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अपने शेयरों में कब करें मुनाफावसूली

तिनेश भसीन /  May 14, 2017

जब से शेयर बाजार ने नई ऊंचाई को छुआ है, कई निवेशक इस बात पर असमंजस में हैं कि यह तेजी बरकरार रहेगी या नहीं। वे इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि मुनाफावसूली कर ली जाए और बाजार में दोबारा कदम रखने के लिए गिरावट का इंतजार किया जाए या अभी कुछ वक्त ठहरा जाए। असल बात तो यह है कि बाजार के बारे में सही वक्त का अंदाज लगाना आसान काम नहीं है। लेकिन अपने पोर्टफोलियो में शामिल शेयरों के लिए बिकवाली की रणनीति बनाकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बाजार ऊपर जाए या नीचे, आपको मुनाफा हर सूरत में होगा। 

 
केजरीवाल रिसर्च ऐंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अरुण केजरीवाल कहते हैं, 'बिकवाली का निर्णय नए निवेश के मामले में बहुत अहम साबित हो सकता है। जोखिम से बचने का यह सबसे बढिय़ा तरीका है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों और कारोबारियों को सुनिश्चित तौर पर मुनाफा मिलता है और गिरावट से भी काफी हद तक बचा जा सकता है।' शेयरों से निकलने की रणनीति पहले से तय हो तो यह भी तय रहता है कि आप अनुशासन में रहेंगे और भावनाओं में बहकर फैसले नहीं लेंगे।
 
लक्ष्य तय करें
 
किसी शेयर को खरीदने से पहले कंपनी की आय पर गहरी नजर डालें और यह भी देखें कि वह अपना कारोबार कितना बढ़ा सकती है। यह सब देखकर ही शेयर की बिकवाली की कीमत का लक्ष्य तय करें। उसके बाद शेयर खरीदें। अगर आपके शेयर बेचने के बाद वह और चढ़ जाता है तो अफसोस कभी न करें। कभी कभी आपका शेयर आपकी उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करता है या उम्मीद से बहुत अच्छा प्रदर्शन कर जाता है। ऐसी सूरत में शेयर से निकलने का निर्णय कीमत और समय के आधार पर लेना चाहिए। मान लीजिए कि आपने 1,000 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे किसी शेयर में निवेश किया है। आप तीन तिमाहियों में इसके 1,200 रुपये पर पहुंच जाने की उम्मीद कर रहे हैं। इसमें कई परिदृश्य भूमिका निभा सकते हैं। शेयर आपकी उम्मीद से ज्यादा चढ़ सकता है और दो महीने में ही अपने लक्ष्य (मान लीजिए 1,175 रुपये) के पास पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में सही रणनीति इससे निकलना ही है। यदि शेयर कीमत लक्ष्य को पार करता है तो इससे निकल जाएं। उस स्थिति में क्या होगा, जब तीन तिमाहियां बीत जाएं और आप अपने लक्ष्य से दूर बने रहें? मान लीजिए, शेयर 1,050 रुपये पर बना हुआ है। उस स्थिति में भी आपको इससे निकल जाना चाहिए। आपको यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि आपने गलत अनुमान लगाया था।
 
यदि आपने निवेश के लिए दीर्घावधि (दो वर्ष या इससे अधिक) को चुना है और ऐसे शेयर पर दांव लगा रहे हैं, जिसमें अच्छी वृद्घि देखी गई हो तो ऐतिहासिक मूल्यांकन दायरे पर विचार करें, जिसमें इसने कारोबार किया हो। आप उस स्थिति में निकलने का निर्णय ले सकते हैं, जब कंपनी अपने ऐतिहासिक रूप से ऊंचे मूल्यांकन के पास पहुंच चुकी हो। उदाहरण के लिए कंज्यूमर स्टेपल्स व्यवसाय में लगी कोई कंपनी 30 के लो पीई और अधिकतम 60 के पीई पर कारोबार कर सकती है। आप उस समय शेयर से निकलने का निर्णय ले सकते हैं, जब पी/ई 60 के नजदीक हो। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'इस रणनीति की खामी यह है कि कभी कभार कंपनियों के साथ साथ पूरा क्षेत्र रेटिंग में कमी का शिकार हो सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशक निकलने के लिए उचित मौका तलाशने में सक्षम नहीं होंगे।' वे इसके लिए टायर कंपनियों का उदाहरण देते हैं। इन कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से 8 से नीचे पी/ई पर कारोबार किया है। हाल में इनकी रेटिंग में बदलाव दर्ज किया गया और मौजूदा समय में 15-18 गुना के पी/ई पर कारोबार दर्ज किया गया। इसे देखते हुए आपको शेयर का नए सिरे से आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए। क्या आप शेयर को उसके मौजूदा परिदृश्य और मूल्यांकन को ध्यान में रखकर ही खरीदेंगे? यदि इसका जवाब 'हां' है तो इसकी बिकवाली न करें।
 
