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जिंस कीमतों में गिरावट से बेअसर रहेगी वृद्घि

आकाश प्रकाश /  May 10, 2017

जिंस कीमतों में गिरावट का असर वैश्विक वृद्घि की संभावनाओं पर पडऩे की आशंका न के बराबर है। इस संबंध में विस्तार से बता रहे हैं  आकाश प्रकाश

 
जिंसों की कीमतों में एक बार फिर गिरावट का दौर है। कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 50 डॉलर से नीचे आ गई है और लगातार गिर रही है। लौह अयस्क की कीमतें 30 फीसदी नीचे हैं। तांबा जैसी कई अन्य जिंसों के दाम दो अंकों में गिर चुके हैं। इस बात को लेकर आशंका बढ़ रही है कि पूरा जिंस क्षेत्र एक बार फिर भयंकर दबाव में आने वाला है। क्या वैश्विक वृद्घि पर इसका कोई असर होगा? क्या हमें चिंतित होने की आवश्यकता है? दुनिया भर के शेयर बाजारों में अच्छा खासा मूल्य देखा जा रहा है और वे मानकर चल रहे हैं कि वैश्विक वृद्घि तेज बनी रहेगी। चिंता की बात यह है कि दुनिया भर में रिफ्लेशन कारोबार (करों में कटौती, मुद्रा की आपूर्ति में बदलाव और ब्याज दर में कमी) के अगुआ दो देश चीन और अमेरिका दोनों में कमजोरी दिख रही है। 
 
अमेरिका में आर्थिक सूचकांक में खास अवधि की तेजी के बाद गिरावट आ रही है। हालिया आंकड़े खासे कमजोर हैं। वर्ष 2017 की पहली तिमाही में अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में तिमाही आधार पर केवल 0.7 फीसदी और सालाना आधार पर महज 1.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वास्तविक निजी व्यय में वर्ष 2017 की पहली तिमाही में तिमाही आधार पर 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान वाहन बिक्री में 2.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। ये तमाम आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में धीमापन आया है। इस बीच हमें कर सुधार, राजकोषीय नीति और बुनियादी निवेश पर ध्यान रखना होगा। ऐसा करके ही अर्थव्यवस्था में वृद्घि को लेकर नए सिरे से उत्साह जगाया जा सकता है। 
 
चीन के पास अपने अलग मुद्दे हैं। इसमें ऋण में धीमापन शामिल है। चीन के अधिकारी व्यवस्थागत मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। वहां आशंका है कि संपत्ति प्रबंधन संबंधी उत्पादों और छद्म बैंकिंग व्यवस्था पर किया गया हमला ऐसी दुर्घटना को जन्म दे सकता है जो चीन के पूरे वृद्घि चक्र को संदेह के घेरे में डाल सकता है। पर्याप्त नकदी वाली अर्थव्यवस्था वाले बाजार को सख्त वित्तीय परिस्थितियां पसंद नहीं आती हैं। चीन में लंबे समय से यह आशंका व्याप्त है कि नकदी की उपलब्धता को कम किया जा सकता है। चीन में मंदी का पूरा मामला इसी नकदी को कम करने से जुड़ा हुआ है। बाजार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ऋण में कमी का असर ऋणदाताओं पर पड़ सकता है। अगर देनदारी में चूक के मामले नियंत्रण से बाहर होने लगे तो हालात बिगड़ सकते हैं। 
 
अभी हाल तक हर कोई वैश्विक सुधार के बारे में बात कर रहा था लेकिन अब वह बेपटरी होता दिख रहा है। क्या जिंस कीमतों में गिरावट धीमी वृद्घि के लिए उत्तरदायी है या फिर मांग और आपूर्ति का गणित अपना समायोजन कर रहा है। चीन जिंस का बड़ा उपभोक्ता है। ऋण की परिस्थितियों को लेकर प्रशासनिक सख्ती के बावजूद वहां भविष्य ठीक ही नजर आ रहा है। चीन में जिंस की मांग का सीधा संबंध विनिर्माण से है। चीन में फिलहाल आवासीय योजनाओं पर कोई संकट नजर नहीं आ रहा है। अगर यह मांग बनी रहती है तो जिंस कीमतों में गिरावट का दुष्चक्र नहीं शुरू होगा। अधिकांश निवेशकों का यह दृढ़ विश्वास है कि छद्म बैंकिंग के खिलाफ सख्ती के चलते अर्थव्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। हाल के वर्षों में यही देखने को मिला है कि चीन के अधिकारी अल्पावधि की वृद्घि को बचाने के लिए दीर्घावधि के ढांचागत सुधार का बलिदान कर देते हैं। 
 
