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सरकारी बैंकों पर करें विचार

हंसिनी कार्तिक /  May 14, 2017

हालांकि हाल में सार्वजनिक क्षेत्र के (बैंक) पीएसबी शेयरों पर ज्यादातर सलाह इसे लेकर दी गई कि ये शेयर निवेशकों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि फंड प्रबंधक इस राय से पीछे हट सकते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि वे सितंबर 2016 से पीएसबी शेयरों के खरीदार रहे हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) और केनरा बैंक जैसे शेयरों में फंड प्रबंधकों ने इस अवधि में अपनी हिस्सेदारी 0.5-1.17 फीसदी तक बढ़ाई। हालांकि इससे पता चलता है कि शायद फंड प्रबंधक परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव कम होने के शुरुआती संकेत देख रहे हैं, वहीं केनरा बैंक, यूनियन बैंक और इंडियन बैंक के मार्च तिमाही के प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि दबाव में तेजी का सिलसिला थम रहा है।

 
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के रिटेल शोध प्रमुख धर्मेश कांत कहते हैं कि धातु, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर (मुख्य रूप से सड़क निर्माण) जैसे क्षेत्रों के साथ बदलाव का संकेत दिख रहा है और इससे बैंकों को इन मोर्चों पर सुधार दर्ज करने में मदद मिलनी चाहिए। ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के नितिन अग्रवाल उन कुछ विश्लेषकों में से एक हैं जो पीएसबी पर तटस्थ से लेकर सकारात्मक नजरिये पर कायम हैं। वह कहते हैं कि वित्त वर्ष 2017 आय पर दबाव का आखिरी वर्ष हो सकता है और एसबीआई, पीएनबी, बीओबी, यूनियन बैंक और केनरा बैंक जैसे शीर्ष पांच पीएसबी वित्त वर्ष 2018 में मजबूत अय वृद्घि दर्ज कर सकते हैं। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी से जुड़े एक और शोध प्रमुख भी अग्रवाल के विचारों से सहमत हैं। वह कहते हैं, 'हमने तीसरी तिमाही से ही पीएसवी पर नजर रखी है और खासकर प्रमुख पीएसबी के लिए ज्यादातर खराब खबरों का असर कीमतों में दिख चुका है।' कांत कहते हैं, 'भविष्य में, मुझे प्रावधान के पुनरांकन की उम्मीद है और इससे पीएसबी के लिए मुनाफे की स्थिति मजबूत होगी।' पीएनबी और केनरा बैंक जैसे कुछ बैंक दिसंबर और मार्च तिमाहियों में पिछले प्रावधानों के बदलाव पर जोर दे चुके हैं। यह रुझान बरकरार रहने की संभावना है, क्योंकि आरबीआई द्वारा हाल में किए गए प्रयासों की वजह से ऋण रिकवरी पर ध्यान तेजी से केंद्रित किया गया है। 
 
सीएलएसए के क्रिस्टोफर वुड ने 11 मई की अपनी ग्रीड ऐंड फीयर रिपोर्ट में लिखा, 'यदि आलोचक गलत साबित हुए हैं और फंसे कर्ज की समस्या में सुधार शुरू हो गया है तो यह भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख 'वैल्यू' सेक्टर के लिए सकारात्मक होगा।' दूसरी तरफ, समाधान प्रक्रिया में बैंकों को ऋणों के लिए अपने जोखिम में कमी लानी पड़ सकती है। सीएलएसए का अनुमान है कि भारत में फंसे कर्ज कुल ऋण (लगभग 160 अरब डॉलर) का लगभग 17 प्रतिशत हो सकते हैं। शोध प्रमुख का कहना है, 'इन फंसे कर्ज से लगभग 30-40 फीसदी बट्टïेखाते के प्रभाव का असर दिख चुका है।' हालांकि इसमें किसी तरह की नई बढ़ोतरी (जैसे वीडियोकॉन, जिसे हाल में एनपीए के तौर पर वर्गीकृत किया गया) बट्टïेखाते के संदर्भ में अनिश्चितताएं बढ़ा सकती है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी पर्याप्तता प्रभावित हो कसती है। हालांकि कई पीएसबी ने अतिरिक्त टियर-1 बॉन्ड (एटी-1) जारी कर अपनी पूंजीगत स्थिति मजबूत बनाई है जिससे उन्हें भविष्य में कुछ मदद मिलेगी। पीएसबी ने अप्रैल 2016 से दिसंबर 2016 तक एटी-1 बॉन्डों से लगभग 19,530 करोड़ रुपये जुटाए। लेकिन अभी भी सरकार द्वारा लगाई जाने वाली रकम इनमें से कुछ पीएसबी के लिए जरूरी हो सकती है, खासकर एनपीए समस्या के समाधान के समय में बड़े हेयरकट की वजह से भी इस तरह की जरूरत महसूस की जा सकती है। 
 
पीएनबी, एसबीआई, केनरा बैंक और यूनियन बैंक जैसे बैंकों के लिए जीवन बीमा, आवास वित्त और पूंजी बाजार जैसे गैर-प्रमुख व्यवसायों में संभावित हिस्सेदारी बिक्री पूरक पूंजी साबित हो सकती है। इस साल अब तक 20-60 फीसदी की वृद्घि के बावजूद मूल्यांकन नरम बना हुआ है और यह निवेश के लिहाज से मददगार भी है। आय में तेजी आने के साथ भविष्य में ये शेयर आकर्षक बने रह सकते हैं। हालांकि विश्लेषक सर्वसम्मति से निवेशकों को यह सलाह दे रहे हैं कि वे सिर्फ एसबीआई, पीएनबी, बीओबी, केनरा बैंक और यूनियन बैंक जैसे प्रमुख नामों के साथ ही निवेश में बने रहें। छोटे बैंकों में इंडियन बैंक पसंदीदा बना हुआ है। आईआईएफएल में मार्केट ऐंड कॉरपोरेट अफेयर्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष संजीव भसीन का कहना है, 'बाजार में काफी हद तक बुलबुले जैसी स्थिति दिख रही है। हालांकि परिसंपत्ति गुणवत्ता में कमजोरी का असर पीएसबी की कीमतों में दिख चुका है, लेकिन निवेशक किसी तरह की गिरावट का इस्तेमाल इन शेयरों को खरीदने के लिए कर सकते हैं।' येस बैंक द्वारा 2015-16 में एनपीए में अंडर-रिपोर्टिंग की ताजा खबरों ने बाजार को आश्चर्यचकित किया है और बैंक के शेयर में इससे निकट भविष्य में और गिरावट आ सकती है जिससे निवेशकों को अवसर मिलेंगे।
 
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