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आंकड़ों के नए आधार में माहौल खुशगवार

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली May 12, 2017

नई शृंखला के तहत भारत की अर्थव्यवस्था के आंकड़े दो पैमाने पर बेहतर नजर आ रहे हैं। इनमें एक है मात्रा के रूप मेंं औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और दूसरा है थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई)। जहां तक आधार वर्ष का सवाल है, सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में समानता लाने के लिहाज से ये आंकड़े आज जारी किए हैं। 
 
बहरहाल गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन को लेकर चिंताजनक स्थिति अब भी बनी हुई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जहां फरवरी के 1.9 प्रतिशत की तुलना में मार्च में 2.7 प्रतिशत बढ़ा है, डब्ल्यूपीआई महंगाई दर अप्रैल में 4 महीने के न्यूनतम स्तर 3.85 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो इसके पहले महीने में 5.29 प्रतिशत थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर महंगाई दर, जिसे पहले ही नई शृंखला के मुताबिक पुनरीक्षित किया जा चुका है, अप्रैल महीने में रिकॉर्ड गिरावट के साथ 2.99 प्रतिशत पहुंच गई है, जो इसके पहले महीने में 3.81 प्रतिशत थी। 
 
आज पेश की गई नई शृंखला में दोनों सूचकांकों के लिए आधार वर्ष 2011-12 रखा गया है, जो पहले 2004-05 था। आईआईपी की नई शृंखला में अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच मौजूदा शृंखला की तुलना में ज्यादातर महीनों में उच्च वृद्धि दर दिखाई गई है। इसकी प्रमुख वजह हाल के वर्ष को आधार वर्ष  बनाया जाना, रिपोर्टिंग डेटा के लिए पैनल में कारखानों की संख्या बढ़ाना और कुछ सामानों को निकालकर नए सामानों को शामिल किया जाना है। उदाहरण के लिए 2016-17 के किसी भी महीने में नई शृंखला में आईआईपी को शामिल नहीं किया गया। पुरानी शृंखला में छह महीनों- अप्रैल, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी में इसमें गिरावट आई है।
 
अगर कोई यह परिकल्पना करता है कि नोटबंदी का नवंबर 2016 मेंं ज्यादा असर नहीं पड़ा है, इसका असर दिसंबर से मार्च तक के 4 महीनों में नजर आता है। इस दौरान आईआईपी नवंबर के स्तर पर नहीं पहुंच सका, जो नवंबर में 5.7 प्रतिशत था। यही स्थिति पुरानी शृंखला में भी थी, जब आईआईपी वृद्धि 5.6 प्रतिशत थी, जो नोटबंदी के बाद के सर्वाधिक है। बहरहाल विनिर्माण क्षेत्र गिरकर 1.2 प्रतिशत रह गया, जो इसके पहले महीने में 1.4 प्रतिशत था।  यह तीन महीने की अवधि के दौरान न्यूनतम वृद्धि दर है, लेकिन दिसंबर के 0.9 प्रतिशत की तुलना में ज्यादा है जब नोटबंदी का बहुत बुरा असर पड़ा था। मार्च महीने में खनन क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई है, जो फरवरी में 4.6 प्रतिशत थी। वहीं बिजली उत्पादन 6.2 प्रतिशत बढ़ा है। समग्र ररूप से आईआईपी वृद्धि 2016-17 में 5 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 3.4 प्रतिशत थी। पुरानी शृंखला में वृद्धि दर मामूली थी। यह 2016-17 मेंं 0.7 प्रतिशत रही होती, जो इसके पहले साल में 2.5 प्रतिशत थी। 
 
आईआईपी की नई शृंखला में 809 वस्तुएं हैं जबकि पुरानी में 620 वस्तुएं थीं। स्टेरॉयड, सीमेंट क्लिंकर, प्री फैब्रिकेटेड कंक्रीट ब्लॉक, रिफाइंड पाम ऑयल जैसे 149 नए सामान जोड़े गए हैं, जबकि 124 सामान जैसे कैलकुलेटर, रंगीन टीवी पिक्चर ट्यूब, गुटखा आदि को बाहर किया गया है। आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का अधिभार पहले के 75.5 प्रतिशत से बढ़कर 77.6 प्रतिशत हो गया है, जबकि खनन का 14.3 प्रतिशत से घटकर 14.1 प्रतिशत और बिजली का 10.3 प्रतिशत से घटकर 7.9 प्रतिशत हो गया है।
 
डब्ल्यूपीआई की नई शृंखला में वस्तुओं की संख्या 676 से बढ़ाकर 697 कर दी गई है। कुल मिलाकर 199 नए सामान जोड़े गए हैं, जबकि 146 पुराने हटाए गए हैं। प्राथमिक सामग्री में नई सब्जियां व फल जैसे मूली, गाजर, ककड़ी, करेला, मौसमी, अनार, कटहल, नाशपाती को जोड़ा गया है। खनिज समूह में कॉपर कंसंट्रेट, लेड कंसंट्रेट और गार्नेट जोड़ा गया है, जबकि तांबा अयस्क, जिप्सम, केओलिन, डोलोमाइट, मैग्नेसाइट को निकाल दिया गया है। प्राकृतिक गैस को नई वस्तु के रूप में जोड़ा गया है। विनिर्माण वाली वस्तुओं में करीब 173 नई वस्तुओं जैसे कन्वेयर बेल्ट, रबर थ्रेड, स्टील केबल, टिश्यू पेपर, वुडेन स्प्लिंट जोड़े गए हैं, जबकि 135 सामान जैसे खांडसारी, पापड़, वीडियो सीडी प्लेयर आदि को निकाला गया है। विनिर्मित वस्तुओं का अधिभार डब्ल्यूपीआई की नई शृंखला में घटकर 64.2 प्रतिशत रह गया है, जो पुरानी शृंखला में 64.9 प्रतिशत था। ईंधन और बिजली का अधिभार 14.9 प्रतिशत से घटकर 13.1 प्रतिशत जबकि प्राथमिक वस्तुओं का अधिभार 20.1 प्रतिशत से बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गया है। 
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