अधिकांश विशेषज्ञों को पूरा यकीन है कि पहली तिमाही के बाद सुधार देखने को मिलने लगेगा। यूरोप में चक्रीय सुधार गति पकड़ रहा है। खासतौर पर फ्रांस में एमैनुएल मैक्रां की जीत के बाद और चीन के अलावा शेष उभरते बाजारों की बेहतर स्थिति को देखते हुए वैश्विक जिंस बाजार की मांग मजबूत है। कीमतों में मौजूदा गिरावट का मांग से कोई लेनादेना नहीं है। 
ऐसा लगता है कि आपूर्ति को लेकर किया गया नए सिरे से आकलन ही इस गिरावट के लिए जिम्मेदार है। चीन में जिंस कीमतों में गिरावट को काफी हद तक नकदी की स्थिति से समझा जा सकता है। ऐसा लगता है कि जिंस की वास्तविक मांग बरकरार रहेगी लेकिन हाल के दिनों में चीन के जिंस विनिमय को लेकर जो अटकलें लगीं उन्होंने कीमतों को अवास्तविक स्तर पर पहुंचा दिया। इन बातों से चिंतित चीनी अधिकारियों ने सख्ती आरंभ की। इसके बाद चीन में जिंस कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया। लौह अयस्क की कीमतों में 30 फीसदी की गिरावट आई। जाहिर है इसका संबंध मांग से नहीं नजर आता। 
 
तेल कीमतों की बात करें तो बाजार एक बार फिर तार्किक अनुमानों की ओर बढ़ रहा है। सऊदी अरब अमेरिकी शेल गैस उद्योग से निपट पाने में नाकाम रहा है। सऊदी अरब और ओपेक देशों ने तेल उत्पादन में जो भी कटौती की हो अमेरिकी शेल गैस ने उसकी भरपाई कर दी है। उसने तेल कीमतों में स्थिरता का भरपूर लाभ उठाया। सऊदी अरब ने उत्पादन में जो कटौती की उसकी बदौलत शेल गैस उत्पादकों की बाजार हिस्सेदारी में ही इजाफा हुआ। इन हालात में बाजार प्रतिभागी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ओपेक देशों की ओर से भविष्य में और अधिक कटौती की संभावना नहीं है और सऊदी अरब एक बार फिर बाजार हिस्सेदारी पर ध्यान केंद्रित करेगा, बजाय कि कीमतों में इजाफा करने के। बाजार प्रतिभागियों ने इस नई हकीकत को स्वीकार कर लिया है। 
 
इन बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि जिंस कीमतों में हालिया गिरावट का असर वैश्विक वृद्धि संभावनाओं पर नहीं पड़ेगा। ऐसा लगता है कि इसके चलते मांग और आपूर्ति के गणित में और तार्किक हालात बनेंगे। इससे वित्तीय परिस्थितियां भी बदलेंगी। जिंस उत्पादकों के अलावा जो देश इन पर बहुत अधिक निर्भर हैं उनके लिए जिंस कीमतों में गिरावट अत्यंत सकारात्मक है। इसकी मदद से जिंस उत्पादकों से उपभोक्ताओं की ओर परिसंपत्ति हस्तांतरण हो रहा है। उदाहरण के लिए भारत गिरती जिंस कीमतों लेकिन स्थिर वैश्विक वृद्धि से बड़े पैमाने पर लाभान्वित होने वाला देश है। स्थिर वैश्विक वृद्धि, नकदी की स्थिति, सस्ती ङ्क्षजस और तार्किक जोखिम आदि मिलकर उसके लिए बेहतर माहौल बना रहे हैं। भारत अन्य उभरते देशों से अलग खड़ा है। आशा करनी चाहिए कि ये हालात जारी रहेंगे। 
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण, jins,,
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