बिजनेस स्टैंडर्ड - दरों को लेकर उपभोक्ता कंपनियों में बेचैनी
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दरों को लेकर उपभोक्ता कंपनियों में बेचैनी

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली May 19, 2017

इस साल 1 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से कई डिस्क्रेशनरी उत्पादों की कीमतें बढऩे की आशंका है जिनमें कंज्यूमर ड्ïयूरेबल्स, मोबाइल हैंडसेट, शीतल पेय और सैनिटरीवेयर उत्पाद आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। जहां एफएमसीजी जैसे अधिक खपत वाले रोजमर्रा के सामान के लिए कर दर को अनुमान के अनुरूप रखा गया है वहीं डिस्क्रेशनरी खर्च प्रभावित हो सकती है जो पहले से ही सुस्त बना हुआ है। टेलीविजन सेट (टीवी), रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे उत्पादों की कीमतों में आने वाले दिनों में 1.5 से 4 फीसदी की तेजी देखी जा सकती है। इन उत्पादों के लिए प्रभावी कर दर 28 फीसदी पर तय की गई है जो मौजूदा 24-26.5 फीसदी की दरों से अधिक है। प्रमुख ड्ïयूरेबल निर्माताओं के वरिष्ठï अधिकारियों के अनुसार यह संभव है कि वे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालेंगे। कंपनियों को टीवी पैनलों और कम्प्रेशरों के लिए निर्माण सामग्री की लागत में बढ़ोतरी की भरपाई करने में पहले से ही चुनौती से जूझना पड़ रहा था।
 
पैनासोनिक इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्याधिकारी मनीष शर्मा ने कहा, 'जीएसटी स्लैब की घोषणा के संदर्भ में हम 4 फीसदी से अधिक की दर की उम्मीद कर रहे हैं। इनपुट टैक्स की वजह से व्यापार भागीदारों पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि वे अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाकर इसकी भरपाई कर सकते हैं।' ऐसे समय में जब सरकार डिजिटलीकरण को तेजी से बढ़ावा दे रही है जिससे स्मार्टफोन और मूल्यवर्धित फीचर फोन की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। ऐसे में प्रभावी करों में वृद्घि निराशा पैदा कर सकती है। जहां मौजूदा समय में ऐसे उत्पादों पर कर दर 8-9 फीसदी पर है वहीं जीएसटी के तहत यह बढ़कर 18 फीसदी हो जाएगी। कूलपेड इंडिया में मुख्य कार्याधिकारी सैयद ताजुद्दीन ने कहा, 'यदि सरकार किसी तरह की रियायत नहीं देती है तो इस नई कर व्यवस्था का बेहद नकारात्मक असर दिखेगा। स्मार्टफोन को कंज्यूमर डï्ïयूरेबल उत्पादों के समान समझा जाना गलत है।' कारबॉन मोबाइल्स के प्रबंध निदेशक प्रदीप जैन ने कहा, 'डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जीएसटी की आदर्श दर 5 फीसदी होनी चाहिए। जीएसटी की वजह से अतिरिक्त कीमत बोझ मजबूरी में उपभोक्ताओं पर डालना पड़ेगा, नहीं तो हमें अपने व्यवसाय को मुनाफे में बनाए रखना मुश्किल होगा।'
 
इंटेक्स टेक्नोलॉजीज के निदेशक एवं समूह मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) राजीव जैन ने कहा, 'आईटी उत्पादों के लिए घोषित दर कुछ हद तक अधिक रहने की आशंका है। जीएसटी में आयात और स्थानीय तौर पर निर्मित उत्पादों पर अलग अलग शुल्क को लेकर स्थिति अभी स्पष्टï नहीं है।' इंडियन बेवरिजेज एसोसिएशन का कहना है, 'हम मीठे पानी और स्वादिष्टï पानी को 12 फीसदी के अतिरिक्त उपकर के साथ 28 फीसदी के सबसे ऊंचे कर स्लैब में रखे जाने से निराश हैं। जीएसटी के तहत इन उत्पादों पर 40 फीसदी की प्रभावी कर दर मौजूदा औसत कर के साथ समानता बरकरार रखे जाने की तय नीति के भी खिलाफ है। इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और भारत में किसानों, रिटेलरों, वितरकों और बोतल कारोबारियों का पूरा तंत्र ही इसके दबाव की चपेट में आ जाएगा।' 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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