री वाहनों को 28 फीसदी की दर के दायरे में लाने के अलावा जीएसटी परिषद ने छोटी पेट्रोल कारों (1200सीसी से कम) पर 1 फीसदी उपकर, छोटी डीजल कारों (1500सीसी से कम) पर 3 फीसदी उपकर और बड़े एसयूवी और लक्जरी वाहनों पर 15 फीसदी का उपकर लगाया है।

 
बड़ी कारों और एसयूवी को अप्रत्यक्ष करों में कमी की वजह से लाभ मिलने की संभावना है। ईवाई इंडिया में टैक्स पार्टनर सारिका गोयल ने कहा कि मौजूदा समय में एसयूवी पर 50 प्रतिशत से अधिक के कर लगते हैं जो घटकर 43 फीसदी  (28 फीसदी जीएसटी और 15 प्रतिशत उपकर) रह जाएंगे। यह एमऐंडएम और टोयोटा जैसे बड़े एसयूवी पर निर्भर रहने वाली कंपनियों के साथ साथ मर्सिडीज और ऑडी जैसी लक्जरी कार निर्माताओं के लिए अच्छा संकेत है। कुछ लोग अभी इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि क्या सरकार बड़ी कारों की कीमतें घटाएगी और छोटी कारों को महंगा बनाएगी। टोयोटा के भारतीय परिचालन के निदेशक एवं वरिष्ठï उपाध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) एन राजा ने कहा कि वह स्थिति पूरी तरह से स्पष्टï होने का इंतजार करेंगे।
 
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी रोलैंड फॉल्गर ने कहा कि जटिल कर ढांचा अब आसान हो जाएगा और परिचालन में अधिक दक्षता आएगी। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जीएसटी क्रियान्वयन लक्जरी कार उद्योग के लिए उपभोक्ताओं की मांग बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।' वाहन उद्योग के प्रमुख सेगमेंटों का कहना है कि जीएसटी दरें उम्मीद के अनुरूप हो जाएंगी और इसमें कोई बड़ा आश्चर्य नहीं है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा, 'जहां तक यात्री कार उद्योग का सवाल है तो जीएसटी परिषद ने इसके लिए दरें उतनी ही निर्धारित की हैं जितना कि संकेत दिया गया था और ये मौजूदा दरों के आसपास ही हैं।' भार्गव ने संकेत दिया कि हालांकि छोटी कारों पर जीएसटी की दरों का कुछ प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वैट दर सभी राज्यों में एक समान नहीं है। उन्होंने कहा, 'अधिक ईंधन उपभोग वाली कुछ प्रमुख कारें सस्ती हो जाएंगी।' उन्होंने कहा कि मारुति सुजूकी इस संदर्भ में अगली कंपनी होगी जिस पर प्रभाव नहीं पड़ सकता है। 
 
आईसीआरए के वरिष्ठï समूह उपाध्यक्ष सुब्रत राय ने कहा कि कीमत संवेदी छोटी कारों की कीमतें जीएसटी लागू होने के बाद कुछ बढ़ सकती हैं जबकि निर्माता बड़े वाहनों और एसयूवी पर कम कर का लाभ ग्राहकों को देने में सक्षम होंगे। उद्योग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को जीएसटी के तहत अलग अलग दायरे में लाए जाने को लेकर आश्चर्यचकित है। हाइब्रिड वाहनों पर 15 फीसदी के उपकर के साथ 28 फीसदी की कर दर लगाया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर सिर्फ 12 फीसदी की जीएसटी दर ही लागू होगी। इसलिए, टॉप ऐंड लक्जरी कारें और हाइब्रिड वाहन समान कर दायरे में आएंगे। भार्गव ने कहा कि हाइब्रिड वाहनों पर कर को लेकर और इस बदलाव के औचित्य को लेकर स्थिति स्पष्टï किए जाने की जरूरत है। पिछले महीने मारुति की पैतृक कंपनी सुजूकी ने भारत में लिथियम आयन बैटरी संयंत्र की स्थापना के लिए 1200 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है और इन बैटरी का इस्तेमाल हाइब्रिड कारों में किया जाएगा। मारुति सियाज और अर्टिगा जैसी कारें हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ बेचती है। सायम के अध्यक्ष और अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक विनोद दसारी ने कहा, 'इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग जीएसटी से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम हाइब्रिड वाहनों पर भी इसी तरह का कम शुल्क बरकरार रखे जाने की उम्मीद करेंगे।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, car,,
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