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पूंजी लाभ पर सेबी की नजर

श्रीमी चौधरी / मुंबई 05 15, 2017

पूंजीगत प्राप्ति लाभ का दुरुपयोग

सेबी ने 11,000 लोगों की सूची आयकर विभाग को सौंपी, जताई कर चोरी की आशंका
5 लाख रुपये के शेयर खरीदने वाले करीब 11,000 लोग आ सकते हैं इस जांच के दायरे में
ये इकाइयां दीर्घावधि पूंजी प्राप्ति में लाभ के लिए मुखौटा कंपनियों का करती थीं इस्तेमाल

दीर्घावधि पूंजी प्राप्ति लाभ (एलटीसीजी) के खत्म होने का डर एक बार फिर दलाल पथ पर हावी हो सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि चवन्नी शेयरों में कारोबार के जरिये इसके दुरुपयोग के 11,000 मामले बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार सेबी नेपिछले हफ्ते इन इकाइयों की नई सूची आयकर विभाग को भेजी है, जिनमें पूंजीगत लाभ के प्रावधानों का कथित दुरुपयोग कर करीब 34,000 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका है। इसके साथ ही नियामक ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए सतर्कता भी बढ़ाएगा क्योंकि इसके मामले बढ़ते प्रतीत हो रहे हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब सरकार ने एक साल से अधिक समय तक शेयर को बनाए रखने के मामले में पूंजीगत प्राप्ति के लाभों को खत्म करने के संकेत दिए हैं। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि उन्हें बाजार नियामक की ओर से नई सूची दी गई है और इन इकाइयों के खिलाफ कारर्वाई शुरू की गई है। उन्होंने कहा, 'लेनदेन के उपलब्ध कराए गए ब्योरे से पता चलता है कि इन इकाइयों ने कर चोरी के लिए शेयर बाजार का दुरुपयोग किया है और धनशोधन की भी आशंका है।'

सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की बिक्री पर मुनाफे के मामले में जहां प्रतिभूति लेनदेन कर चुकाया जाता है, वहां अगर निवेश 12 माह से ज्यादा समय तक बनाए रखा गया हो, तो दीर्घावधि पूंजीगज लाभ कर नहीं देना पड़ता है। हालांकि नियामक और आयकर विभाग ने पाया कि इस प्रावधान का दुुरुपयोग अक्सर चवन्नी शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए किया जाता है।

सेबी के एक अधिकारी ने कहा, 'ऐसा देखा गया है कि आकांक्षी शख्स फर्जी एलटीसीजी रसीद बनाकर सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों, जो आमतौर पर चवन्नी शेयर होते हैं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नियंत्रित करने वाले शेयर बाजार के ऑपरेटरों से संपर्क करते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेटर लाभार्थियों को करवंचना के लिए ऐसी सूचीबद्ध फर्मों में निवेश करने की सलाह देता है। ये फर्में लाभार्थियों को मामूली कीमत पर तरजीही शेयर का आवंटन करती हैं। ये शेयर एक साल के लिए लॉक-इन अवधि वाले होते हैं। इस तरह से ऑपरेटर फर्जी तरीके से शेयरों की कीमतें बढ़ाते हैं।

सेबी ने जांच पाया कि पिछले तीन वर्षों में 11,000 इकाइयों ने ऐसीसूचीबद्ध  कंपनियों में 5 लाख रुपये से अधिक के शेयर खरीदे हैं, जिनका कोई कारोबार भी नहीं है। सेबी ने इन इकाइयों के आंकड़े कर अधिकारियों को दिए हैं। मामले के जानकार एक सूत्र ने बताया कि शेयर बाजार के ऑपरेटर निवेशकों के हित में कृत्रिम रूप से ऐसी कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाते हैं और निवेशक मुनाफे पर दीर्घावधि पूंजी लाभ के तौर पर दावा करते हैं।  सेबी ने उन्नत डेटा विश्लेषण और पिछले तीन साल के ट्रेडिंग एवं निगरानी डेटा के एकीकरण के साथ ही अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) विवरण के जरिये इन इकाइयों की पहचान की है। कर चोरी करने वाली इन इकाइयों में से ज्यादातर कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और दिल्ली की हैं।
Keyword: sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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