Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Saturday, May 27, 2017 11:08 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम मुद्रा खबर

'आरबीआई को एनपीए नियंत्रित रखने की जरूरत'

जयदीप घोष /  May 17, 2017

एनपीए अध्यादेश के जरिये एनपीए की समस्या के समाधान की सरकार की पहल के बाद बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव दिखने की उम्मीद है। एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने जयदीप घोष के साथ साक्षात्कार में बताया कि आरबीआई नियामक के तौर पर न ही अपनी पहुंच बढ़ा रहा है और न ही उसके द्वारा वाणिज्यिक निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। पेश हैं मुख्य अंश:

 
क्या एनपीए अध्यादेश से समस्या का समाधान निकल आएगा?
 
यह बहुत ज्यादा कारगर नहीं होगा, लेकिन महत्त्वपूर्ण बिंदु यह है कि आरबीआई, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बैंकों के फंसे कर्ज के समाधान को प्राथमिकता दी गई है। इस अध्यादेश से आरबीआई को बैंकों को स्थिति को यथावत रखने के बजाय समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करने में मदद मिली है। 
 
क्या बैंक अपनी स्वायत्तता खो रहे हैं?
 
बैंक समाधान की कोशिश बरकरार रखेंगे। इसे लेकर तर्कहीन बहस हो रही है कि क्या बैंक अपनी स्वायत्तता खो रहे हैं या क्या आरबीआई या सरकार स्थिति का सूक्ष्म ढंग से प्रबंधन करेगा। एक नियामक के तौर पर आरबीआई निश्चित तौर पर अपनी अपनी हद पार नहीं कर रहा है, न ही उसके द्वारा वाणिज्यिक निर्णय लिए जाने की उम्मीद की जा रही है। फिर भी, व्यवस्था में मजबूती लाना नियामक का काम है। दुनियाभर में, केंद्रीय बैंक और सरकारें बेहद असाधारण परिस्थितियों में दखल देती हैं। 
 
संयुक्त ऋणदाताओं के फोरम (जेएलएफ) को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सभी बैंक एकमत नहीं हैं। क्या इससे समस्या का समाधान निकलेगा? 
 
जेएलएफ इन प्रक्रियाओं को उचित परिणाम पर पहुंचाने में सक्षम नहीं रहा है। सामंजस्य स्थापित करना और हर किसी को एक मंच पर लाना कठिन साबित होगा। इसके अलावा बैंकों से सभी बोर्ड मंजूरियां हासिल करने जैसी समस्याएं भी हैं और इनके अलावा अन्य समस्याओं में कुछ बैंकों द्वारा नकारात्मक असर की आशंका की वजह से किसी निर्णय पर आगे बढऩे में अनिच्छा जताना भी शामिल है। कुछ मामलों में जेएलएफ में काफी कार्य किया गया है। 
 
फंसे कर्ज वाले बैंकों के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा हालात में किसी नए संस्थान की स्थापना की कोशिश करने के बजाय एनपीए का समाधान तलाशना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। सिर्फ बैंकों में फंसे कर्ज का अंबार लगाने से यह समस्या स्वत: नहीं सुलझेगी। नया संस्थान बनाना समय लगने वाली प्रक्रिया है। इससे इसे लेकर बहस तेज हो जाएगी कि क्या इस पर मुख्य रूप से सार्वजनिक का नियंत्रण होना चाहिए या या निजी क्षेत्र का। यदि सरकार इसमें पूंजी डालती है तो आलोचक यह आरोप लगाएंगे कि यह सरकार की एक इकाई से कोष निकाल कर दूसरी कंपनी में लगाने जैसा है। इसलिए कई विकल्प तलाशने की जरूरत होगी। 
 
रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डेवलपमेंट) ऐक्ट, 2016 (रेरा) से उपभोक्ताओं को कितना फायदा होगा?
 
रेरा उपभोक्ताओं के लिए आत्मविश्वास का निर्माता है। यह उद्योग के परिचालन के तौर-तरीकों में बदलाव लाएगा और पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। लेकिन हमें सिस्टम को नए नियमों के अनुकूल ढलने में सक्षम बनाने के लिए समय देना होगा। शुरुआती चरण में, रियल एस्टेट नियामकों के लिए प्रतिक्रियाएं हासिल करना और डेवलपरों और उपभोक्ताओं के हितों को संतुलित बनाना जरूरी है। 
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   New to investing in shares?
  Get a Forex Card at 0 Currency Conversion Charges.
  Rs 2 lakh health coverage @ Rs 8* per day
  New to the Stock Market? Take your FirstStep
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Open a demat account with Sharekhan & learn online trading.
Super Saver Health Insurance For Your Family
  आपका मत
 क्या अभी तेजी के रथ पर सवार रहेगा बाजार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.