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फिर बढ़ने लगी सोने की तस्करी

राजेश भयानी / मुंबई 05 19, 2017

मार्च के बाद सोने की तस्करी में हुआ इजाफा

जीएफएमएस के मुताबिक नोटबंदी के बाद से सोने की तस्करी में आई थी कमी
बाजार में नकदी की कमी से तस्करी में गिरावट का दौर मार्च के मध्य तक जारी रहा
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने की तस्करी बढ़कर 1.9 टन प्रति सप्ताह रहने का अनुमान
हर महीने करीब 8-10 टन सोना गैर कानूनी तरीके से देश के भीतर पहुंचा

नोटबंदी के चलते नकदी की किल्लत होने से सोने की तस्करी भी काफी कम हो गई थी लेकिन धीरे-धीरे नकदी की उपलब्धता बढऩे से इस कीमती धातु की तस्करी दोबारा बढ़ गई है। धातु कारोबार की विश्लेषण संस्था जीएफएमएस का कहना है कि 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान होने के बाद से ही सोने की तस्करी काफी कम हो गई थी। बाजार में नकदी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से तस्करी में गिरावट का यह दौर इस साल मार्च के मध्य तक जारी रहा। इसी का नतीजा था कि जनवरी-मार्च, 2017 के दौरान तस्करी के जरिये देश में लाए जाने वाले सोने की मात्रा 1.3 प्रति सप्ताह पर आ गई थी। लेकिन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने की तस्करी के एक बार फिर रफ्तार पकड़ते हुए 1.9 टन प्रति सप्ताह रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब यही है कि हर महीने करीब 8-10 टन सोना गैर कानूनी तरीके से देश के भीतर पहुंच रहा है। यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है। 

बाजार का विश्लेषण करने से पता चलता है कि दिसंबर में हवाला कारोबारी तस्करी के लिए जरूरी डॉलर मुहैया कराने के एवज में 5.6 फीसदी से लेकर 6 फीसदी प्रीमियम मांग रहे थे लेकिन अब वह भी घटकर करीब 3 फीसदी पर आ गया है। डॉलर पर देने वाले प्रीमियम में कटौती होने से सोने की तस्करी और भी आकर्षक हो गई है। स्वर्ण कारोबार से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि जब बाजार में भुगतान भी अधिक हो रहा था तब भी प्रवाह बना हुआ था। दरअसल तस्कर अपने ही बनाए सिलसिले को बनाए रखना चाहते थे।  

जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के अग्रणी विश्लेषक-कीमती धातु सुधीश नाम्बियत ने कहा, 'बाजार में नकदी की आवक बढ़ते ने सोने के गैरकानूनी कारोबार पर पड़ रहा दबाव कम हो गया है। वैसे सोने का गैरकानूनी कारोबार अव्वल दर्जे के शहरों की तुलना में तीसरे दर्जे के शहरों में अधिक हो रहा है।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लेनदेन की अधिकतम सीमा के 3 लाख रुपया पर तय हो जाने से कारोबारी पकड़े जाने के डर से इससे अधिक खर्च करने से परहेज कर सकते हैं।

हालांकि सोने की तस्करी उसी समय से बढ़त पर है जब सरकार ने सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए इस पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया था। वर्ष 2013 में सोने पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया था। उस फैसले ने सोने की तस्करी को इस तरह से बढ़ाया कि अगले तीन साल तक 150 टन से लेकर करीब 200 टन तक सोना हरेक साल गैर कानूनी तरीके से देश के भीतर आता रहा। लेकिन नोटबंदी ने  डॉलर पर लगने वाले हवाला प्रीमियम को बढ़ा दिया था जिससे सोने की तस्करी के लिए जरूरी डॉलर मिलने कम हो गए। उस समय अवैध कारोबार में भी डॉलर मिल पाना खासा मुश्किल हो गया था।

जीएफएमएस ने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि जनवरी के बाद से आम लोगों के पास नकदी की उपलब्धता लगातार बढ़ती चली गई है। अप्रैल महीने में तो बैंकों में जमा धन से भी अधिक नकदी लोगों के पास थी। जीएफएमएस ने मार्च तिमाही के लिए जारी अपनी रिपोर्ट में भी कहा था कि इस दौरान भारत में आभूषण की खपत एक साल पहले की तुलना में 46 फीसदी तक बढ़कर 107 टन पर पहुंच गई। देश के कुछ राज्यों के सूखे की चपेट में आने से जनवरी-मार्च 2016 में सोने की खपत घट गई थी। पिछली तिमाही में सोने की तुलनात्मक खपत बढऩे के बावजूद मात्रा के हिसाब से यह पिछले 10 वर्षों के औसत से कम ही रही। 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जुलाई महीने से देश भर में लागू होने वाला है और उसे ध्यान में रखते हुए स्वर्ण कारोबारियों ने पहले से ही सोने की जमाखोरी करनी शुरू कर दी है। सुधीश कहते हैं, 'साल के दूसरे हिस्से में स्वर्ण आयात काफी हद तक आम उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करेगा। उस समय खुदरा जमाखोरी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। जून के तीसरे हफ्ते से सोने के आयात में गिरावट आ सकती है।'
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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