Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, July 26, 2017 08:09 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम बाजार खबर

ढूंढे जा रहे पी-नोट्स के लाभार्थी

श्रीमी चौधरी / मुंबई 05 14, 2017

आयकर विभाग का शिकंजा
ऑफशोर डेरिवेटिव के खुलासे में मिली विसंगतियों की जांच कर रहा कर विभाग
करीब आधा दर्जन कंपनियां आ सकती हैं इस जांच के दायरे में
अधिकारी ने कहा, नो योर कस्टमर (केवाईसी) में दर्ज ब्योरा कर अधिकारी के पास मौजूद डेटाबेस से मेल नहीं खाता। हमें इश्यू करने वालों से और सूचनाएं चाहिए ताकि यह निश्चित हो सके कि किसी कर कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ है
मॉरीशस और सिंगापुर के साथ कर संधियों के संशोधन की पृष्ठभूमि में देखने को मिल रहा है यह कदम

आयकर विभाग की अंतरराष्ट्रीय कराधान इकाई ने ऑफशोर डेरिवेटिव (ओडीआई) जारी करने वालों से पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) सबस्क्राइबर यानी लाभार्थी का ब्योरा मांगा है। उच्च पदस्थ कर अधिकारी के मुताबिक, आयकर विभाग को संदेह है कि इन प्रतिभूतियों का इस्तेमाल बिना हिसाब वाली रकम को वैध बनाने के लिए किया जा रहा है। यह मसला तब सामने आया जब कर अधिकारियों ने ओडीआई जारी करने वालों के डिस्क्लोजर में कुछ निश्चित विसंगति पाई। पी-नोट जारी करने वाले करीब आधा दर्जन कंपनियां इस जांच के दायरे में आ सकती हैं।

अधिकारी ने कहा, नो योर कस्टमर (केवाईसी) में दर्ज ब्योरा कर अधिकारी के पास मौजूद डेटाबेस से मेल नहीं खाता। हमें इश्यू करने वालों से और सूचनाएं चाहिए ताकि यह निश्चित हो सके कि किसी कर कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। हमारे पास अगले कुछ हफ्तों में आंकड़े उपलब्ध होंगे। यह कदम मॉरीशस और सिंगापुर के साथ कर संधियोंं के संशोधन की पृष्ठभूमि में देखने को मिल रहा है। अभी तक इन देशों से आने वाले सभी निवेश को अल्पावधि के पूंजीगत कर लाभ से छूट मिलती थी। हालांकि आगामी दिनों में अल्पावधि का पूंजीगत लाभ कर इन लेनदेनों पर लगाया जाएगा। कर आर्बिट्रेज का फायदा उठाते हुए दुनिया भर के निवेशकों ने इन देशों की मुखौटा कंपनियों के जरिए भारतीय इक्विटी में निवेश किया है।

इसके अलावा कर विभाग उन इकाइयों पर नजर रखे हुए है, जिसने हाल में अपना आधार या तो उन देशों में शिफ्ट कर दिया है या करने की प्रक्रिया मेंं हैं, जिसके साथ दोहरा कराधान अवॉयडेंस संधि या विशेष कर संधि है मसलन फ्रांस, स्वीडन या नीदरलैंड। यह निवेशकों को भारत में कर नहीं चुकाना होता है। इन देशों के जरिए निवेश जनरल एंटी अवॉयडेंस नियम (गार) को बेअसर कर देगा, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हुआ है।

अशोक माहेश्वरी ऐंड एसोसिएट्स एलएलपी के पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, दूसरे देशों को अपना आधार शिफ्ट करना उन चिंताओं में से एक है, जिसने कर अधिकारियोंं में हलचल पैदा की है। इन देशोंं के जरिए भारत में निवेश करने (जिनके साथ विशेष संधि है) से सरकार के लक्ष्य में ठहराव आ सकता है। पारदर्शिता के अभाव के चलते पी-नोट्स भारत के कई नियामक के रेडार पर रहा है। पी-नोट्स अनिवार्य रूप से उन ब्रोकरों की तरफ से जारी डेरिवेटिव्स हैं जो भारतीय पूंजी बाजार नियामक के पास विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के तौर पर पंजीकृत हैं। इसे भारतीय बाजार में अप्रत्यक्ष निवेश का जरिया माना जाता है और मोटे तौर पर उन निवेशकों की तरफ से इस्तेमाल होता है जिनका भारत में निवेश कम है और वह अपना अनुपालन लागत कम करना चाहते हैं।

हालांकि डिस्क्लोजर के लिहाज से पर्याप्त जांच व संतुलन के अभाव में इस जरिये का गलत इस्तेमाल होता है क्योंकि निवेशक अपनी बेहिसाब रकम ओडीआई के जरिए भारतीय इक्विटी में लगा देते हैं। इसे देखते हुए सरकार की तरफ से गठित विशेष जांच टीम ने सरकार से अनुरोध किया था कि पी-नोट्स से जुड़े नियामकीय ढांचे को वह सख्त बनाए। साल 2016 में बाजार नियामक सेबी ने पी-नोट्स का नियमन सख्त बनाया था। नए नियम के तहत सेबी ने केवाईसी की जरूरतों में इजाफा किया है, हस्तांतरणीयता पर लगाम कसा है और पी-नोट इश्यू करने वाले और इसके धारकों के लिए सूचना को और सख्त बनाया है। इश्यू करने वालोंं को एंटी-मनी लॉन्डरिंग कानून का पालन अनिवार्य बनाया गया है।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि सख्ती के बाद भी ऐसे जरिए का गलत इस्तेमाल हो रहा है। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बाजार में पी-नोट निवेश (इक्विटी, डेट व डेरिवेटिव) मार्च 2017 के आखिर में 1,78,437 करोड़ रुपये था। मार्च 2017 में एफपीआई के कुल निवेश में पी-नोट की हिस्सेदारी 6.6 फीसदी थी। डिस्क्लोजर संबंधी नियम मेंं सख्ती के चलते कुल एफपीआई परिसंपत्तियों में पी-नोट की हिस्सेदारी घट रही है।
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*

स्मार्ट इंवेस्टर

क्या है आंकड़ों के पीछे का सच?

Investmentsअगर आप कंपनी के परिणामों के आंकड़ों पर ही केवल निगाह डाल रहे हैं तो दोबारा

विनिवेश योजना से शेयर पर बना रहेगा दबाव

केयर्न इंडिया : मजबूत उत्पादन से मिली मदद

धातु कंपनियों की चमक बरकरार रहने के आसार

निवेश के नए साधन, अस्पताल, स्कूल और एटीएम

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.