उचित बदलाव हो तभी बिकवाली
 
निवेशकों को यह ध्यान रखने की जरूरत होगी कि वे किसी खास शेयर को क्यों खरीदें और समय समय पर अपने इरादे में बदलाव करने की भी जरूरत होगी। यदि जिन कारणों को ध्यान में रखकर आपने किसी शेयर को खरीदा हो और उन कारणों में बदलाव आता है तो इससे निकलने की कोशिश करें। आईटी क्षेत्र के परिदृश्य में बदलाव दिखने और कंपनियों द्वारा आय में गिरावट दर्ज किए जाने के बाद चोकालिंगम अपने ग्राहकों को मिड-टियर कंपनियों में निवेश की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस उद्योग में मजबूती आएगी और छोटी कंपनियों का अधिग्रहण किया जाएगा। उनके कुछ निवेश दांव सही साबित हुए हैं और वह कई अन्य शेयरों से बाहर निकले हैं।
 
गैर-प्रमुख व्यवसायों में विविधीकरण
 
फंड प्रबंधक और निवेश सलाहकार इस नजरिये को लेकर एकमत हैं कि निवेशक को ऐसे व्यवसायों से बाहर हो जाना चाहिए। जब कोई क्षेत्र बाजार का ध्यान आकर्षित करता है तो कुछ कंपनियां इसमें किस्मत आजमाना शुरू कर देती हैं, भले ही यह उनके मौजूदा व्यवसायों से पूरी तरह अलग होता है। पीटर लिंच ने मुख्य रूप से इस 'डाइवर्सिफिकेशन' यानी विविधीकरण पर जोर दिया है। वर्ष 2000 के शुरू में कई लोगों ने सॉफ्टवेयर क्षेत्र में किस्मत आजमाई। यही हाल 2007 में यह क्षेत्र रियल एस्टेट का था। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कंपनी अपने मूल क्षेत्र से एकदम अलग कारोबार में उतरती है तो बिकवाली पर विचार किया जा सकता है। अगर मिड या स्मॉल कैप कंपनी हो तो बिकवाली में देर नहीं करनी चाहिए।
 
आय को प्रभावित करने वाली नकारात्मक खबरें
 
निवेशकों के लिए इस बारे में निर्णय लेना कठिन होता है। दवा कंपनियां यदि अपने निर्माण संयंत्रों में नियमों का उल्लंघन करती हैं तो उन्हें अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक से नोटिस मिल जाते हैं। सामान्य तौर पर औषधि कंपनियों के शेयर उस वक्त अधिक गिरते हैं, जब इसी तरह का कोई नोटिस उन्हें भेजा जाता है। डीएसपी ब्लैकरॉक म्युचुअल फंड के उपाध्यक्ष एवं फंड प्रबंधक अतुल भोले कहते हैं, 'निवेशकों को इसका अंदाजा लगा लेना चाहिए कि प्रबंधन इस तरह के दबाव से आसानी से मुकाबला कर सकता है या नहीं। उसके बाद ही उन्हें निवेश बरकरार रखने या बाहर निकलने के बारे में फैसला करना चाहिए। अक्सर होता यह है कि जब तक निवेशक कुछ सोच पाते हैं, शेयर धड़ाम हो चुका होता है।'
 
स्टॉप-लॉस है रामबाण
 
हो सकता है कि जैसे ही आप शेयर खरीदें, उसमें गिरावट शुरू हो जाए। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। ऐसा प्रमुख सूचकांक में गिरावट या किसी बड़े निवेशक द्वारा गलत निर्णय लेने आदि जैसी वजह से हो सकता है। 'हाउ टु मेक मनी इन स्टॉक्स' के लेखक विलियम जे ओ' नील के अनुसार आपको शेयर से उस समय बाहर हो जाना चाहिए जब वह आपके खरीद मूल्य से 7-8 फीसदी नीचे आ गया हो। उनके शोध के अनुसार यदि शेयर गिर कर इस दायरे तक आ चुका हो तो इसकी अधिक आशंका रहती है कि वह और गिरेगा और इसका मतलब है कि निवेश के वक्त आपने सही फैसला नहीं लिया। आपको सात-आठ फीसदी के स्टॉप-लॉस के साथ चिपके रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि जोखिम सहन करने की अपनी क्षमता के हिसाब से आप इसे बदल सकते हैं। 
 
बिना रणनीति रखे रहें शेयर
 
यह रणनीति उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है, जो लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, शेयर खरीदते हैं और उनमें बने रहते हैं। डीएसपी ब्लैकरॉक के भोले के अनुसार एक छोटे निवेशक के लिए श्रेष्ठ रणनीति यह है कि वह कुछ अच्छे उपभोक्ता-केंद्रित शेयरों में निवेश करे, जो तेजी से बढ़ रहे हों और बाजार में उतार चढ़ाव की परवाह किए बगैर उन्हें बनाए भी रखें। वह कहते हैं कि निवेश की लंबी अवधि छोटे निवेशकों को बार-बार शेयर खरीदने और बेचने की तुलना में अधिक प्रतिफल वाली साबित हो सकती है। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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